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Times Now Navbharat Special: कौन है वो रहस्यमी महिला, जिसे बचाने के लिए अमेरिका ने खर्च कर डाले 7 करोड़ 14 लाख

Times Now Navbharat Special: अमेरिका एक महिला को बचाने के लिए अबतक करोड़ों खर्च कर चुका है। महिला के लिए जो नाव किराये पर ली गई है, उसी पर 7 करोड़ से ज्यादा खर्च किए गए हैं।

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एक महिला को बचाने के लिए अमेरिका ने खर्च कर डाले करोड़ों
Compiled by: Shishupal Kumar
Updated Jun 13, 2026, 06:54 IST
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Times Now Navbharat Special: अमेरिका में इन दिनों एक रहस्यमयी महिला की खूब चर्चा है और भी क्यों नहीं, जब इस महिला को बचाने के लिए सिर्फ एक नाव पर 7 करोड़ खर्च कर दिए गए हैं। अभी भी यह महिला अपने घर नहीं पहुंची है, मतलब अभी और खर्च होने हैं। अब सवाल ये उठ रहा है कि आखिर ये रहस्यमयी महिला आखिर कौन है? क्या कोई बड़ी सेलिब्रेटी है, ट्रंप की खास है जो अमेरिकी सरकार उसे बचाने पर करोड़ो खर्च कर रही है। आइए जानते हैं इसका जवाब

कौन है ये महिला?

दरअसल अभी तक सार्वजनिक डोमेन में महिला की पहचान, अमेरिकी सरकार ने उजागर नहीं की है। लेकिन इतना तय है कि यह महिला इसी पृथ्वी पर मौजूद है और मौत के मुंह से बचकर निकली है। AP की रिपोर्ट के अनुसार यह महिला, उसी क्रूज पर सवार थी, जिसपर जानलेवा हंता वायरस फैला था। इसी महिला को बचाने में अमेरिकी प्रशासन हफ्तों से लगा है और करोड़ों खर्च कर चुका है।

सिर्फ एक नाव का किराया $750,000?

ट्रंप प्रशासन ने प्रशांत महासागर के एक बेहद सुदूर द्वीप पर फंसी महज एक अमेरिकी महिला को वहां से निकालने के लिए सिर्फ एक नाव पर $750,000 (लगभग 7.14 करोड़ रुपये) खर्च कर दिए हैं। महिला को सुरक्षित निकालने के लिए एक आलीशान प्राइवेट यॉट को किराए पर लिया गया है। इस भारी-भरकम खर्च ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) के आपातकालीन बजट पर अत्यधिक दबाव डाल दिया है।

क्या है पूरा मामला ?

यह पूरी कहानी एक जानलेवा वायरस, एक क्रूज शिप और दुनिया के सबसे अलग-थलग पड़े द्वीपों में से एक से जुड़ी है। यह महिला अप्रैल 2026 में डच क्रूज लाइनर 'एमवी होंडियस' (MV Hondius) पर सवार थी। इस क्रूज पर अचानक 'हंतावायरस' (Hantavirus) का प्रकोप फैला, जिससे कई यात्री बीमार हो गए और कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। हालांकि इस अमेरिकी महिला में बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखे, लेकिन उसके इस वायरस के संपर्क में आने का पूरा अंदेशा था।

डच क्रूज लाइनर 'एमवी होंडियस' (फोटो- AP)

डच क्रूज लाइनर 'एमवी होंडियस' (फोटो- AP)

क्यों महंगा हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन?

क्रूज से उतरने के बाद वह सैन फ्रांसिस्को गईं और फिर ताहिती के रास्ते ब्रिटिश ओवरसीज टेरिटरी के अंतर्गत आने वाले 'पिटकेर्न द्वीप' (Pitcairn Island) पहुंच गईं। इस बीच जब क्रूज पर हुई मौतों का खुलासा हुआ, तो वह वहीं फंस गईं। जिस द्वीप पर महिला फंसी, वहां से निकलना काफी मुश्किल है। इसकी भौगोलिक स्थिति काफी खतरनाक है। यहां की आबादी सिर्फ 50 लोगों की है। इस ऑपरेशन के महंगे होने की सबसे बड़ी वजह पिटकेर्न द्वीप की भौगोलिक स्थिति है। यहां कोई एयरपोर्ट नहीं है और समुद्री जहाज भी महीनों में एकाध बार ही आते हैं। यह वही ऐतिहासिक द्वीप है जहां 1789 में ब्रिटिश जहाज 'एचएमएस बाउंटी' (HMS Bounty) के बागियों (Mutineers) ने शरण ली थी, जिस पर 'म्यूटीनी ऑन द बाउंटी' जैसी प्रसिद्ध किताबें और फिल्में बनी हैं। आज भी यहां उनकी ही पीढ़ियां रहती हैं।

क्यों उलझा मामला?

चूंकि यह एक ब्रिटिश क्षेत्र है, इसलिए ब्रिटिश अधिकारियों ने महिला को निकालने के लिए अमेरिका से तुरंत मदद मांगी। लेकिन रास्ता आसान नहीं था। अमेरिकी अधिकारियों ने पहले महिला को पिटकेर्न से 2,160 किलोमीटर (30 घंटे का समुद्री सफर) दूर 'ताहिती' भेजने की कोशिश की, जो फ्रांस के अधीन है। फ्रांसीसी अधिकारियों ने महिला को अपने क्षेत्र में एंट्री देने से साफ मना कर दिया। वजह यह थी कि जब महिला पिटकेर्न जाते समय ताहिती से गुजरी थी, तो उसने यह बात छिपाई थी कि वह वायरस संक्रमित क्रूज शिप पर सवार रह चुकी थी।

करोड़पति का प्राइवेट यॉट और नया रूट

जब सारे रास्ते बंद हो गए, तो ट्रंप प्रशासन को एक अनोखा और बेहद खर्चीला रास्ता चुनना पड़ा। सरकार ने एक अमीर फ्रांसीसी व्यक्ति के 'तिथाइना एक्सप्लोरर' (Titaina Explorer) नामक एक विशेष ट्रिमरन यॉट (यूनिक डिजाइन वाली प्राइवेट नाव) को $750,000 में किराए पर लिया। मरीन ट्रैकिंग साइट्स के मुताबिक, यह यॉट 5 जून 2026 को महिला को लेकर पिटकेर्न से रवाना हो चुका है।

कब अमेरिका पहुंचेगी महिला?

इस यॉट के जरिए महिला को पिटकेर्न से लगभग 2,253 किलोमीटर दूर प्रशांत महासागर के ही दूसरे सुदूर छोर 'ईस्टर द्वीप' (Easter Island) ले जाया जा रहा है, जो चिली का हिस्सा है। ईस्टर द्वीप से चिली की राजधानी सैंटियागो के लिए सीधी फ्लाइट्स हैं, जहां से महिला को अमेरिका वापस लाया जाएगा। इस पूरे समुद्री सफर में मौसम के हिसाब से 10 दिन लग सकते हैं।

पिटकेर्न द्वीप की सैटेलाइट फोटो (फोटो- NASA)

पिटकेर्न द्वीप की सैटेलाइट फोटो (फोटो- NASA)

क्या महिला कोई वीआईपी है?

अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस महिला का कोई राजनीतिक या सेलिब्रिटी बैकग्राउंड नहीं है, वह एक आम नागरिक है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने महिला की गोपनीयता का हवाला देते हुए इस पर सीधा कमेंट तो नहीं किया, लेकिन कहा: "जब भी कोई अमेरिकी नागरिक विदेशों में खतरे में होता है और कमर्शियल ट्रांसपोर्ट (सामान्य फ्लाइट या शिप) की सुविधा उपलब्ध नहीं होती, तो स्टेट डिपार्टमेंट उसे सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव उचित सहायता प्रदान करता है।"

अमेरिकी सरकार का बजट खाली

इस एक रेस्क्यू ऑपरेशन ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय की जेब खाली कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले ने मंत्रालय के आपातकालीन फंड, जिसे “के फंड” (K Fund) कहा जाता है, उसे पिछले 7 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर ला दिया है। मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे ईरान युद्ध (Iran War) के कारण अमेरिकी राजनयिकों और नागरिकों को वहां से अचानक निकालने में पहले ही भारी खर्च हो चुका है। इसके अलावा अफ्रीका में फैले इबोला (Ebola) प्रभावित देशों से भी अमेरिकियों को निकालने की तैयारियों में बड़ा फंड लग रहा है। आंतरिक दस्तावेजों के अनुसार, इस आपातकालीन कोष को दोबारा भरने के लिए विदेश मंत्रालय अन्य खातों से $50 मिलियन ट्रांसफर करने पर विचार कर रहा है। इसमें दूतावास की सुरक्षा और रखरखाव बजट से $35 मिलियन और अन्य राजनयिक कार्यक्रमों से $15 मिलियन कटौती करने की योजना है। इसके अलावा अमेरिकी संसद (कांग्रेस) से भी मदद मांगी जा सकती है।

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