वेनेजुएला में क्यों धरे के धरे रह गए चीन के हथियार, कैसे नाकाम हो गया मादुरो का पूरा डिफेंस सिस्टम?
सवाल है कि रूसी और चीनी हथियारों के होते हुए अमेरिका अपना ऑपरेशन कैसे इतनी आसानी और बाधा रहित अंजाम दे गया। यह तब है जब वेनेजुएला ने उन्नत रडार, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और फाइटर एयरक्राफ्ट पर अरबों डॉलर का निवेश किया है। बावजूद इसके उसके रडार, एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिकी फाइटर जेट्स, हेलिकॉप्टर और ड्रोन को डिटेक्ट, ट्रैक और इंटरसेप्ट नहीं कर पाए।
- Written by: आलोक कुमार राव
- Updated Jan 6, 2026, 03:06 PM IST
Chinese weapons proved useless in Venezuela : वेनेजुएला में चलाए गए अपने 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' के बारे में जानकारी देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह स्पेशल मिशन बेहद सफल रहा। स्पेशल फोर्स (डेल्टा वन) के सैनिकों को शानदार काम किया और उन्हें इन पर गर्व है। डेल्टा वन के जांबाजों ने जिस तरह के जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया है, वैसा मिशन दुनिया की कोई स्पेशल फोर्स नहीं कर सकती। ट्रंप ने आगे कहा कि मिशन में एक भी अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ। कुछ सैनिक घायल हुए जो खतरे से बाहर हैं और अभियान के दौरान एक हेलिकॉप्टर में आग पकड़ी लेकिन वह सुरक्षित वापस आ गया। तीन जनवरी को अपने इस ऑपरेशन में अमेरिका, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर न्यूयॉर्क ले आया। जाहिर तौर पर किसी देश में घुसकर वहां के राष्ट्रपति को पकड़कर ले आना आसान काम नहीं है।
अपनी सुरक्षा पर वेनेजुएला ने किया अरबों डॉलर का निवेश
इस तरह के जटिल और कठिन ऑपरेशन को सफलतापूर्व अंजाम देने के लिए बहुत ही सटीक एवं प्रभावी प्लानिंग की जरूरत होती है। जरा सी चूक पूरे मिशन को चौपट और अभियान चला रही टीम के लिए खतरा बन सकती है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। अमेरिका ने जिस तरह से चाहा, मिशन उसी तरह पूरा हुआ। 'ऑपरेशन अब्सोल्यूट रिजॉल्व' के बाद वेनेजुएला की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। वेनेजुएला, सोमालिया, नाइजीरिया या सूडान जैसा छोटा-मोटा देश नहीं है। बल्कि अपनी सुरक्षा पर वह दशकों से अरबों डॉलर की मोटी राशि खर्च करता आया है। उसके पास रूस और चीन निर्मित हथियार और तकनीक हैं।
डिटेक्ट, ट्रैक और इंटरसेप्ट नहीं कर पाए सिस्टम
सवाल है कि रूसी और चीनी हथियारों के होते हुए अमेरिका अपना ऑपरेशन कैसे इतनी आसानी और बाधा रहित अंजाम दे गया। यह तब है जब वेनेजुएला ने उन्नत रडार, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और फाइटर एयरक्राफ्ट पर अरबों डॉलर का निवेश किया है। बावजूद इसके उसके रडार, एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिकी फाइटर जेट्स, हेलिकॉप्टर और ड्रोन को डिटेक्ट, ट्रैक और इंटरसेप्ट नहीं कर पाए। वेनेजुएला के सभी हथियार नाकाम साबित हुए। यही नहीं, इस मिशन ने कहीं न कहीं यह भी स्पष्ट कर दिया कि अमेरिकी सेना, उसके हथियार और उसकी तकनीक रूस और चीन के हथियारों से श्रेष्ठ है। अमेरिकी हथियारों का आज भी कोई मुकाबला नहीं है।
वेनेजुएला में यूएस मिशन को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। तस्वीर-X/White House
वेनेजुएला ने रूस और चीन से हथियार खरीदे
अपनी रणनीतिक एवं सामरिक चुनौतियों से निपटने के लिए वेनेजुएला ने भी अन्य देशों की तरह अपनी सुरक्षा मजबूत की। पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने सेना के आधुनिकीकरण को जो प्रक्रिया शुरू की, आगे चलकर मादुरो ने भी उसे आगे बढ़ाया। वेस्टर्न हेमेस्फियर में स्थित वेनेजुएला ने अपनी सुरक्षा और सेना को ताकतवर बनाने के लिए रूस से हथियार खरीदना शुरू किया। कुछ ही समय में वह रूस से हथियार खरीदने वाला प्रमुख देश बन गया। आगे चलकर उसने चीन से भी हथियार खरीदे।
चीन से खरीदे उन्नत रडार, मिसाइल बैटरीज
साल 2025 तक वेनेजुएला के पास रूस निर्मित कई वायु रक्षा प्रणालियां आ चुकी थीं। इनमें S-300VM लॉन्ग रेंज मिसाइल, Buk-M2E मीडियम रेंज मिसाइल, इग्ला-S शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस और सोवियत काल की पेचेरो सिस्टम शामिल है। दुश्मन के हवाई खतरों को डिटेक्ट करने के लिए उसने चीन से काउंटर स्टील्थ रडार JY-27A, लॉन्ग रेंज सर्विलांस सिस्टम JYL-I जैसे उन्नत रडार खरीदे। अपने महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए उसने चीन निर्मित मध्यम दूरी वाली मिसाइल बैटरीज FK-3 को तैनात किया। इन हथियारों के आ जाने के बाद वेनेजुएला सेना के अधिकारी यह बार-बार दावा करते हे कि उनकी हवाई सुरक्षा कई स्तरों वाली हो गई है। यहां तक कि ये सिस्टम स्टील्थ एयरक्राफ्ट एवं हथियारों को भी डिटेक्ट और उनका सामना कर लेंगे।
तीन जनवरी को अमेरिका ने वेनेजुएला पर किया हमला। तस्वीर-X/White House
JY-27A को 'एंटी स्टील्थ' सिस्टम बताकर बेचा था
दरअसल, एक्सपर्ट्स का कहना है कि वेनेजुएला की रक्षात्मक रणनीति का मजबूत आधार चीन निर्मित उन्नत रडार JY-27A था। हमले के समय यह किन वजहों से काम नहीं कर पाया, यह समझ से परे है क्योंकि चीन ने इसे 'एंटी स्टील्थ' सिस्टम बताकर बेचा था। उसका दावा था कि यह सिस्टम पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट्स को भी डिटेक्ट कर लेगा लेकिन चीन का यह दावा फुस्स साबित हुआ क्योंकि वेनेजुएला के अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि अमेरिकी एयरक्राफ्ट के काफी करीब आने के बाद भी यह (रडार) सिस्टम उसे पकड़ (डिटेक्ट) नहीं पाया। रिपोर्टों में कहा गया है कि ऑपरेशन शुरू होने से पहले चीन का यह रडार 'बुरी तरह से निष्क्रिय' हो गया था।
इलेक्ट्रानिक वॉरफेयर से यूएस ने कुंद की धार
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा अमेरिका के जोरदार इलेक्ट्रानिक वॉरफेयर के चलते हुआ होगा। एक बार रडार सिस्टम फेल हो जाने पर चीनी FK-3 मिसाइल सिस्टम भी काम नहीं कर पाई होगी। रक्षा जानकार मानते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर की वजह से वेनेजुएला के एयर डिफेंस सिस्टम नाकाम हो गए। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि EA-18G ग्रोवलर जिसे खास तौर पर दुश्मन के रडार को निष्प्रभावी बनाने के लिए तैयार किया गया है, उसने मुख्य मिशन शुरू होने से पहले ही वेनेजुएला के रडार सिस्टम को जाम कर दिया। समझा जाता है कि इसके बाद यूएस सेना ने एंटी-रेडिएशन मिसाइल लॉन्च कर वेनेजुएला के एक्टिव रडार एमिटर्स को निशाना बनाया। ऐसे करने से एयर डिफेंस नेटवर्क की डिटेक्शन लेयर का खतरा समाप्त हो गया। एक बार रडार सिस्टम के फेल हो जाने पर वेनेजुएला की मिसाइल बैटरीज न तो टारगेट को लॉक करने और न ही उन्हें इंटरसेप्ट करने की स्थिति में थीं। इस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के बारे में अमेरिकी सेना के अधिकारियों ने बाद में बताया कि काराकास में एलीट फोर्स को ले जाने वाले हेलिकॉप्टर को सुरक्षित रास्ता देने के लिए जानबूझकर वेनेजुएला के एयर डिफेंस को निशाना बनाया गया।
