फिलीस्तीन में Hamas से लड़ेगी पाकिस्तान की सेना! गाजा में आसिम मुनीर क्यों भेजेंगेअपनी सेना?
International Stabilization Force For Gaza: कंगाल पाकिस्तान से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसी डिमांड की है, जिसकी वजह से शहबाज शरीफ सरकार की नींद उड़ चुकी है। ट्रंप ने गाजा में हमास के खिलाफ पाकिस्तान सेना की तैनाती करने का ऑर्डर दिया है। दरअसल, इजरायल-हमास के बीच सीजफायर की शर्तों के मुताबिक गाजा में सुरक्षा व्यवस्था को देखने के लिए इंटरनेशनल फोर्स को तैनात किया जाना है।
- Authored by: Piyush Kumar
- Updated Dec 18, 2025, 04:14 PM IST
International Stabilization Force For Gaza: दुनिया में एक ऐसा मुल्क है, जहां की सरकार तो जनता चुनती है लेकिन देश के फैसले सेना लेती है। इस देश की सेना और सरकार अपने फायदे के लिए जनता के दीन-ओ-ईमान से भी समझौते करने से गुरेज नहीं करती। कोई इसे 'आतंक की फैक्ट्री' कहता है। कोई भिखारी तो कोई 'आतंकिस्तान'। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसका नाम पाकिस्तान है।
जब गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्ध चल रहा था, तो हर फिलिस्तीनी की मौत पर पाकिस्तान के लोग विलाप करते थे। पाकिस्तान में आए दिन इजरायल के खिलाफ रैलियां निकलती हैं। दूसरे देश में रहने वाले पाकिस्तान के लोग फिलिस्तीन और हमास (Hamas) के लड़ाकों के लिए आवाज उठाते। आज उसी देश की सेना गाजा में हमास के खिलाफ लड़ाई लड़ने को तैयारी कर रही है।
पाकिस्तान की बेबस जनता न तो ऐसा होने से रोक सकती है और न ही शहबाज शरीफ की सरकार, सेना को ऐसा करने से मना कर सकती है क्योंकि फरमान 'सुप्रीम कमांडर' का है। ये 'सुप्रीम कमांडर' पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर (Asim Munir) नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) हैं।
व्हाइट हाउस में ट्रंप ने मुनीर और शहबाज सरकार से मुलाकात की।(फोटो सोर्स: AP)
आसिम मुनीर को फिर मिला लंच का न्योता
पिछले छह महीनों में ट्रंप और मुनीर के बीच तीसरी बार मुलाकात होने वाली है। एक बार तो ट्रंप ने मुनीर को लंच के लिए न्योता भी दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ट्रंप ने एक बार फिर मुनीर को लंच का न्योता दिया है, लेकिन इस बार की कहानी कुछ अलग है।
दरअसल, इस बार पाकिस्तान के आर्मी चीफ के सामने परीक्षा की घड़ी है। इस बार ट्रंप और मुनीर के बीच गाजा फोर्स पर चर्चा होनी है। दरअसल, गाजा में तो हमास और इजरायल के बीच सीजफायर लागू है, लेकिन सीजफायर की शर्तों के मुताबिक गाजा में सुरक्षा व्यवस्था को देखने के लिए इंटरनेशनल फोर्स को तैनात किया जाना है। हालांकि, अब तक इस फोर्स का गठन नहीं हो पाया है।
सीजफायर लागू होने के बीच हमास के लड़ाकों ने एक बार फिर हमास को अपने कब्जे में ले रखा है। वहीं गाजा में इजरायल और हमास समर्थकों के बीच लगातार हिंसक झड़पें हो रही हैं। गुस्से में आकर ट्रंप ने खुले तौर पर धमकी दी है कि अगर हमास ने गाजा में लोगों को मारना बंद नहीं किया तो हमास को खत्म कर दिया जाएगा।
दोधारी तलवार पर चल रहा है पाकिस्तान
अब पाकिस्तान के एंगल को समझना जरूरी है। दरअसल, प्रस्ताव के मुताबिक, इंटरनेशनल इस्टैबलैजेशन फोर्स में पाकिस्तान सेना की भी तैनाती होनी है। हालांकि, पाकिस्तान के इस्लामिक संगठनों ने साफ तौर पर कहा है कि अगर पाकिस्तान की सेना हमास के खिलाफ लड़ने गाजा गई तो पाकिस्तान में गृह युद्ध जैसे हालात पैदा हो जाएंगे।
पाकिस्तान की कट्टरपंथी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के अलावा कई पार्टियां ऐसी हैं जिन्होंने दो टूक कहा है कि कुछ भी हो जाए पाकिस्तान की सेना गाजा नहीं जाएगी। टीएलपी के अलावा, जमात ए इस्लामी पाकिस्तान और मौलाना फजल-उर-रहमान की पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) भी हैं। इन पार्टियों को पाकिस्तान की राजनीति में अच्छी खासी पकड़ है। ऐसे में शहबाज सरकार और पाकिस्तान सेना के लिए एक तरफ कुआं और एक तरफ खाई जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
आसिम मुनीर, शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति ट्रंप की फाइल फोटो।(फोटो सोर्स: AP)
ट्रंप की प्लानिंग और PAK की सिरदर्दी
अंतरराष्ट्रीय स्टेबलाइजेशन फोर्स की पूरी प्लानिंग अमेरिका में हुई है। अमेरिका ने ही यह मसौदा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को भेजा था। ट्रंप इसे अपना मास्टरप्लान बताते हैं। अब सवाल ये है कि आखिर गाजा में पीस पीसकीपिंग फोर्स को तैनात क्यों नहीं किया गया?
दरअसल, पीस पीसकीपिंग फोर्स का मकसद पहले से हुए शांति समझौते या युद्धविराम को लागू करवाना और बनाए रखना होता है, यानी जब इलाके में लड़ाई रुक चुकी हो और शांति प्रक्रिया शुरू हो चुकी हो, लेकिन गाजा की स्थिति अलग है। यहां आज भी आम जनता के साथ घुल मिलकर हमास के लड़ाके रहते हैं। वहीं, कई हथियार ऐसे हैं जो जमीन के नीचे मौजूद हैं।
अब वापस ट्रंप और मुनीर की मुलाकात पर आते हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों की मुलाकात का मुद्दा गाजा फोर्स ही होगा, यानी मुनीर से पूछा जाएगा कि कब तक और किस तरह पाकिस्तान की सेना गाजा जाएगी? मुनीर इस सवाल का जो भी जवाब दें, लेकिन फिलहाल वो ट्रंप की डिमांड को नकारने की स्थिति में नहीं हैं।
फिलिस्तीन को लेकर पाक बहा रहा घड़ियाली आंसू
जब नवंबर 2025 में यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल ने अमेरिका के प्रस्ताव (ट्रंप की कॉम्प्रिहेंसिव प्लान टू एंड द गाजा कॉन्फ्लिक्ट) को पास किया तो पाकिस्तान का जवाब विरोधाभासी था। उस समय वो काउंसिल की अध्यक्षता कर रहा था।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने प्रस्ताव पेश करने के लिए अमेरिका को धन्यवाद दिया और इसके पक्ष में वोट दिया। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान नतीजे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है और निराशा जताई कि पाकिस्तान के "कुछ महत्वपूर्ण सुझाव" (जैसे गाजा में कोई डेमोग्राफिक या टेरिटोरियल चेंज न हो, फिलिस्तीनियों को बायपास न किया जाए, इजरायली कब्जे का अंत और टू-स्टेट सॉल्यूशन का स्पष्ट जिक्र) अंतिम टेक्स्ट में शामिल नहीं किए गए हैं।
हालांकि, विश्लेषकों और खुद पाकिस्तानी मीडिया ने इसे मजबूरी और दिखावे का नाम दिया। महंगाई और आर्थिक बदहाली से परेशान पाकिस्तान को ट्रंप फिल कटपुतली की तरह नचा रहे हैं और इस कटपुतली के पास नाचने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
