जर्मनी ने समूह को 'खतरनाक' बताकर प्रतिबंधित किया। तस्वीर-www.abendblatt.de
Muslim Interactive group : जर्मनी ने चरमपंथी समूह 'मुस्लिम इंटरेक्टिव ग्रुप' पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह समूह जर्मनी की सरकार को नहीं मानता और चाहता है कि लोकतांत्रिक सरकार को सत्ता से बाहर कर देश में शरिया लागू किया जाए। यह समूह जर्मनी में सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों का आयोजन करता आया है। समूह की 'विघटनकारी एवं उग्र विचार' को देखते हुए जर्मनी की सुरक्षा एजेंसियों ने इसे चरमपंथी समूह घोषित किया है। समूह पर प्रतिबंध लगने के बाद अब इसकी चर्चा चारो तरफ हो रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक इस इस्लामिक समूह की स्थापना 2020 में हुई और इसे हिज्ब उत तहरीर (HuT) से निकला हुआ माना जाता है। हिज्ब उत तहरीर एक व्यापक इस्लामी एवं चरमपंथी समूह है। इस समूह पर जर्मनी, भारत, ब्रिटेन, बांग्लादेश, चीन, रूस और पाकिस्तान सहित कई देश प्रतिबंध लगा चुके हैं। इस समूह ने यहूदियों की हत्या करने का आह्वान किया था जिसके बाद जर्मनी ने 2003 में इसे प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। जर्मनी में यह समूह मुख्य रूप से हैम्बर्ग एवं बर्लिन में सक्रिय है। समूह अपने विचार और बातों का प्रचार-प्रसार करने के लिए टिकटॉक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों एवं एप का इस्तेमाल करता रहा है। समूह के निशाने पर खास तौर से 15 से 25 वर्ष के युवा हैं। ये उनका ब्रेशवान करने के लिए सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करते हैं। जर्मनी में यह समूह मुस्लिमों की तीसरी पीढ़ी यानी युवाओं को अपनी तरफ आकर्षित करता आया है।
युवाओं को अपनी तरफ खींचने के लिए यह समूह छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी वीडियो बनाता है। समूह कहता है कि जर्मनी में मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है और उन पर जर्मनी के समाज के साथ घुल-मिल जाने का दबाव है। वह खुद को इस्लाम का रक्षक बताता है। यही नहीं, यूरोप को मुसलमानों का दुश्मन बताने के लिए उसने फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष और दुनिया में कुरान जलाने की घटनाओं को अपने एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। इस समूह ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए जर्मनी में सरकार के खिलाफ कई विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए। साल 2024 में इसने 'डॉन्ट ओबे द लायर्स' नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस आयोजन में 1000 से ज्यादा मुस्लिम हैम्बर्ग की सड़कों पर उतर आए। इनमें से कई ने अपने हाथ में तख्तियां ले रखी थीं जिन पर लिखा था-'खलीफा का शासन ही विकल्प है'। इस दौरान मुस्लिमों ने 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगाए गए।
जो अडाडे बोटेंग को इस 'मुस्लिम इंटरेक्टिव ग्रुप' का नेता बताया जाता है। कहा जाता है कि बोटेंगे की उम्र 25 साल के करीब है। इसका जन्म 1998 में जर्मन के नेउलेरमो में हुआ। इसकी माता जर्मन और पिता घाना के हैं। साल 2020 के करीब इसने 'रहीम' नाम अपना लिया। समझा जाता है कि हैम्बर्ग यूनिवर्सिटी से वह शिक्षक की डिग्री ले रहा है।
सोशल मीडिया पर अपने वीडियो में बोटेंग एक सुसंस्कृत और पेशेवर व्यक्ति के रूप में नजर आता है। वह किसी उपदेशक की तुलना में अधिक एक 'इन्फ्लुएंसर' जैसा दिखता है। उसकी दाढ़ी घनी और काली है और बाल अक्सर बहुत छोटे और सलीके से कटे रहते हैं। वह एक प्रभावशाली और सहज वक्ता हैं। उसने दावा किया है कि जर्मनी में मुसलमान खतरे में हैं। अपने एक वीडियो में उसने कहा था, 'हम अपने मुस्लिम जीवनशैली का अधिकार मांगते हैं।' बोटेंग अक्सर जर्मनी में महिलाओं और अन्य अल्पसंख्यकों को दिए गए अधिकारों की आलोचना करता है। कुछ लोगों ने उसे 'पॉप इस्लामिस्ट्स का पोस्टर बॉय' भी कहा है।
इस्लामिज्म विशेषज्ञ और एफडीपी से संबद्ध संस्था 'लिबरल डाइवर्सिटी' उपाध्यक्ष एरेन ग्यूवरसिन के मुताबिक 'वह हुडी पहनता है, स्पोर्ट्स कार चलाता है, फिट रहता है और हिप-हॉप संस्कृति से प्रभावित है।' उन्होंने आगे कहा, 'उसका व्यक्तित्व करिश्माई है और बिल्कुल भी मूर्ख नहीं। युवा लोग उसे बेहद दिलचस्प पाते हैं और जल्दी ही उसके प्रभाव में आ जाते हैं। वह खुद को ‘कूल बड़े भाई’ के रूप में पेश करता है।' यह समूह प्रतिबंधित होने से पहले ही लंबे समय से अधिकारियों की निगरानी में था। सरकार ने कहा है कि अब इस समूह को भंग किया जाएगा और इसकी संपत्ति जब्त की जाएगी। जर्मनी के गृह मंत्रालय ने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि यह समूह मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा था और महिलाओं व लैंगिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देकर देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था के लिए खतरा बन गया था।
जर्मन सरकार का तर्क है कि यह समूह इसलिए विशेष रूप से खतरनाक है क्योंकि यह इस्लाम को सामाजिक व्यवस्था का एकमात्र मॉडल बताता है और यह प्रचार करता है कि मुस्लिम समुदाय के जीवन को नियंत्रित करने में इस्लामी कानून को जर्मन कानून से ऊपर रखा जाना चाहिए, खासकर महिलाओं के साथ व्यवहार जैसे मुद्दों में।
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