रूस-यूक्रेन खत्म कराने के लिए ट्रंप ने तैयार किया है 28 सूत्री प्लान। तस्वीर-AP
Trump Peace Plan: रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी 28 सूत्री योजना पेश की है। अपनी इस योजना को लेकर वह बहुत ही सकारात्मक हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति को लगता है कि इस बार वह अपनी योजना में कामयाब हो जाएंगे। बीते दिनों उन्होंने कहा कि 'हम डील के करीब पहुंच रहे हैं।' दरअसल, उनका यह बयान आधारहीन नहीं था। शांति प्लान पर यूक्रेन और रूस के शुरुआती नजरिए को देखने के बाद उन्होंने यह बात कही लेकिन जैसे-जैसे दिन गुजर रहा है, ट्रंप के इस शांति प्रस्ताव पर सवाल उठने लगे हैं। यूक्रेन इस प्लान को लेकर कहीं ज्यादा सशंकित हो उठा है। ट्रंप के स्वभाव को देखते हुए उसे उनकी बातों पर भरोसा नहीं हो रहा है। रूस ने भी कहा है कि अभी इस प्रस्तावित शांति प्लान में बहुत सारी चीजें ऐसी हैं जिन पर बातचीत करने की जरूरत है। तो जेलेंस्की ने कहा है कि इस शांति प्लान के कई पहलू ऐसे हैं जो स्थायी शांति की तरफ ले जा सकते हैं। ट्रंप के इस शांति प्रस्ताव पर रूस और यूक्रेन का रुख क्या है, इसे जानना जरूरी है-
ट्रंप की इस शांति योजना पर वोलोदिमीर जेलेंस्की की सबसे ज्यादा चिंता अपनी सुरक्षा और रूसी नियंत्रण वाले अपने भू-भाग पर है क्योंकि पूर्वी यूक्रेन का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा रूस के नियंत्रण में है। दरअसल, जेलेंस्की अमेरिकी की तरफ से सुरक्षा गारंटी चाहते हैं, वह जानते हैं कि यूरोप की सुरक्षा गारंटी उनके देश को महफूज नहीं रख पाएगा। यूरोप चाहकर भी रूस से लंबे समय तक नहीं लड़ सकता। रूस को रोक पाने का सैन्य सामर्थ्य अगर किसी के पास है तो वह रूस है। इसलिए जेलेंस्की चाहते हैं कि अमेरिका उसकी सुरक्षा की गारंटी ले। यूक्रेन की सुरक्षा को लेकर ट्रंप द्वारा तैयार इस शांति प्रस्ताव में कहा गया है कि यूक्रेन को एक 'विश्वसनीय' सुरक्षा गारंटी दी जाएगी और इस गारंटी में अमेरिका भी शामिल होगा लेकिन अमेरिका किस रूप में शामिल होगा, क्या वह सैन्य रूप से हस्तक्षेप करेगा, इसके बारे में कोई स्पष्टता नहीं दी गई है।
हालांकि कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि अमेरिका जापान और दक्षिण कोरिया की तरह यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी दे सकता है लेकिन इस तरह की डील के लिए ट्रंप को कांग्रेस से इजाजत लेनी होगी। बिना कांग्रेस की मंजूरी इस तरह का सुरक्षा समझौता नहीं हो सकता। ट्रंप के इस 28 सूत्री प्लान में कहा गया है कि रूस, यूक्रेन पर यदि दोबारा हमला करता है तो उसे एक समन्वित सैन्य जवाब का मुकाबला करना होगा। इसके अलावा मास्को पर सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध दोबारा से लग जाएंगे और उसे मिलने वाली सभी सहूलियतें खत्म कर दी जाएंगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पीस डील का यह अनुंबध बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस की कोई भी आक्रामकता समझौते को निष्प्रभावी कर देगी।
यूरोप के देशों को पुतिन पर भरोसा नहीं है। उनका मानना है कि पीस डील हो जाने के बाद भी रूस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इस समझौते के बाद रूस यूक्रेन पर भले ही हमला न करे लेकिन इसके बाद यूरोपीय देश उसके निशाने पर आ जाएंगे। खास तौर पर पोलैंड और नार्वे जो कि उसके करीब है। रूस पहले ही नाटो की वायु सीमा का उल्लंघन कई बार कर चुका है। यूरोपीय देश भी चाहते हैं कि यूक्रेन को मिलने वाली सुरक्षा गारंटी में यूएस सक्रिय रूप से भागीदार बने लेकिन युद्ध और नाटो के खर्चे को लेकर ट्रंप के रुख से यूरोप के ये देश भलीभांति परिचित हैं। ट्रंप पहले से ही नाटो के देशों जिसमें यूरोप के बहुत सारे देश शामिल हैं, उनसे अपना रक्षा बजट बढ़ाकर पांच प्रतिशत करने की बात कह चुके हैं। वह नहीं चाहते कि नाटो को चलाने में अमेरिका का ज्यादा पैसा खर्च हो। वे चाहते हैं कि यूरोप के देश अपनी सुरक्षा का खर्च खुद वहन करें। युद्ध और खर्च पर ट्रंप का यह रुख यूरोप के देशों में दहशत पैदा कर रहा है। उन्हें लगता है कि ट्रंप यूक्रेन पर दबाव डालकर किसी तरह अपनी इस महात्वाकांक्षी डील पर मुहर लगवाना और खुद को 'शांति का मसीहा' घोषित कराना चाहते हैं।
अमेरिका जानता है कि बिना उसकी सैन्य एवं आर्थिक मदद के यूक्रेन युद्ध जारी नहीं रख सकता है। रूस से युद्ध लड़ना है तो उसे अमेरिकी हथियारों और पैसों की जरूरत पड़ेगा। ट्रंप इसका फायदा उठाना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने जेलेंस्की पर दबाव बनाना भी शुरू कर दिया है। पिछले सप्ताह यूएस आर्मी के सेक्रेट्री डैन ड्रिस्कॉल ने कीव में जो कुछ कहा, उसे इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। ड्रिस्कॉल ने सीधे तौर पर यूक्रेन से कहा कि अभी मोर्चे पर जैसा चल रहा है, वह ऐसे ही चलता रहा तो युद्ध में आप की हार तय है। ड्रिस्कॉल ने कहा कि 'रूस जिस तरह से हवाई हमले कर रहा है, उससे यूक्रेन के सैनिक काफी दबाव में हैं। रूस के हमले संख्या और तेजी दोनों में बहुत ज्यादा हैं। यहां तक कि रूस फौज के पास इस युद्ध को अनिश्चितकाल तक जारी रखने की क्षमता है।' दरअसल, ड्रिस्कॉल का संदेश साफ है कि युद्ध में यूक्रेन की हार हो रही है और उसे डील स्वीकार कर लेनी चाहिए।
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