Times Now Navbharat
live-tv
Premium

मदुरो के बाद अब अगला नंबर किसका? क्यूबा-ग्रीनलैंड पर ट्रंप के बयान से क्यों बढ़ रही देशों की बेचैनी

वेनेजुएला पर सफल सैन्य कार्रवाई के बाद अब अमेरिका की निगाहें और कुछ ऐसे देशों पर है, जिसे लेकर ट्रंप अपनी मंशा साफ कर चुके हैं। इसमें दोस्त लेकर दुश्मन तक देश शामिल हैं। ट्रंप का अगला निशाना कहां होगा ये तो साफ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन किन-किन देशों के खिलाफ हो सकता है, ये ट्रंप वेनेजुएला पर कार्रवाई के बाद स्पष्ट कर चुके हैं।

Image
अमेरिका का कई देशों के साथ चल रहा है विवाद

ट्रंप जब से सत्ता में आए हैं, अमेरिका की युद्ध रणनीति बदली दिख रही है। अब अमेरिकी सीधे जंग में जाने के बजाय, अपना मतलब निकालने के लिए एयर स्ट्राइक का सहारा ले रहा है। चाहे वो सीरिया हो, ईरान हो, सोमालिया हो, यमन हो या फिर वेनेजुएला। हर जगह अमेरिका सीधे घुसने के बजाय लक्षित हमले करता है, अपना लक्ष्य हासिल करता है और निकल जाता है। इससे अमेरिका के सामने वियतनाम, ईरान और अफगानिस्तान जैसी परिस्थिति उत्पन्न होने का खतरा नहीं है, जहां अमेरिका ने बहुत नुकसान झेला है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उठाने के बाद अब ट्रंप अपना निशाना और देशों की ओर साधते दिख रहे हैं। ट्रंप के दौर में अमेरिका की इस बदली हुई रणनीति से कई देशों में बेचैनी दिख रही है, खासकर उन देशों में जिसके साथ अमेरिका का सालों से विवाद है। जिसमें ग्रीनलैंड से लेकर क्यूबा तक शामिल हैं।

ट्रंप का अगला 'शिकार' कौन?

ट्रंप एक के बाद एक उन विवादों पर आक्रमक रुख अपना रहे हैं, जिसका सामना अमेरिका सालों से कर रहा है। वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के एक दिन बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने अपना आक्रामक रुख और साफ कर दिया है। ट्रंप ने जहां एक बार फिर डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की जरूरत जताई है तो वहीं कोलंबिया को सैन्य कार्रवाई की धमकी दी और क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को “गंभीर संकट” में बताया है। इन बयानों से साफ है कि ट्रंप प्रशासन अब इस क्षेत्र में अपनी भूमिका को और विस्तार देने के मूड में है।

ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए कितना जरूरी?

ट्रंप, ग्रीनलैंड को लेकर शुरू से एग्रेसिव रहे हैं। कई बार धमकी दे चुके हैं, अपने बेटे तक को ग्रीनलैंड भेज चुके है। वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ट्रंप के ग्रीनलैंड संबंधी बयान और आक्रामक हो गए हैं। इससे यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ी है और आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका केवल कूटनीतिक दबाव तक सीमित न रहे। हाल ही में ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड, अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। उनका दावा है कि इस इलाके में रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी बढ़ रही है और डेनमार्क इसे सुरक्षित रखने में सक्षम नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि वेनेजुएला में हुई अमेरिकी कार्रवाई का ग्रीनलैंड के संदर्भ में क्या मतलब निकाला जाए, तो ट्रंप ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि “उन्हें खुद ही इसे समझना होगा।”

क्यूबा से विवाद पुराना

क्यूबा और अमेरिका के रिश्ते 1959 की क्यूबाई क्रांति के बाद से तनावपूर्ण रहे हैं। अमेरिका ने क्यूबा पर लंबे समय से आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिनका उद्देश्य वहां की कम्युनिस्ट सरकार पर दबाव बनाना रहा है। हालिया घटनाक्रम में वेनेजुएला संकट के बाद अमेरिका ने क्यूबा पर नए सिरे से आरोप लगाए हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया कि क्यूबा, वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति मादुरो की सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था में शामिल था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी क्यूबा की अर्थव्यवस्था के और कमजोर होने की चेतावनी दी है। इससे दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। क्यूबा सरकार ने आरोप लगाया है कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान उसके 32 अधिकारी मारे गए। बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि क्यूबाई अधिकारी वेनेजुएला में किस अभियान में थे। क्यूबा, वेनेजुएला का सहयोगी देश है और वर्षों से वहां अभियानों में सहायता के लिए अपने सैन्य और पुलिस बल भेजता रहा है। ट्रंप ने कहा कि मादुरो के हटने से क्यूबा की अर्थव्यवस्था और कमजोर होगी, क्योंकि उसे अब सस्ती वेनेजुएला तेल आपूर्ति नहीं मिल पाएगी।

us cuba relation

11 जून, 1898 को अमेरिकी मरीन द्वारा क्यूबा की धरती पर पहली बार अमेरिका का झंडा फहराया गया (फोटो- National Museum of the U.S. Navy)

कोलंबिया भी ट्रंप के निशाने पर

कोलंबिया भी ट्रंप के निशाने पर है। उन्होंने कोलंबियाई राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो पर कोकीन के वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है और इशारों-इशारों में सैन्य कार्रवाई की संभावना भी जता दी। ट्रंप प्रशासन पहले ही पेट्रो और उनके करीबी लोगों पर प्रतिबंध लगा चुका है और ड्रग तस्करी के मुद्दे पर कोलंबिया को सहयोग न करने वाले देशों की सूची में डाल दिया गया है। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका कोलंबिया में भी कोई ऑपरेशन कर सकता है, तो उनका जवाब था, “यह अच्छा विचार लगता है।” वहीं वेनेजुएला पर हमले के तुरंत बाद कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने पूरी दुनिया को अलर्ट पर रहने के लिए कहा था।

ईरान पर फिर हमले की आशंका

ईरान के कुछ हिस्सों में सत्ताविरोधी प्रदर्शनों के गति पकड़ने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शीर्ष ईरानी नेता एक दूसरे को धमका चुके हैं। इन प्रदर्शनों के बीच ट्रंप ने सबसे पहले अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ’ पर ईरान को चेतावनी दी कि अगर वह ‘‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिंसक हत्याएं’’ करता है, तो अमेरिका ‘‘उनकी मदद के लिए आएगा।’’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने विस्तृत जानकारी दिये बिना कहा, ‘‘हम पूरी तरह से तैयार हैं और कार्रवाई को तत्पर हैं।’’ ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान की सेना जानती है कि अगर उसकी संप्रभुता का उल्लंघन होता है तो उसे कहां निशाना साधना है।"

us b2

अमेरिका का बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर, जिसने ईरान में की थी बमबारी (फोटो- AP)

वेनेजुएला की नई शासक को भी धमकी

मादुरो को वेनेजुएला से उठाने के बाद ट्रंप ने वहां की नई शासक को भी धमकी दे डाली है। ट्रंप ‘द अटलांटिक’ पत्रिका को टेलीफोन पर दिये साक्षात्कार में कहा कि वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज अगर लातिन अमेरिकी देश के लिए सही काम नहीं करतीं तो उन्हें बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। रोड्रिग्ज ने वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को देश से ले जाने की आलोचना की है और मांग की है कि अमेरिका उन्हें वापस लौटाए। ट्रंप ने पत्रिका से कहा कि ‘‘अगर वह सही काम नहीं करती है, तो उन्हें बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, शायद मादुरो से भी बड़ी।’’

अमेरिका के लिए दोस्त और दुश्मन सब बराबर?

हाल के दिनों में जो रणनीति दिखी है, उससे ये नहीं कहा जा सकता कि अमेरिका किसका दोस्त है और किसका दुश्मन? जो डेनमार्क नाटो के संस्थापक सदस्यों में से एक है, उसी से ट्रंप, ग्रीनलैंड के लिए उलझने को तैयार दिख रहे हैं। यूक्रेन जिस अमेरिका के भरोसे रूस के साथ जंग में गया, वो अमेरिका, यूक्रेन से ज्यादा अब रूस के साथ दिख रहा है। यूरोप के कई देशों के साथ अमेरिका के रिश्ते अब पुराने जैसे नहीं रहे। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिका अपने फायदे के लिए कब और किस पर निशाना साध दे, कहा नहीं जा सकता।

End of Article