क्या सीवर के पानी में जिंदा रह सकते हैं कोरोना वायरस, रिपोर्ट में मिली दिलचस्प जानकारी

coronavirus research: तेलंगाना में सीवर के पानी में कोरोना वायरस के अंश होने का दावा किया गया है। इस संबंध में सेंटर फॉर मालिक्यूरर बॉयोलोजी ने जानकारी दी।

क्या सीवर के पानी में जिंदा रह सकते हैं कोरोना वायरस, रिपोर्ट में मिली दिलचस्प जानकारी
कोरोना वायरस के स्ट्रेन पर अलग अलग देशों में हो रहा है शोध 

मुख्य बातें

  • तेलंगाना में सीवर के पानी में कोरोना वायरस के अंश मिलने की जानकारी
  • सीसीएमबी ने अपने रिपोर्ट में किया दावा, सीवर में मिले कोरोना वायरस के अंश खतरनाक नहीं
  • सीसीएमबी सीवर में कोरोना वायरस के जरिए अनुमान को ज्यादा पुख्ता बता रहा है।

नई दिल्ली। कोरोना की महामारी से बचने के लिए एक अदद ऐसे वैक्सीन की जरूरत है जो सबके विश्वास पर खरा उतरे। दरअसल रूस की वैक्सीन स्पुतनिक वी पर ब्रिटेन, जर्मनी, इंग्लैंड और विश्व स्वास्थ्य संगठन को ऐतराज है। इन सबके बीच कोरोना वायरस को लेकर अलग अलग तरह की जानकारी सामने आ रही है कि किस तरह से उसके स्वरूप में बदलाव हो रहा है। कुछ जानकार कहते हैं कि अब यह कमजोर पड़ रहा है तो दूसरों के विचार जुदा हैं। हाल ही में तेलंगाना में बताया गया कि सीवर में कोरोना वायरस के अंश मिले हैं और वो लंबे समय तक जिंदा रह सकते हैं। इस संबंध में  सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर बॉयोलॉजी यानि सीसीएमबी ने दावा किया है कि उसे सीवर के पानी में कोरोना वायरस के अंश मिले हैं।  

सीवर के पानी में कोरोना वायरस
सीसीएमबी का कहना है कि सीरोलॉजिकल टेस्ट, रैपिड एंटीजेन टेस्ट या आरटीपीसीआर से व्यक्ति के संक्रमित होने की जानकारी मिल सकती है। लेकिन इसकी कुछ सीमा है,उदाहरण के लिए इस तरह की प्रक्रिया में हर एक शख्स का सैंपल लेना होता है, जबकि सीवर के पानी से भी आप वायरस का पता कर सकते हैं और इसी तरह की संभावना की तलाश की जा रही थी। अच्छी बात यह है कि सीवर के पानी में वायरस के अंश देखने में कामयाबी मिली । सीसीएमबी टीम यह भी पता लगा सकी कि पानी में वायरस की मात्रा कितनी है।

इलाके में संक्रमण को बता सकते हैं
सीसीएमबी का कहना है कि इस तरीके से दो तरह से मदद मिलती है। लोगों के  पास जाने की बजाय सीवर पा पानी कई बार इकट्ठा कर उसका टेस्ट करना है। मौजूद वायरस का लोड आपको इस बात का इशारा देगा कि किसी भी सर्वे वाले इलाके में संक्रमण कितना अधिक है। सीसीएमबी ने अपनी रिसर्च में पाया है कि जिस इलाक़े में सीवर के पानी का टेस्ट किया गया वहां करीब छह लाख लोग संक्रमित होने की आशंका जताई गई। लेकिन ये आंकड़े  सरकारी आंकड़ों से मेल नहीं खा रहे थे। 

सरकारी और सीसीएम के आंकड़ों में फर्क नहीं
इस सवाल के जवाब में सीसीएमबी का कहना है कि सरकार के जारी किए गए आंकड़े अलग नहीं हैं। सरकार ने 24,000 टेस्ट किए जिनमें से 1,700 लोगों के नतीजे पॉज़िटिव आए,  जो टेस्ट किए गए हैं वो रैपिड एंटीजेन टेस्ट हैं जो कम पुख्ता माने जाते हैं। इसका अर्थ यह है कि आरटी-पीसीआर टेस्ट का तरीका अपनाया जाता तो टेस्ट का नतीजा शायद 2,000 से 2,400 तक होता। 

टेस्टिंग का भरोसेमंद तरीका
ये टेस्टिंग का सस्ता और भरोसेमंद तरीका है और आपको शहर के दस हज़ार लोगों के सैम्पल टेस्ट करने की ज़रूरत नहीं. आपको केवल दस सीवर प्लांट में जाकर सैम्पल टेस्ट करना होता है और पूरे शहर को लेकर जानकारी दी जा सकती है। संक्रमण का पता लगाने के लिए यूरोप, अमरीका और ऑस्ट्रेलिया में इस तरीके का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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