Times Now Navbharat
live-tv
Premium

Iran: ईरान में कैसे एक हमले ने चौपट कर दिया अमेरिका-इजराइल का प्लान? अपने ही कट्टर दुश्मन को सत्ता सौंपने की कर रहे थे तैयारी

Iran War: शुरुआत में अमेरिका और इजराइल, ईरान में तख्तापलट की कोशिश में थे, लेकिन उनका प्लान फेल हो गया। वो ईरान के जिस पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद (Mahmoud Ahmadinejad) पर दांव लगा हे थे, वही घायल हो गए।

Image
कट्टरपंथी नेता महमूद अहमदीनेजाद को ईरान का राष्ट्रपति बनाना चाहते थे ट्रंप और नेतन्याहू
Authored by: Shishupal Kumar
Updated May 20, 2026, 13:43 IST

Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल शांति हैं, युद्ध नहीं हो रहा है, लेकिन हॉर्मुज की नाकाबंदी जारी है। अब न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट आई, जिससे बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। दावा किया गया है कि अमेरिका और इजराइल, ईरान में तख्तापलट की तैयारी में थे। इसके लिए उन्होंने एक नेता भी चुन लिया था- नाम था महमूद अहमदीनेजाद (Mahmoud Ahmadinejad)। लेकिन अमेरिका और इजराइल के एक हमले ने इस प्लान को फेल कर दिया। महमूद अहमदीनेजाद, कभी अमेरिका और इजराइल के कट्टर दुश्मन थे, ऐसे में अगर ये सत्ता में लौटते तो आम ईरानी भी स्वीकार कर सकता था। ट्रंप और नेतन्याहू का ये प्लान था तो सोलिड, लेकिन जंग की शुरुआत में ही फेल हो गया। आइए समझते हैं कैसे?

कौन हैं महमूद अहमदीनेजाद?

महमूद अहमदीनेजाद, ईरान के बड़े नेता है, राष्ट्रपति तक रह चुके हैं। हालांकि आज की तारीख में ये ईरानी सत्ता के भी दुश्मन भी थे। महमूद अहमदीनेजाद की पहचान एक कट्टरपंथी नेता के तौर पर रही है। 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे। महमूद अहमदीनेजाद का पहला कार्यकाल भी विवादों में था और दूसरे कार्यकाल में तो विरोध प्रदर्शनों का अंबार लग गया। अमेरिका और यूरोप समेत कई देशों ने सीधी आलोचना की। सुप्रीम लीडर से भी संबंध खराब हो गए, इसके बाद भी वो तीसरे कार्यकाल के चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन तब गार्जियन काउंसिल ने उनके नामांकन को अस्वीकार कर दिया। तबसे वो कई बार चुनाव लड़ने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन उनका नामांकन खारिज तक दिया जाता रहा है।

कौन हैं महमूद अहमदीनेजाद (फोटो- AI)

कौन हैं महमूद अहमदीनेजाद (फोटो- AI)

अमेरिका-इजराइल के कट्टर दुश्मन हैं महमूद अहमदीनेजाद

महमूद अहमदीनेजाद की छवि अमेरिका और इजराइल के सपोर्ट वाली नहीं रही है। बल्कि वो दोनों के विरोध में खूब बोले हैं, ललकारा है। यहां तक कि महमूद अहमदीनेजाद कई बार इजराइल के विनाश के लिए आह्वान भी कर चुके हैं। इसके बाद भी अमेरिका और इजराइल अहमदीनेजाद के पास ही क्यों गए, ये कौतुहल पैदा कर रहा है।

महमूद अहमदीनेजाद के पास क्यों गए थे ट्रंप?

’द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व ईरानी राष्ट्रपति अहमदीनेजाद से अमेरिका और इजराइल ने उस समय संपर्क किया था, जब वे ईरान के खिलाफ युद्ध की योजनाएं तैयार कर रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और इजराइल द्वारा अहमदीनेजाद को संभावित नए नेता के रूप में देखना इस बात का संकेत है कि फरवरी में शुरू किया गया युद्ध तेहरान में अधिक अनुकूल नेतृत्व स्थापित करने की उम्मीद के साथ शुरू किया गया था। अहमदीनेजाद के एक करीबी सहयोगी ने भी ’द न्यूयॉर्क टाइम्स’ से पुष्टि की कि अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि अहमदीनेजाद ईरान का नेतृत्व करने और ’’देश की राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य स्थिति’’ को संभालने में सक्षम हैं। सहयोगी ने कहा कि निकट भविष्य में अहमदीनेजाद ईरान में ’’बहुत महत्वपूर्ण भूमिका’’ निभा सकते थे। उसने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका उन्हें उसी तरह स्थापित करना चाहता था जैसे वेनेजुएला में डेल्सी रोड्रिगेज को किया था, जिन्होंने निकोलस मादुरो को हटाए जाने के बाद सत्ता संभाली और बाद में ट्रंप प्रशासन के साथ करीबी सहयोग किया।

ईरान के पू्र्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद (फोटो- AP)

ईरान के पू्र्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद (फोटो- AP)

एक हमला और अमेरिका-इजराइल का प्लान फेल

अहमदीनेजाद, ईरान युद्ध से पहले ईरानी सरकार की कैद में थे, घर पर ही नजरबंद थे। तभी अमेरिका की ओर से एक हमला किया गया। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि युद्ध के पहले ही दिन इजराइली हमले में अहमदीनेजाद घायल हो गए थे और इसके बाद वह सत्ता परिवर्तन की योजना से निराश हो गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेहरान स्थित अहमदीनेजाद के आवास पर इजराइली हमला दरअसल उन्हें नजरबंदी से मुक्त कराने के उद्देश्य से किया गया था। अहमदीनेजाद के एक करीबी सहयोगी ने भी पुष्टि की कि पूर्व राष्ट्रपति ने अपने घर पर हुए हमले को खुद को आजाद कराने की कोशिश के रूप में देखा था।

कहां हैं अहमदीनेजाद?

अमेरिका-इजराइल के हमले में अहमदीनेजाद तो किसी तरह से बच गए, लेकिन बाद में वो सत्ता परिवर्तन के प्लान से हट गए। उन्होंने अमेरिका-इजराइल से दूरी बना ली और अंडरग्राउंड हो गए। फिलहाल उनका असली ठिकाना किसी को पता नहीं है।

End of Article