बांग्लादेश और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते ने भारत में चिंताएं बढ़ा दी हैं। कहा जा रहा है कि इस ट्रेड डील ने बांग्लादेश को भारत पर बढ़त दिला दी है। एक तरफ जहां भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विश्लेषण हो ही रहा था, अमेरिका ने बांग्लादेश के साथ भी ऐसा ही व्यापार समझौता करते हुए भारत को चौंका दिया। इस डील में बांग्लादेश को भारी राहत मिली है। हालांकि, ढाका पर लगा 19 प्रतिशत टैक्स, भारत पर लगाए गए 18 प्रतिशत टैक्स से ज्यादा है, लेकिन बांग्लादेश को अमेरिकी कपास से बने वस्त्रों और परिधानों पर टैक्स से छूट मिल गई है। इससे भारत के वस्त्र उद्योग को दोहरा झटका लग सकता है। एक तरफ भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कम हो जाएगी और दूसरी तरफ कपास निर्यात में गिरावट आएगी। आइए विस्तार से समझते हैं इससे भारत के लिए क्या मुश्किलें सामने आएंगे।
कुछ बांग्लादेशी टेक्सटाइल पर शून्य टैरिफ
अमेरिका और बांग्लादेश ने सोमवार (9 फरवरी) को एक व्यापार समझौते की घोषणा की, जिसके तहत ढाका से निर्यात होने वाले माल पर कर 20 प्रतिशत से घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया गया है। अमेरिका बांग्लादेश से आयात होने वाले कुछ वस्त्रों और परिधानों पर कोई पारस्परिक शुल्क नहीं लगाएगा। बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के कार्यालय ने X पर एक बयान में कहा, अमेरिका पारस्परिक शुल्क को और घटाकर 19 प्रतिशत कर देगा, जो मूल रूप से 37 प्रतिशत निर्धारित किया गया था और पिछले वर्ष अगस्त में घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया था। इसके अलावा, अमेरिका ने बांग्लादेश से अमेरिकी निर्मित कपास और मानव निर्मित फाइबर का उपयोग करके बनाए गए कुछ वस्त्र और परिधान उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में शून्य पारस्परिक शुल्क लेने की व्यवस्था स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई है।
अमेरिका-बांग्लादेश पारस्परिक व्यापार समझौते पर जारी बयान के अनुसार, अमेरिका एक ऐसा तंत्र स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है जो बांग्लादेश से कुछ वस्त्र और परिधान वस्तुओं को शून्य पारस्परिक शुल्क दर पर निर्यात करने की अनुमति देगा। इस तंत्र के तहत बांग्लादेश से निर्यात की जाने वाली वस्त्र और परिधान वस्तुओं की एक निश्चित मात्रा इस कम शुल्क दर पर अमेरिका में प्रवेश कर सकेगी। लेकिन यह मात्रा अमेरिका से निर्यात किए जाने वाले वस्त्रों की मात्रा के आधार पर निर्धारित की जाएगी, उदाहरण के लिए, अमेरिका में उत्पादित कपास और एमएमएफ वस्त्र सामग्री।
बांग्लादेश के लिए टेक्सटाइल क्यों अहम?
चीन के बाद बांग्लादेश विश्व स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा टेक्सटाइल निर्यातक है। बांग्लादेश का अमेरिका को तैयार वस्त्रों का निर्यात अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच लगभग 7.6 अरब डॉलर रहा, जो इस अवधि के दौरान भारत के 3.26 अरब डॉलर के निर्यात से दोगुने से भी अधिक है। बांग्लादेश का परिधान उद्योग देश की रीढ़ की हड्डी है, और देश के कुल निर्यात राजस्व में वस्त्र क्षेत्र का योगदान 80 प्रतिशत से अधिक है। बांग्लादेश में वस्त्र उद्योग लगभग 40 लाख श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है। ट्रंप प्रशासन द्वारा बांग्लादेश के कुछ वस्त्रों और कपड़ा उत्पादों को बिना शुल्क के अमेरिका में प्रवेश की अनुमति देने के फैसले से बांग्लादेश को बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की संभावना है।
भारत पर क्या प्रभाव पडे़गा?
भारत ने हाल ही में अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौता किया है, जिसके चलते उसे अन्य एशियाई देशों की तुलना में सबसे कम 18 प्रतिशत टैरिफ दरों का लाभ मिला है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसा लग रहा था कि इस डील के बाद अमेरिका को वस्त्र और परिधान निर्यात बढ़ा सकेंगे क्योंकि हमें 18 प्रतिशत का पारस्परिक टैरिफ देना होगा। जबकि बांग्लादेश जैसे कुछ प्रतिस्पर्धियों को 19 प्रतिशत, वियतनाम जैसे कुछ अन्य देशों को 20 प्रतिशत का टैरिफ देना होगा।
हालांकि, अमेरिकी कपास और कृत्रिम वस्त्रों से बने बांग्लादेशी उत्पादों पर अमेरिका द्वारा शुल्क घटाकर शून्य कर दिए जाने से भारत के लिए एक चुनौती खड़ी हो गई है। पूरी संभावना है कि बांग्लादेश पर भारत को मिलने वाला लगभग एक प्रतिशत का टैरिफ लाभ उलटकर बांग्लादेश की तुलना में 18 प्रतिशत के टैरिफ नुकसान में बदल जाएगा।
भारत के लिए दोहरी मार साबित हो सकता है
अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौता भारत के लिए दोहरी मार साबित हो सकता है। एक तरफ, इससे अमेरिकी बाजार में बांग्लादेश के वस्त्र निर्यात सस्ते हो जाएंगे। दूसरी तरफ, आशंका है कि इससे बांग्लादेश को भारत के सूती धागे के निर्यात पर असर पड़ सकता है। भारत ने 2024-2025 में बांग्लादेश को 1.47 अरब डॉलर मूल्य का सूती धागा (570 मिलियन किलोग्राम) निर्यात किया था। पिछले साल भारत ने बांग्लादेश को 12-14 लाख गांठ कपास भेजी थी। बांग्लादेश के वस्त्र निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत और भारत के सूती परिधान निर्यात का 26 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को जाता है। आर्थिक जटिलता वेधशाला (OEC)के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 में भारत से बांग्लादेश को निर्यात की जाने वाली सबसे बड़ी वस्तु सूती धागा थी, जिसका मूल्य 109 मिलियन डॉलर था।