साल 2024 में जादवपुर लोकसभा सीट से जीता चुनाव।
उनकी रैलियों में सिर्फ भाषण सुनने नहीं, बल्कि उनकी गायकी देखने भी भीड़ उमड़ती है।
"वादा करो नहीं छोड़ोगे तुम मेरा साथ...", स्टेज पर जब सफेद साड़ी और माथे पर बिंदी सजाए सयानी घोष (Saayoni Ghosh) फिल्मी गानों की धुन छेड़ती हैं, तो बंगाल के शहरों से लेकर सोशल मीडिया की रील्स तक वो ट्रेंड करने लगती हैं।
इस बंगाल विधानसभा चुनाव (Bengal Election) में अगर कोई नाम सबसे ज्यादा वायरल हुआ है, तो वह तृणमूल कांग्रेस की फायरब्रैंड नेता सयानी घोष हैं। ममता बनर्जी की 'स्ट्रीट फाइटर' वाली छवि को अपने भीतर उतारकर, स्टेज से धारदार भाषण देने वाली सयानी आज टीएमसी (TMC) की नई पीढ़ी का सबसे चमकता चेहरा बनकर उभरी हैं।
सीएम ममता बनर्जी के साथ सयानी घोष की फोटो। saayoni ghosh insta
फिल्मी पर्दे से सियासत के मैदान तक
सयानी, उन नेताओं में शुमार हैं जिन्होंने राजनीति में आने से पहले फिल्मी पर्दे पर अपनी धाक जमाई। साल 1993 में कोलकाता में जन्मी सयानी ने साउथ पॉइंट हाई स्कूल और फिर कलकत्ता यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया।
स्कूल-कॉलेज के दिनों से ही नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शौकीन सयानी ने 'इच्छे दाना' टेलीफिल्म से एक्टिंग की शुरुआत की। इसके बाद 'कनामाची', 'अंतराल', 'एकला चलो', 'राजकाहिनी' और 'ब्योमकेश ओ चिरियाखाना' जैसी फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी से उन्होंने बंगाली सिनेमा में खूब लाइमलाइट बटोरी।
बंगाल चुनाव में सबसे चर्चित नाम में से एक हैं सयानी घोष। Saayoni Ghosh insta
एक्टिंग की दुनिया में नाम कमाने के बाद सयानी को सियासत का पहला बड़ा ब्रेक साल 2021 में मिला। उन्होंने आसनसोल सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया और वह बीजेपी उम्मीदवार से हार गईं। हालांकि, उनकी मेहनत देख अभिषेक बनर्जी ने उसी साल उन्हें टीएमसी यूथ कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर मास्टरस्ट्रोक खेल दिया।
साल 2021 में टीएमसी यूथ कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं सयानी घोष। saayoni ghosh insta
जब त्रिपुरा में हुआ 'खेला'
सयानी का सियासी सफर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। साल 2021 में त्रिपुरा के निकाय चुनाव के दौरान वह एक बीजेपी सभा के पास से गुजर रही थीं और उन्होंने जोश में 'खेला होबे' का नारा लगा दिया। बस फिर क्या था, अगरतला में मामला दर्ज हुआ और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी के बाद थाने के बाहर टीएमसी समर्थकों और विरोधियों के बीच जमकर झड़प हुई। इतना ही नहीं, साल 2023 में जब वह यूथ विंग की अध्यक्ष थीं, तब पश्चिम बंगाल के कथित भर्ती घोटाले में ईडी ने उनसे करीब 10 घंटों तक कड़ी पूछताछ भी की थी।
जादवपुर की जीत
तमाम चुनौतियों के बीच साल 2024 सयानी के लिए सबसे बड़ी कामयाबी लेकर आया, जब उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी सीट से शानदार जीत दर्ज की। आज वह टीएमसी की सबसे बड़ी 'क्राउड पुलर' हैं। उनकी रैलियों में सिर्फ भाषण सुनने नहीं, बल्कि उनकी गायकी देखने भी भीड़ उमड़ती है। 'बांग्ला भाषा', 'बांग्ला संस्कृति' और 'ममता दीदी की विचारधारा', इन तीनों के कॉम्बिनेशन ने उन्हें जनता का चहेता बना दिया है।
बतौर सांसद, लोकसभा में उनका अंदाज बिल्कुल अलग ही रहता है। बांग्ला, हिंदी और अंग्रेजी में उनका भाषण सोशल मीडिया पर काफी वायरल होते हैं। संसद में हाल ही में दिए एक चर्चित भाषण में उन्होंने भारतीय संविधान को अपने लिए भगवद् गीता बताया था। इस भाषण में घोष ने कहा, “जिस तरह से ये संसद प्रधानमंत्री के लिए एक मंदिर है, इसी तरह ये हमारे लिए भी एक मंदिर है और भारत का गणतंत्र हमारी पूजा है। संविधान हमारी भगवद् गीता है।”
लोकसभा में भाषण देतीं सयानी घोष की फोटो। Sansad TV
ममता दीदी का अक्स
ममता बनर्जी के अंदाज को कॉपी करने वाली सयानी में लोग दीदी का अक्स देखते हैं। हालांकि, उन्हें अभी से ममता बनर्जी का उत्तराधिकारी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना तय है कि सयानी का यह 'फिल्मी-सियासी' अंदाज बंगाल की जनता को खूब रास आ रहा है। सयानी ने साबित कर दिया है कि वह सिर्फ रील की ही नहीं, बल्कि रियल लाइफ की भी लंबी रेस की खिलाड़ी हैं।
