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दक्षिण अफ्रीका में होने वाले जी-20 समिट से ट्रंप ने क्यों खींचे हाथ, क्या है पूरा विवाद?

जी-20 एक बड़ा सम्मेलन है जिसमें दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शिरकत करते हैं। यहां बड़े देशों के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर गहन मंथन होता है। आखिर ट्रंप किन वजहों से इसके बहिष्कार का ऐलान किया है, और क्या है वो विवाद जिसने अमेरिका को नाराज किया है, विस्तार से समझते हैं।

G20 trump

G20 में शिरकत नहीं करेंगे ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ऐलान किया कि कोई भी अमेरिकी सरकारी अधिकारी इस महीने के अंत में दक्षिण अफ्रीका में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कई मुद्दों को उठाते हुए सम्मेलन के बहिष्कार का ऐलान किया। जी-20 एक बड़ा सम्मेलन है जिसमें दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शिरकत करते हैं। यहां बड़े देशों के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर गहन मंथन होता है। आखिर ट्रंप किन वजहों से इसके बहिष्कार का ऐलान किया है, और क्या है वो विवाद जिसने अमेरिका को नाराज किया है, विस्तार से समझते हैं।

ट्रंप ने क्यों लिया बहिष्कार का फैसला?

दरअसल, ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका में अफ्रीकनर्स के खिलाफ हिंसा का मामला उठाते हुए जी-20 में शिरकत करने से इनकार किया है। दक्षिण अफ्रीका में डच, फ्रांसीसी व जर्मन प्रवासियों के वंशजों को अफ्रीकनर्स कहा जाता है। इनके खिलाफ हिंसा बढ़ गई है जिसने अमेरिका को नाराज कर दिया है। इसे लेकर ट्रंप ने लिखा- अफ्रीकनर्स को मारा और काटा जा रहा है, और उनकी जमीनों और खेतों को अवैध रूप से जब्त किया जा रहा है। जब तक मानवाधिकारों का हनन जारी रहेगा, तब तक कोई भी अमेरिकी सरकारी अधिकारी इसमें शामिल नहीं होगा। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका ने ट्रंप के आरोपों का खंडन किया और उनके फैसले को अफसोसजनक बताया।

कौन हैं अफ्रीकनर्स?

अफ्रीकनर्स श्वेत दक्षिण अफ्रीकी हैं जो 17वीं शताब्दी के मध्य में देश में बसने वाले डच लोगों के वंशज हैं, और अफ्रीकी भाषा बोलते हैं। उनके पास बड़ी मात्रा में गांवों की जमीन है। दक्षिण अफ्रीकी श्वेत लोगों के खिलाफ हिंसा कोई नया आरोप नहीं है, और यह व्हाइट हाउस में ट्रंप के पहले कार्यकाल (2017-21) से ही चल रहा है। अगस्त 2018 में जब फॉक्स न्यूज ने दक्षिण अफ्रीकी सरकार की उस योजना पर एक स्टोरी चलाई जिसमें रंगभेद के दौरान बेदखल किए गए अश्वेत लोगों को जमीन वापस देने की बात कही गई थी, तब ट्रंप ने खेतों पर कब्जा, जब्ती और किसानों की बड़े पैमाने पर हत्या के बारे में ट्वीट किया था।

रूढ़िवादी अफ्रीकनर्स लोगों का यह समूह लंबे समय से रंगभेद के बाद की सरकार पर नरसंहार और उनके साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाता रहा है। जन्म से श्वेत दक्षिण अफ्रीकी (लेकिन अफ्रीकन नहीं) और इस साल की शुरुआत तक ट्रंप के सहयोगी रहे एलन मस्क ने भी दक्षिण अफ़्रीकी सरकार पर 'नस्लवादी' भूमि स्वामित्व क़ानून बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा पर भी श्वेत किसानों की हत्याओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है।

दक्षिण अफ्रीका से ट्रंप नाराज

इस फरवरी में ट्रंप ने "दक्षिण अफ्रीका गणराज्य की गंभीर कार्रवाइयों का समाधान" शीर्षक से एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसके कुछ ही दिनों पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका पर जमीन जब्त करने और कुछ वर्गों के लोगों के साथ बहुत बुरा व्यवहार करने का आरोप लगाया था। उन्होंने इसे बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन बताया और मामले की जांच पूरी होने तक दक्षिण अफ्रीका को भविष्य में मिलने वाली सभी आर्थिक मदद बंद करने का वादा किया। इस आदेश में जातीय अल्पसंख्यक अफ्रीकनर लोगों के खिलाफ कथित अन्याय का जिक्र था।

किस कानून ने ट्रंप और मस्क दोनों को नाराज किया?

पांच साल के गहन विचार-विमर्श और सार्वजनिक परामर्श के बाद दक्षिण अफ़्रीकी सरकार ने इस जनवरी में जब्ती अधिनियम पारित किया। इसमें राज्य को सार्वजनिक उद्देश्यों या कुछ परिस्थितियों में जनहित में बिना मुआवजे के जमीन जब्त करने का प्रावधान है। यह कानून दक्षिण अफ़्रीकी संविधान की धारा 25(2) के तहत राज्य द्वारा ज़ब्ती के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।

इसका यह मतलब नहीं है कि दक्षिण अफ्रीकी सरकार किसी खेत मालिक की संपत्ति एकतरफा जब्त कर लेगी या अपनी मर्जी से उसे दूसरों में बांट देगी। ज्यादातर मामलों में जब्ती करने वाले प्राधिकारी को पहले संपत्ति के मालिक के साथ बातचीत करके संपत्ति अधिग्रहण पर एक समझौता करना होता है। रामफोसा ने इस अधिनियम को संविधान द्वारा निर्देशित एक संवैधानिक रूप से अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया बताया है जो संविधान द्वारा बताए गए न्यायसंगत तरीके से जमीन तक जनता की पहुंच सुनिश्चित करती है। उनकी सोच है कि इससे रंगभेद का अन्याय ठीक होगा और दक्षिण अफ्रीका में भूमि स्वामित्व का असमान वितरण भी ठीक होगा। इसी को लेकर पूरा विवाद है जिसने ट्रंप को नाराज कर दिया है और उन्होंने जी-20 समिट में शिरकत नहीं करने का भी ऐलान कर दिया है।

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अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडल Author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

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