हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित है अल फलाह यूनिवर्सिटी। तस्वीर-PTI
Al Falah University : दिल्ली ब्लास्ट के बाद फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों की दिल्ली धमाके में संलिप्तता उजागह होने के बाद यह यूनिवर्सिटी जांच के दायरे में आ गई है। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने इस धमाके में अपनी किसी तरह की संलिप्तता होने से इंकार किया है। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अपनी जांच तेज करते हुए हरियाणा एसटीएफ बुधवार को अल फलाह यूनिर्सिटी पहुंची। इसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक टीम भी वहां के लिए रवाना हुई। इस आतंकी नेटवर्क के तार यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं क्योंकि गिरफ्तार डॉक्टरों का नाता इस विश्वविद्यालय से रहा है। विश्वविद्यालय परिसर से विस्फोटक सामग्री जब्त भी हुई है।
अल फलाह विश्वविद्यालय हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित है। यहां के मुस्लिम बहुल धौज गांव में यह विश्वविद्यालय 76 एकड़ में फैला हुआ है। पढ़े-लिखे लोगों के ‘पाकिस्तान समर्थित सरपरस्तों के इशारे पर काम करते’हुए पाए जाने के बाद जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि यह विश्वविद्यालय ऐसे व्यक्तियों के लिए आश्रय स्थल कैसे बन गया। विश्वविद्यालय की वेबसाइट के अनुसार, इसकी स्थापना हरियाणा विधानसभा द्वारा हरियाणा निजी विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत की गई थी। इसकी शुरुआत 1997 में एक इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी। 2013 में अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) से ‘ए’ श्रेणी की मान्यता प्राप्त हुई। 2014 में हरियाणा सरकार ने इसे विश्वविद्यालय का दर्जा दिया। अल-फलाह मेडिकल कॉलेज भी इसी विश्वविद्यालय से संबद्ध है।
कई विशेषज्ञों के अनुसार, अपने प्रारंभिक वर्षों में अल-फलाह विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक छात्रों के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया के एक उत्कृष्ट विकल्प के रूप में सामने आया। दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से केवल 30 किलोमीटर दूर स्थित इस विश्वविद्यालय का प्रबंधन अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, जिसकी स्थापना 1995 में हुई थी। ट्रस्ट के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी हैं। उपाध्यक्ष मुफ्ती अब्दुल्ला कासिमी एम ए और सचिव मोहम्मद वाजिद डीएमई हैं। अल-फलाह विश्वविद्यालय के वर्तमान रजिस्ट्रार प्रोफेसर (डॉ.) मोहम्मद परवेज हैं। डॉ. भूपिंदर कौर आनंद इसकी कुलपति हैं। यह विश्वविद्यालय तीन कॉलेजों में शिक्षा प्रदान करता है : अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, और अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग।
इस विश्वविद्यालय में 650 बिस्तरों वाला एक अस्पताल भी है, जहां चिकित्सक मुफ़्त में मरीजों का उपचार करते हैं।
सोमवार शाम दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास विस्फोटकों से लदी एक कार में हुए एक उच्च-तीव्रता वाले विस्फोट में 12 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए थे। पुलवामा का डॉक्टर मोहम्मद उमर नबी अल-फलाह विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर था। ऐसा संदेह है कि विस्फोटकों से लदी हुंदै आई20 वही चला रहा था। यह विस्फोट विश्वविद्यालय से जुड़े तीन चिकित्सकों सहित आठ लोगों को गिरफ्तार करने और 2,900 किलोग्राम विस्फोटक जब्त करने के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े एक ‘सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल’ का खुलासा हुआ, जो कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था। गिरफ्तार लोगों में शामिल डॉ. मुजम्मिल गनई अल-फलाह विश्वविद्यालय में पढ़ाता था।
यूनिवर्सिटी ने दिल्ली ब्लास्ट मामले में अपनी संलिप्तता होने से इंकार किया है। यूनिवर्सिटी ने बुधवार को जारी अपने एक बयान में कहा कि उसके परिसर में 'किसी तरह के रसायन' अथवा विस्फोटक सामग्री नहीं रखी गई और लाल किले विस्फोट मामले से उसका कोई संबंध नहीं है। यूनिवर्सिटी ने आगे कहा कि उसकी प्रयोगशालाएं का इस्तेमाल केवल एमबीबीएस छात्रों एवं अन्य अधिकृत पाठ्यक्रमों की अकेडमिक एवं प्रशिक्षण जरूरतों के लिए होता है। बयान में कहा गया है कि प्रयोगशाला में हर एक काम नियामकीय प्राधिकारियों के निर्देशानुसार सुरक्षा, वैधानिक एवं नैतिक मानकों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।
अल-फहाद ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी जवाद अहमद सिद्दीकी हैं। अल-फलाह एक अरबी शब्द है, जिसमें फलाह का मतलब कामयाबी, संपन्नता और मुक्ति है। रिपोर्टों के मुताबिक जवाद मूल रूप से मध्य प्रदेश के महू के रहने वाले हैं। जवाद ने 1995 में महू में ही ट्रस्ट की स्थापना की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उस दौरान जवाद ने एक इन्वेस्टिंग कंपनी भी शुरू की थी, लेकिन कंपनी में कथित घोटाले के बाद वह फरार हो गए थे। जवाद अहमद सिद्दीकी मुख्य ट्रस्टी होने के साथ ही यूनिवर्सिटी का चांसलर भी हैं। इस ट्रस्ट के अधीन मौजूदा समय में आधा दर्जन से अधिक शैक्षणिक संस्थान चल रहे हैं। 1997 में ट्रस्ट ने अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की, 2010 में इसे NAAC से A ग्रेड मिला तो वहीं 2014 में ट्रस्ट की यूनिवर्सिटी को हरियाणा विधानसभा में मान्यता दी। तो वहीं 2019 में मेडिकल कॉलेज शुरू हुआ।
रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यूनिवर्सिटी में कार्यरत करीब 40 प्रतिशत डॉक्टर कश्मीर से हैं। बताया जा रहा है कि यहां जनरल फिजिशियन के रूप में कार्यरत डॉ. मुजम्मिल कई वर्षों से कैंपस के अंदर डॉक्टर क्वार्टर में रह रहा था। वो पिछले तकरीबन साढ़े 3 साल से यहां रह रहा था। डॉ. मुजम्मिल के जैश ए मोहम्मद से जुड़े होने के लिंक और पक्के सबूत पुलिस को मिले है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी में वर्तमान में 150 से 200 छात्रों वाली पांच एमबीबीएस बैचें चल रही हैं। 2019 में मेडिकल कोर्स शुरू हुए और दो वर्ष पहले पीजी क्लासेस भी शुरू की गईं। अब छात्रों ने अपनी भविष्य की संभावनाओं को लेकर भी चिंता जताई है। छात्रों का कहना है कि अब इन गिरफ्तारियों के बाद हमें कौन नौकरी देगा?
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