मैक्सिको के 50 फीसदी टैरिफ का भारत पर कितना होगा असर, जानें कौन-कौन से क्षेत्र होंगे प्रभावित
देशों पर टैरिफ बढ़ाने का फैसला राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम पार्डो ने लिया है। बताया जा रहा है कि वस्तुओं पर लगने वाली टैरिफ की दर 50 प्रतिशत तक जा सकती है और यह नया टैरिफ एक जनवरी 2026 से लागू होगा। लैटिन अमेरिकी देश में मैक्सिको भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। यह ऐसे समय लागू किया जा रहा है जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार तेजी के साथ बढ़ रहा है।
- Written by: आलोक कुमार राव
- Updated Dec 13, 2025, 06:47 AM IST
Mexico tariffs on Indian goods: टैरिफ को लेकर लैटिन अमेरिकी देश मैक्सिको ने अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। वह भी अपने पड़ोसी देश अमेरिका की राह पर है। मैक्सिको उन देशों से आयात होने वाली वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाने का फैसला किया जिनके साथ उसका औपचारिक व्यापार समझौता (FTA) नहीं है। इन देशों से आयात होने वाली सामग्रियों पर टैरिफ 50 प्रतिशत तक लग सकता है। चूंकि मैक्सिको के साथ भारत का एफटीए नहीं है। इसलिए बढ़े हुए टैरिफ का असर भारतीय निर्यातकों पर भी पड़ेगा। भारत बड़ी मात्रा में ऑटोमोबाइल्स, ऑटो उपकरण, इंजीनियरिंग के सामान, रसायन, स्टील, मशीनरी और उत्पादन से जुड़ी अन्य सामग्रियां मैक्सिको को निर्यात करता है।
1 जनवरी 2026 से लागू होगा नया टैरिफ
देशों पर टैरिफ बढ़ाने का फैसला राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम पार्डो ने लिया है। बताया जा रहा है कि वस्तुओं पर लगने वाली टैरिफ की दर 50 प्रतिशत तक जा सकती है और यह नया टैरिफ एक जनवरी 2026 से लागू होगा। लैटिन अमेरिकी देश में मैक्सिको भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। यह ऐसे समय लागू किया जा रहा है जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार तेजी के साथ बढ़ रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष की अगर बात करें तो भारत ने मैक्सिको को 5.3 अरब डॉलर का निर्यात किया था और इसमें से केवल ऑटोमोबाइल की हिस्सेदारी करीब एक अरब डॉलर की थी। लेकिन बात केवल ऑटोमोबाइल की नहीं है, टैरिफ का असर निर्यात होने वाली करीब 1400 सामग्रियों पर होगा। ये सामग्रियां मैक्सिको के उद्योग के लिए भी अत्यंत जरूरी और महत्वपूर्ण हैं।
बिना FTA वाले देशों पर लगेगा टैरिफ
लैटिन अमेरिकी इस देश की पहचान लंबे समय से एक खुली अर्थव्यवस्था वाले मुल्क के रूप में रही है लेकिन अब इसने अपने यहां बिना एफटीए वाले देशों से आने वाली सामग्रियों पर ज्यादा शुल्क/टैरिफ लगाने का फैसला किया है। मैक्सिको के इस कदम से भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया सहित अन्य देश प्रभावित होंगे। ऐसा नहीं है कि भारत से निर्यात होने वाली सभी सामग्रियों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। 50 प्रतिशत टैरिफ के दायरे में भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर आएगा।
मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम। तस्वीर-AP
अमेरिका, मैक्सिको, कनाडा अग्रीमेंट की समीक्षा
मैक्सिको का सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर अमेरिका है और वह नॉर्थ अमेरिकन आपूर्ति श्रृंखला में चीन के दबदबे को कम करने के लिए हाल के दिनों में अपने प्रयास तेज किए हैं। यूएस ने अमेरिका, मैक्सिको, कनाडा अग्रीमेंट की समीक्षा होने से पहले लैटिन अमेरिकी देशों से चीनी सामानों पर अपनी निर्भरत कम करने की अपील की है। हालांकि, राष्ट्रपति शीनबाम का कहना है कि यह कदम अमेरिका के कहने पर नहीं उठाया गया है लेकिन टैरिफ का ढांचा अमेरिका के तर्ज पर ही तैयार किया गया है।
टैरिफ अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न करेंगे
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इन टैरिफ की संरचना उत्तरी अमेरिकी नेटवर्क में चीनी सामानों के प्रवेश को सीमित करने के लिए किए जा रहे अमेरिकी प्रयासों के साथ काफी हद तक मेल खाती है। मैक्सिको के वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि नए शुल्क अगले वित्तीय वर्ष में लगभग 52 अरब पेसो (लगभग 19,000 करोड़ रुपये) की अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न करेंगे। रॉयटर्स के एक विश्लेषण के अनुसार, यह टैरिफ पैकेज 3.76 अरब डॉलर का राजकोषीय लाभ दे सकता है, जो मैक्सिको के बजट पर पड़ रहे दबाव को कम करने में मदद करेगा। वरिष्ठ नीति-निर्माताओं का तर्क है कि एशियाई आपूर्तिकर्ताओं से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच मैक्सिकन निर्माताओं की व्यवहार्यता बनाए रखने के लिए नई टैरिफ़ संरचना की आवश्यकता है।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र पर पड़ेगा मैक्सिको के टैरिफ का सबसे ज्यादा असर। तस्वीर-AP
ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर
नई टैरिफ व्यवस्था से सबसे अधिक प्रभावित उद्योगों में भारत का ऑटोमोबाइल क्षेत्र शामिल है, जिसने मैक्सिको को भारत में निर्मित कॉम्पैक्ट कारों के लिए अपने सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक के रूप में विकसित किया है। भारत से आने वाले वाहनों पर आयात शुल्क 20 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत हो जाएगा-यह एक बड़ा बदलाव है, जो वोक्सवैगन, हुंडई, निसान और मारुति सुजुकी जैसे निर्माताओं की निर्यात रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है, जो मैक्सिको को बड़ी मात्रा में वाहन भेजते हैं। उद्योग डेटा और कस्टम रिकॉर्ड इस निर्भरता की गहराई को दर्शाते हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में भारत ने मैक्सिको को लगभग 1 अरब डॉलर के वाहन निर्यात किए।
सरकार से हस्तक्षेप करने का आग्रह
इसमें हुंडई द्वारा भेजे गए 200 मिलियन डॉलर, निसान के 140 मिलियन डॉलर और सुजुकी के 120 मिलियन डॉलर के शिपमेंट शामिल हैं। भारत में निर्मित स्कोडा और वोक्सवैगन वाहन मैक्सिको को होने वाले भारतीय कार निर्यात का लगभग आधा हिस्सा बनाते हैं, जो दर्शाता है कि यह बाज़ार इन निर्माताओं के लिए कितना महत्वपूर्ण हो गया है। टैरिफ निर्णय से पहले, भारतीय वाहन निर्माता संघ (SIAM) ने भारत के वाणिज्य मंत्रालय को पत्र लिखकर भारतीय वाहनों के लिए मौजूदा टैरिफ स्तरों को बनाए रखने की दिशा में सरकार से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
