क्या है 'कोरियन लव गेम', यह कैसे बनता है जानलेवा? गाजियाबाद में जिसकी वजह से तीन बच्चियों ने मौत को लगाया गले
गाजियाबाद में तीनों बच्चियों की मौत का पूरा मामला बताएंगे साथ ही यह भी कि इस मामले में पुलिस की जांच अभी तक कहां पहुंची है और इसकी क्या वजह सामने आई है। साथ ही जिस मोबाइल गेम कोरियन लव गेम का नाम सामने आ रहा है वो क्या है और कैसे उस पर गेम खिलाया जाता है और ये कितना खतरनाक है।
- Curated by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 4, 2026, 10:46 PM IST
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन बच्चियों निशिका प्राची और पाखी की मौत के बाद ऑनलाइन गेमिंग और एक गेम -कोरियन लव गेम को लेकर इंटरनेट से लेकर जमीन पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोग इसकी तुलना ब्लू व्हेल गेम से कर रहे हैं, जिसके टास्क को पूरा करने के चक्कर में कई बच्चों द्वारा मौत को गले लगाने की खबरें आई थीं। कथित तौर पर 2016 से 2018 के बीच ऐसी कई घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें मोबाइल गेम ब्लू व्हेल को दोषी ठहराया गया था। अब गाजियाबाद में हुई घटना के बाद कोरियन लव गेम को लेकर फिर से एक वैसी ही बातें शुरू हो गई हैं। ऐसे में हम आपको गाजियाबाद में तीनों बच्चियों की मौत का पूरा मामला बताएंगे साथ ही यह भी कि इस मामले में पुलिस की जांच अभी तक कहां पहुंची है और इसकी क्या वजह सामने आई है। साथ ही जिस मोबाइल गेम कोरियन लव गेम का नाम सामने आ रहा है वो क्या है और कैसे उस पर गेम खिलाया जाता है और ये कितना खतरनाक है।
सबसे पहले जानें कैसे हुई बच्चियों की मौत और कहां हुई घटना
ये घटना गाजियाबाद के टीलामोड़ थानाक्षेत्र इलाके में मंगलवार देर रात करीब दो बजे घटी, जब तीनों बहनों ने एक अपार्टमेंट की नौवीं मंजिल के फ्लैट से कूदकर अपनी जान दे दी। रात में जिस समय उन्होंने ऐसा कदम उठाया उस वक्त उनके परिजन दूसरे कमरे में सो रहे थे। टीलामोड़ में हुई इस घटना में मृतक बच्चियों की उम्र 12, 14 और 16 साल बताई जा रही है, उनके नाम निशिका प्राची और पाखी हैं।
घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की छान-बीन शुरू हुई। पुलिस ने फिर उनके परिजनों और आस पास रहने वाले लोगों से पूछताछ शुरू की। एसीपी शालीमार गार्डन अतुल सिंह ने मामले में अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमें रात में सवा दो के करीब इस मामले की जानकारी मिली। जिसके बाद हम मौके पर पहुंचे। इसके बाद तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
ऐसे सामने आई आत्महत्या की बात
उन्होंने बताया कि जब घटनास्थल और बच्चियों के कमरे की तलाशी ली गई तो उन्हें आठ पन्ने का एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें बच्चियों की लिखावट में सुसाइड की बात लिखी है। बच्चियों ने लिखा था, 'इसमें जो कुछ लिखा गया है वो सब पढ़ लीजिए क्योंकि ये सच है। सुसाइड नोट में बच्चियों ने अपने पापा से सॉरी भी बोला। इसके अवाला इसमें एक इमोजी भी बनाया गया है, जिसमें एक लड़की को रोते हुए दिखाया गया है। एसीपी शालीमार गार्डन अतुल सिंह ने मामले में बताया है कि फिलहाल परिवार के मोबाइल फोन व अन्य डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
मामले में कोरियाई गेम की बात कैसे आई?
एसीपी अतुल कुमार सिंह द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस मामले की शुरुआती जांच में लोगों ने बताया है कि तीनों बच्चियों को एक कोरियन टास्क देने वाले 'लव गेम' को खेलने की आदत थी। तीनों को कोरोना महामारी के दौरान इस गेम की आदत लग गई थी। तीनों बहनें एक साथ ही इसे खेलती थीं। इसके बाद उन्हें इसकी ऐसी लत लगी कि वे सभी काम एक साथ करने लगीं, चाहें खाना पीना और सोना हो या स्कूल जाना। इतना ही नहीं वे नहाती तक साथ ही थीं। शुरू में तो घरवालों ने इस पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन फिर बाद में घरवालों ने इस पर ध्यान देना शुरू किया। हाल-फिलहाल उनके परिजनों ने सारा दिन मोबाइल पर एक्टिव रहने को लेकर उन्हें ड़ांटा भी था। आस पास के लोगों ने भी उनकी इस लत के बारे में बताया है। उन लोगों ने कहा कि वे बच्चियां जहां देखो मोबाइल पर ही एक्टिव मिलती थीं और वो भी ये गेम खेलते हुए। हालांकि पुलिस ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है कि सुसाइड की मुख्य वजह यह गेम है, इस बारे में अभी जांच की जा रही है जांच के बाद ही यह पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेगा।
दो साल से स्कूल नहीं जा रहीं थी तीनों बच्चियां
मोबाइल गेमिंग की लत का असर तीनों किशोरियों की पढ़ाई पर गहराई से पड़ा था। हालात ऐसे हो गए थे कि वे पिछले दो साल से स्कूल जाना पूरी तरह छोड़ चुकी थीं, जबकि उससे पहले भी उनका शैक्षणिक प्रदर्शन लगातार कमजोर होता जा रहा था।
खुद को कोरियन प्रिंसेज समझने लगी थीं तीनों बहनें
पीटीआई समाचार एजेंसी के अनुसार, दोनों बहनें लगभग दो से तीन साल से कोरियाई इंटरैक्टिव 'लव गेम' की आदी थीं और अपना अधिकांश समय गेम खेलने में बिताती थीं। उनके माता-पिता ने हाल ही में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की कोशिश की थी, जिससे शायद उन्हें परेशानी हुई हो। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि लड़कियों के पिता ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि गेम में टास्क भी शामिल हैं और पुलिस द्वारा फोन की जांच के बाद ही उन्हें इसके बारे में पता चला। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बेटियां अक्सर कोरिया जाने की इच्छा जताती थीं। पिता के मुताबिक, बेटियों ने उनसे साफ शब्दों में कहा था कि वे कोरिया को छोड़ने के बारे में सोच भी नहीं सकतीं और वही उनकी पूरी दुनिया है। पिता के मुताबिक, लड़कियों ने उनसे साफ कहा था, 'पापा, हम इसे नहीं छोड़ सकते। यही हमारी जिंदगी है और हमारे लिए सब कुछ वही है।' सुसाइड नोट से यह भी पता चला है कि वो खुद को कोरियन प्रिंसेज समझने लगी थीं।
क्या है कोरियन लव गेम जो प्यार नहीं मौत की ओर ले जाता है
ऐसे में यह समझना जरूरी है कि ये कौन सा गेम है जिसके कारण इन बच्चियों ने मौत को गले लगा लिया। बता दें कि यह कोई आम ऑनलाइन गेम नहीं है, जिसे मनोरंजन के लिए खेला जाए। इसे एक चैट-आधारित साइकोलॉजिकल ट्रैप कहा जा सकता है। इसमें स्क्रीन के दूसरी ओर बैठा वर्चुअल व्यक्ति खुद को कोरियाई युवक या युवती बताकर बातचीत की शुरुआत करता है। धीरे-धीरे बातचीत के जरिए भरोसे, अपनापन और फिर भावनात्मक लगाव में बदल जाती है।
इस गेम की पूरी रणनीति आज के युवाओं में बढ़ती कोरियन कल्चर, कोरियन-पॉप और कोरियन-ड्रामा की दीवानगी पर टिकी होती है। सामने वाला वर्चुअल किरदार कोरियन अंदाज में प्यार भरी बातें करता है, रोमांटिक मैसेज भेजता है और खुद को बेहद केयरिंग पार्टनर के रूप में पेश करता है। कुछ ही दिनों में यूजर को यह महसूस होने लगता है कि वह किसी खास रिश्ते में बंध चुका है।
प्यार साबित करने के नाम पर शुरू होते हैं ‘टास्क’
जैसे-जैसे इसे खेलने वाला काफी टाइम दे चुका होता है , वैसे-वैसे गेम में तथाकथित 'लव टास्क' आने लगते हैं। शुरू में तो ये टास्क बेहद मामूली होते हैं, जैसे देर रात तक जागना, किसी से दूरी बनाना। लेकिन फिर धीरे-धीरे यही टास्क खतरनाक मोड़ ले लेते हैं। कुछ समय बाद यूजर से खुद को नुकसान पहुंचाने, दर्द सहने या जोखिम भरे काम करने को कहा जाता है।
चाहे भी तो यूजर गेम से बाहर क्यों नहीं निकल पाता?
इस गेम की सबसे खतरनाक बात है भावनात्मक रूप से यूजर को कमजोर कर देना और ब्लैकमेल करना। अगर यूजर कोई टास्क पूरा करने से मना कर देता है तो उसे यह डर दिखाया जाता है कि अगर उसने टास्क पूरे नहीं किए, तो उसका वर्चुअल पार्टनर उसे छोड़ देगा या खुद को नुकसान पहुंचा लेगा।
कुख्यात ‘ब्लू व्हेल’ से हो रही तुलना
चौंकाने वाली बात यह है कि यह गेम किसी भी आधिकारिक ऐप स्टोर पर मौजूद नहीं है। इसके बावजूद लोग इसे ऑनलाइन खेल रहे हैं। यह गेम अलग-अलग वेबसाइट्स, छिपे हुए लिंक्स और कथित तौर पर टेलीग्राम व व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए फैलाया जा रहा है। पुलिस जांच में यह आशंका भी जताई गई है कि इस गेम का मकसद कुख्यात ‘ब्लू व्हेल गेम’ जैसा ही हो सकता है, जिसमें खिलाड़ियों को एक के बाद एक 50 टास्क दिए जाते थे और आखिरी टास्क के रूप में आत्महत्या करने को कहा जाता था। उस खतरनाक गेम को सरकार ने साल 2017 में प्रतिबंधित कर दिया था।
इस मामले में फिलहाल पुलिस मोबाइल की फॉरेंसिक जांच कर रही है ताकि गेम का असली नाम, टास्क की संख्या और नेटवर्क की पूरी कड़ी सामने लाई जा सके।