कौन हैं नाजनीन बरादरान? जिसने ईरान के सुप्रीम लीडर की उड़ाई नींद, खामेनेई शासन ने किया गिरफ्तार
Nazanin Baradaran: ईरान में जल रही हिंसा की आग में अब तक पांच हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, खामेनेई शासन ने कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया है। 63 साल की नाजनींन बरादरन भी गिरफ्तार किए गए लोगों में हैं। महिला सश्कितकरण और महिलाओं की आजादी के लिए आवाज उठाने वाली नाजनींन बरादरन पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आइए जानते हैं कि नाजनींन बरादरन कौन हैं।
- Authored by: Piyush Kumar
- Updated Jan 18, 2026, 09:03 PM IST
Nazanin Baradaran Arrested In Iran Protests: ईरान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रहा है। बेकाबू महंगाई, गहराता आर्थिक संकट और अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच चुकी मुद्रा रियाल ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। हालात इतने बदतर हो गए कि लोगों का सब्र जवाब दे गया। कुछ ही दिनों पहले तेहरान से उठी असंतोष की चिंगारी देखते-देखते देश के 50 से ज्यादा शहरों में आग की तरह फैल गई और हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।
शुरुआत में शांत दिख रहे ये विरोध प्रदर्शन जल्द ही अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के खिलाफ खुली बगावत में बदल गए। नारे, गुस्सा और आक्रोश जब हिंसा में तब्दील हुआ तो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़पें हुईं। हालात इतने बेकाबू हो गए कि 5000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई, और ईरान एक बार फिर खून-खराबे की तस्वीरों से भर उठा।
ईरान में खामेनेई शासन के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन।(फोटो सोर्स: AP)
अमेरिका और इजरायल के संपर्क में रहने का आरोप
विरोध प्रदर्शन के बाद खामेनेई शासन उन लोगों पर एक्शन ले रहा है जिन्होंने विरोध की आवाज को बुलंद किया था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, 63 साल की नाजनींन बरादरन को भी निशाना बनाया गया है, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व किया। IRGC ने इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर नाजनींन बरादरन को गिरफ्तार किया है। उन्हें विरोध प्रदर्शनों को हिंसक बनाने का 'मास्टरमाइंड' बताया गया है। वहीं, आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि उनका अमेरिका और इजरायल से संपर्क था। ईरानी मीडिया के मुताबिक, महिला के देश के निर्वासित प्रिंस रजा पहलवी से कनेक्शन हैं।
बता दें कि अमेरिका में निर्वासन का जीवन जी रहे ईरान के पूर्व शाह के बेटे रजा शाह पहलवी ने प्रदर्शनकारियों से ‘आखिरी लड़ाई’ लड़ने की अपील कर माहौल को और गर्म कर दिया।
रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि बरादरन का राहा परहम कोड नेम था। इसी कोडनेम के साथ वो रजा पहलवी के साथ संपर्क में थी। इसके अलावा, वो अमेरिका की खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) के संपर्क में भी थी।
ईरान में खामेनेई शासन के खिलाफ प्रदर्शन करती महिलाएं।(फोटो सोर्स: AP)
कौन हैं नाजनीन बरादरन?
नाजनीन बरादरन का जन्म 1963 में हुआ था। उन्होंने ईरान के शहर शिराज में मौजूद शिराज यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। वे महिला अधिकारों और महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर लगातार आवाज उठाती रही हैं।
खामेनेई ने ट्रंप को बताया अपराधी
विरोध प्रदर्शन की आवाजों को धीरे-धीरे दबाने के बाद शनिवार को ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली खामेनेई दुनिया के सामने नजर आए। उनके निशाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप थे। उन्होंने ट्रंप को 'अपराधी' करार देते हुए उन्हें हजारों लोगों की हत्या का जिम्मेदार ठहराया।
खामेनेई ने कहा कि ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से प्रदर्शनकारियों को उत्साहित किया और कहा, “हम आपका समर्थन करते हैं, हम सैन्य रूप से आपका समर्थन करेंगे।” उन्होंने अमेरिका पर ईरान के राजनीतिक और आर्थिक संसाधनों पर हावी होने का प्रयास करने का आरोप लगाया और प्रदर्शनकारियों को विदेशी ताकतों का “फुट सोल्जर” बताया। खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को दोषी ठहराया।
खामेनेई के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने मस्जिदों और शैक्षणिक केंद्रों को नष्ट किया, और उनके कारण हजारों लोगों की मौत हुई। उन्होंने यह भी कहा कि दंगाइयों के पास विदेश से लाई गई असली गोलियों से लैस हथियार थे, हालांकि किसी देश का नाम नहीं लिया।
ईरान के नेता खामेनेई और राष्ट्रपति ट्रंप की फाइल फोटो।(फोटो सोर्स: AP)
आर्थिक बदहाली की ओर बढ़ता ईरान
2025 में ईरान में महंगाई ने रिकॉर्ड तोड़ उछाल दर्ज किया है। बीते साल की तुलना में महंगाई दर 30 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 52 प्रतिशत के पार पहुंच गई, जबकि औसत मासिक खाद्य महंगाई करीब सात प्रतिशत तक दर्ज की गई। हालात इतने खराब हो गए कि ईरानी मुद्रा रियाल ने एक ही साल में अपनी कीमत का आधे से ज्यादा हिस्सा गंवा दिया। इस हफ्ते रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले टूटकर 1.46 मिलियन के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया।
एक नहीं, अनेक समस्या से जूझ रहा ईरान
बता दें कि ईरानी रियाल की लगातार गिरती कीमत अपने आप में अकेली समस्या नहीं थी, बल्कि यह उन गहरी और पुरानी चुनौतियों का नतीजा थी, जिनसे ईरान पहले से जूझ रहा था। देश में पानी की किल्लत, बार-बार बिजली कटौती, बढ़ती बेरोजगारी और बेलगाम महंगाई ने आम लोगों की जिंदगी पहले ही मुश्किल बना दी थी।
ईरान शासन के खिलाफ लोग सड़कों पर कर रहे प्रदर्शन की तस्वीर।(फोटो सोर्स: AP)
आर्थिक प्रतिबंध ने तोड़ दी ईरान की कमर
हालात तब और बिगड़ गए जब 2018 में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। इन प्रतिबंधों ने अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी और लाखों ईरानियों की रोजमर्रा की ज़िंदगी पर सीधा असर पड़ा। इसके बाद सितंबर 2025 में ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस ने 2015 के परमाणु समझौते के तहत हटाई गई संयुक्त राष्ट्र की पाबंदियों को दोबारा लागू कर दिया, जिससे संकट और गहरा गया।
नतीजतन, देश में खाद्य महंगाई 70 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई और दिसंबर में ईरानी रियाल डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिर गया। इन हालातों ने जनता का सरकार से भरोसा लगभग खत्म कर दिया। लोगों को लगने लगा कि मौजूदा सरकार बिगड़ती अर्थव्यवस्था को संभाल पाने में सक्षम नहीं है। विरोध शुरू होने से पहले ही राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का यह कहना कि वे देश की आर्थिक स्थिति सुधारने में असमर्थ हैं, जनता की निराशा को और गहरा कर गया।
यही आर्थिक बदहाली मौजूदा विरोध प्रदर्शनों की सबसे बड़ी वजह बनी, जिसने ईरान को एक बार फिर गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट के दौर में धकेल दिया। बची-कुची कसर ट्रंप ने पूरी कर दी जब पिछले साल जून में उन्होंने ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का आदेश दिया। फिलहाल खामेनेई शासन के पास न तो अमेरिका के एक्शन का कोई जवाब दिख रहा है और न ही देश में बढ़ती महंगाई और आर्थिक बदहाली को कम करने का कोई प्लान।
