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Explainer: कहां है शक्सगाम घाटी जिस पर ड्रैगन की बुरी नजर, भारत के लिए क्यों है अहम?

भारत ने शक्सगाम घाटी में चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण व परियोजनाओं की आलोचना करते हुए कहा था कि चूंकि यह भारतीय क्षेत्र है, इसलिए वह अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी उपाय करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है। जानिए क्या है ये पूरा विवाद....

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शक्सगाम घाटी पर क्या है विवाद? (Photo: Wikimedia Commons/ANI)

भारत और चीन के बीच शक्सगाम घाटी विवाद का मुद्दा बन गई है। भारत द्वारा इस रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र को भारतीय क्षेत्र घोषित करने और शक्सगाम घाटी में चीनी निर्माण पर आपत्ति को विवाद गहरा गया है। भारत ने यहां हो रहे चीनी निर्माण और गतिविधियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इसके कुछ दिनों बाद बीजिंग ने नई दिल्ली पर पलटवार करते हुए इसे जायज ठहराया है। यानी मामला अब तूल पकड़ता दिख रहा है। भारत ने सख्त शब्दों में जता दिया कि पाक अधिकृत कश्मीर में किसी भी तीसरे देश की दखलअंदाजी उसे स्वीकार्य नहीं होगी। दरअसल, इस विवाद की जड़ में पाकिस्तान है जो चीन के कंधे पर बंदूक रखकर भारत को उकसाना चाहता है। आखिर शक्सगाम घाटी कहां है और क्यों विवादों के केंद्र में है, पाकिस्तान-चीन की इसमें क्या भूमिका है, विस्तार से जानते हैं।

भारत ने क्या कहा?

पिछले शुक्रवार को भारत ने शक्सगाम घाटी में चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण व परियोजनाओं की आलोचना करते हुए कहा था कि चूंकि यह भारतीय क्षेत्र है, इसलिए वह अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी उपाय करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है। हमने 1963 में हस्ताक्षरित तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है। हमने लगातार यह कहा है कि यह समझौता अवैध और अमान्य है। हम तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को भी मान्यता नहीं देते हैं, जो भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिस पर पाकिस्तान का जबरन और अवैध कब्जा है। मंगलवार को सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने साफ किया कि भारत ने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है और न ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को मान्यता देता है।

कहां है शक्सगाम घाटी?

शक्सगाम घाटी, जिसे ट्रांस काराकोरम क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है, काराकोरम पर्वतमाला के उत्तर में स्थित एक दूरस्थ, ऊंचाई पर स्थित घाटी है। शक्सगाम घाटी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के हुंजा-गिलगित क्षेत्र में स्थित है और एक विवादित क्षेत्र है। भारत का दावा है कि यह संवेदनशील क्षेत्र भारतीय क्षेत्र है। 1963 में पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच सीमा विवादों को सुलझाने के उद्देश्य से किए गए 'सीमा समझौते' के तहत शक्सगाम घाटी को चीन को सौंप दिया था।

उत्तरी क्षेत्र में स्थित शक्सगाम घाटी उत्तर में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) के शिनजियांग प्रांत, दक्षिण और पश्चिम में पीओके के उत्तरी क्षेत्रों और पूर्व में सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र से लगती है। शक्सगाम घाटी को शिनजियांग के हिस्से के रूप में चीन प्रशासित करता है। हालांकि, भारत हमेशा से यह दावा करता रहा है कि शक्सगाम घाटी पूर्व जम्मू और कश्मीर रियासत (अब लद्दाख) का हिस्सा थी। पाकिस्तान ने 1947-1948 के युद्ध के दौरान इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था और बाद में 1963 के चीन-पाकिस्तान समझौते के तहत इसे चीन को सौंप दिया था।

शक्सगाम घाटी को लेकर विवाद क्या है?

शक्सगाम घाटी को लेकर मुख्य विवाद यह है कि इस क्षेत्र में सीमा निर्धारण का कानूनी अधिकार किसके पास है। 1963 में पाकिस्तान और चीन ने एक सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत शक्सगाम/ट्रांस-काराकोरम क्षेत्र का नियंत्रण चीन को हस्तांतरित कर दिया गया था। भारत ने इस 'सीमा समझौते' को कभी स्वीकार नहीं किया है और कहा है कि पाकिस्तान उस क्षेत्र को नहीं छोड़ सकता जिसे भारत जम्मू-कश्मीर का हिस्सा मानता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले सप्ताह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है। हमने 1963 में हस्ताक्षरित तथाकथित चीन-पाकिस्तान 'सीमा समझौते' को कभी मान्यता नहीं दी है। हम लगातार यह कहते रहे हैं कि यह समझौता अवैध और अमान्य है। उन्होंने अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, हम तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को भी मान्यता नहीं देते हैं, जो भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिस पर पाकिस्तान का जबरन और अवैध कब्जा है।

उन्होंने कहा, जम्मू और कश्मीर व लद्दाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं। यह बात पाकिस्तानी और चीनी अधिकारियों को कई बार स्पष्ट रूप से बताई जा चुकी है। हमने शक्सगाम घाटी में जमीनी हकीकत को बदलने के प्रयासों के खिलाफ चीनी पक्ष के साथ लगातार विरोध जताया है। हम अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार भी सुरक्षित रखते हैं।

चीन-पाकिस्तान का नापाक मंसूबा

काराकोरम दर्रों और सियाचिन क्षेत्र के निकट स्थित शक्सगाम घाटी रणनीतिक रूप से संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। 2024 में भी भारत ने शक्सगाम घाटी में चीनी सड़क निर्माण पर चिंता जताई थी। भारत ने 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को लगातार खारिज किया है, जिसके तहत शक्सगाम क्षेत्र को चीन को सौंपने और शक्सगाम घाटी को अपना क्षेत्र घोषित करने का प्रयास किया गया था। अगर चीन इस क्षेत्र में सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्र्क्चर विकास करता है, तो भारत इसे उस क्षेत्र में गतिविधि मानता है जिस पर वह अपना दावा करता है। नई दिल्ली की चिंताएं भारतीय क्षेत्र से कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित शक्सगाम घाटी में चीन की एक लंबी, हर मौसम में चलने योग्य सड़क के निर्माण की योजना से उपजी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने पहले ही लगभग 75 किलोमीटर सड़क का निर्माण कर लिया है, जिसकी चौड़ाई लगभग 10 मीटर होने का अनुमान है।
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