अल्बर्टा अलगाववाद से क्यों जुड़ रहा US का नाम? क्या कनाडा के पश्चिमी हिस्से वाले 'खजाने' पर है ट्रंप की नजर
दूसरी बार राष्ट्रपति बनते के बाद ट्रंप कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य और वहां के प्रधानमंत्री को गवर्नर बनाने की बात कहने लगे। पहले तो यह बात हंसी-मजाक की मानी गई लेकिन बार-बार यही बात दोहराने से कनाडा के लोग इसे गंभीरता से लेने लगे। फिर ट्रंप ने कनाडा पर टैरिफ लगा दिया।
- Written by: आलोक कुमार राव
- Updated Jan 31, 2026, 03:47 PM IST
What is Alberta separatism: एक समय था या कहिए एक साल पहले तक अमेरिका और कनाडा के रिश्ते काफी मजबूत थे, दोनों का रिश्ता सगे भाइयों की तरह था लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार व्हाइट हाउस में आते ही यह रिश्ता दरकने लगा। कनाडा और अमेरिका के संबंध अब तक के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच टकराव इतना बढ़ गया है कि दोनों एक-दूसरे को आंखें तरेर रहे हैं। दरअसल, संबंधों में यह खटास अचानक से नहीं बल्कि धीरे-धीरे आई। दूसरी बार राष्ट्रपति बनते के बाद ट्रंप कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य और वहां के प्रधानमंत्री को गवर्नर बनाने की बात कहने लगे। पहले तो यह बात हंसी-मजाक की मानी गई लेकिन बार-बार यही बात दोहराने से कनाडा के लोग इसे गंभीरता से लेने लगे। फिर ट्रंप ने कनाडा पर टैरिफ लगा दिया।
कार्नी को सबक सिखाना चाहते हैं ट्रंप?
यह टैरिफ कनाडा के लिए बहुत बड़ा झटका था क्योंकि कनाडा का सबसे अधिक व्यापार अमेरिका के साथ ही होता है। फिर ग्रीनलैंड के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच यह दरार और चौड़ी होती गई। दावोस में इसी महीने हुए विश्व आर्थिक मंच की बैठक में कार्नी ने ट्रंप का नाम लिए बगैर जो हमला बोला। ट्रंप ने उसे अपने अहं पर ले लिया। कार्नी ने कहा कि 'दुनिया को चलाने की जो वैश्विक व्यवस्था है, वह टूट गई है।' यही नहीं कनाडा का चीन के साथ ट्रेड डील भी ट्रंप को अखर रही है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इन सब बातों के लिए ट्रंप अब कार्नी को सबक सिखाना चाहते हैं। अल्बर्टा में अलगाववादी भावनाओं को भड़काने के पीछे कहीं न कहीं अमेरिका का हाथ है, उसी के इशारे पर अलगाववादी वहां पर जनमत संग्रह कराए जाने की मांग कर रहे हैं। इस अलगाववादी मुहिम के जोर पकडने की वजहें भी हैं।
क्या अल्बर्टा कनाडा से अलग होकर स्वतंत्र देश बन सकता है?
APP की राजनीतिक रणनीति के केंद्र में अल्बर्टा की संप्रभुता पर जनमत संग्रह कराने की कोशिश है। अलगाववाद के समर्थक इस समय 1.77 लाख से 1.80 लाख हस्ताक्षर जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। अल्बर्टा के कानून के तहत नागरिकों की पहल से जनमत संग्रह कराने के लिए इतने हस्ताक्षरों की जरूरत होती है। यह पहल इसलिए खास है क्योंकि अलगाव पर किसी भी जनमत संग्रह के गंभीर संवैधानिक निहितार्थ होंगे। हालांकि, APP का कहना है कि मतदाताओं से स्पष्ट जनादेश मिलने पर अल्बर्टा की बातचीत की स्थिति मजबूत होगी, लेकिन कनाडाई कानून किसी भी प्रांत को एकतरफा रूप से संघ से अलग होने की अनुमति नहीं देता। 1995 में क्यूबेक के स्वतंत्रता जनमत संग्रह के बाद, कनाडा के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि किसी भी प्रांत को अलग होने का एकतरफा कानूनी अधिकार नहीं है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों और APP सदस्यों की मुलाकात में क्या हुआ?
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने पिछले नौ महीनों में वॉशिंगटन डीसी में तीन बार अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। अलगाववादी आयोजक और समूह के कानूनी सलाहकार जेफ्री रैथ ने इन बैठकों में शामिल होने की पुष्टि की। फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में रैथ ने दावा किया कि वॉशिंगटन में अल्बर्टा के मुद्दे को लेकर गहरी रुचि है। रैथ ने कहा, 'अमेरिका एक स्वतंत्र और आजाद अल्बर्टा को लेकर बेहद उत्साहित है।' उन्होंने यह भी दावा किया, 'हम बहुत-बहुत वरिष्ठ लोगों से मिल रहे हैं, जो हमारी बैठकों से सीधे ओवल ऑफिस जा रहे हैं।'
वॉशिंगटन की क्या है प्रतिक्रिया?
अमेरिकी अधिकारियों ने अल्बर्टा अलगाववाद का समर्थन करने के किसी भी संकेत से खुद को अलग रखने की कोशिश की है। विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने APP प्रतिनिधियों से मुलाकात की पुष्टि तो की, लेकिन कहा कि ये बैठकें सामान्य और गैर-बाध्यकारी थीं। ब्लूमबर्ग से ईमेल के जरिए, नाम न छापने की शर्त पर एक अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी ने कहा, 'विभाग नियमित रूप से सिविल सोसायटी से जुड़े लोगों से मिलता है। ऐसी सामान्य बैठकों में, जैसा कि आम तौर पर होता है, कोई भी प्रतिबद्धता नहीं की जाती।'
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी
ओटावा की प्रतिक्रिया क्या रही?
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने गुरुवार को इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया कि उन्हें उम्मीद है कि वॉशिंगटन कनाडा की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेगा। कार्नी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिकी प्रशासन कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करेगा। राष्ट्रपति ट्रंप से अपनी बातचीत में मैं इस बात को हमेशा स्पष्ट रूप से रखता हूं।' कार्नी ने कहा कि ट्रंप ने कभी भी अल्बर्टा अलगाववाद का मुद्दा उनसे सीधे नहीं उठाया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ट्रंप की हालिया कुछ बयानबाजी का संबंध इस साल के अंत में शुरू होने वाली अमेरिका–मेक्सिको–कनाडा व्यापार समझौते की समीक्षा से हो सकता है।
कनाडा की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की रीढ़ है अल्बर्टा
कनाडा का अल्बर्टा प्रांत प्राकृतिक गैस और खनिज संसाधनों के लिहाज से बेहद समृद्ध माना जाता है। यहां तेल और गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं, जिनमें ऑयल सैंड्स (तेल रेत) सबसे प्रमुख हैं। अल्बर्टा दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल भंडारों में गिना जाता है और कनाडा की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्राकृतिक गैस उत्पादन में भी अल्बर्टा देश के अग्रणी प्रांतों में शामिल है, जिससे घरेलू जरूरतों के साथ निर्यात को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा अल्बर्टा में कोयला, पोटाश, लिथियम, निकल और अन्य महत्वपूर्ण खनिज संसाधन भी पाए जाते हैं, जो उभरती हरित ऊर्जा और बैटरी उद्योग के लिए अहम हैं। इन संसाधनों से प्रांत को भारी राजस्व, रोजगार और औद्योगिक विकास मिलता है। यही वजह है कि ऊर्जा नीति, रॉयल्टी और संसाधनों पर नियंत्रण अल्बर्टा की राजनीति और संघीय सरकार के साथ उसके रिश्तों में अहम मुद्दा बना रहता है।
