Times Now Navbharat
live-tv
Premium

क्या है भारतीय सेना की IBJ, स्ट्राइक कोर से कितनी है अलग? आखिर क्यों पड़ी इसकी जरूरत

चीन सीमा पर भारी भरकम ऑर्टिलरी और ऑर्मर्ड की तैनाती और उनके साथ अभियान चलाना आसान नहीं है। 16-17 हजार फीट की ऊंचाई पर टी-90 जैसे भारी भरकम टैंक की तैनाती और उनका संचालन चुनौतीपूर्ण है। यानी इतनी ऊंचाई पर युद्ध के सभी साजो-सामान, तकनीक से लेकर हथियार सभी हल्के चाहिए।

Image
आईबीजी में होंगे 5 हजार जवान। तस्वीर-X/@ADGPI
Written by: Alok Rao
Updated Jul 7, 2026, 16:38 IST

Integrated Battle Group : रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान-अमेरिका, इजराइल जंग और ऑपरेशन सिंदूर ने युद्ध और संघर्ष के नए रूप दिखाए हैं। इन सभी संघर्षों और टकरावों में एक बात जो बिल्कुल उभरकर सामने आई है, वह यह कि दुश्मन को दूर से निशाना बनाने और उसके हमलों से खुद को बचाने की क्षमता जिसके पास जितनी ज्यादा होगी युद्ध में उसकी उतना ही बढ़त रहेगी। ये सभी युद्ध और संघर्ष हवाई हमलों की प्रमुखता वाले रहे। हवाई हमलों की प्रमुखता वाले इसलिए क्योंकि यूक्रेन पर रूस के शुरुआती हमले जमीन यानी इन्फैंट्री के जरिए हुए लेकिन बाद में यह युद्ध ड्रोन और मिसाइल हमलों में तब्दील हो गया। ईरान-अमेरिका, इजराइल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर पूरा हवाई हमलों पर केंद्रित रहा है लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि पारंपरिक युद्ध (Conventional War) की प्रासंगिकता नहीं रह गई है। इसकी अहमियत बनी रहेगी।

लगातार सुधार के दौर से गुजर रही सेना

आधुनिक रणकौशल को देखते हुए भारतीय सेना लगातार सुधार के दौर से गुजर रही है। सुधार की यह प्रक्रिया सेना के तीनों अंगों इन्फैंट्री, वायु सेना और नौसेना में चल रही है। आधुनिक युद्ध का स्वरूप कैसा हौगा और यह किस तरह से लड़े जाएंगे। इसे देखते हुए सेना अद्यतन तकनीक, नए हथियार, प्रशिक्षित सैनिकों से लैस नए-नए बैटलग्रुप खड़ी कर रही है। इसी क्रम में सेना ने पांच नए इंटिग्रेटेड बैटल ग्रुप (IGB) और एक फायर सपोर्ट ग्रुप खड़े किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक एक आईबीजी में करीब 5 हजार सैनिक होंगे और इसकी कमान मेजर जनरल रैंक के अधिकारी के पास होगी। यह आईजीबी ज्यादा तेज गति से अभियान चलाने वाला, हथियारों के लिहाज से ज्यादा हल्का और ज्यादा प्रभावी परिणाम देने वाला होगा।

ऊंचाई पर चाहिए फुर्तीली फोर्स

भारत के दो तरफ उत्तर और पश्चिम में चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन हैं। इन दोनों इलाकों में भारत की सीमा लगती है। कश्मीर और जम्मू के ऊपरी क्षेत्रों को यदि छोड़ दें तो पाकिस्तान से लगने वाली सीमा समतल और मैदानी है। जबकि भारत-चीन की सीमा पर्वतीय और दुर्गम है। खासतौर से चीन सीमा पर भारी भरकम ऑर्टिलरी और ऑर्मर्ड की तैनाती और उनके साथ अभियान चलाना आसान नहीं है। 16-17 हजार फीट की ऊंचाई पर टी-90 जैसे भारी भरकम टैंक की तैनाती और उनका संचालन चुनौतीपूर्ण है। यानी इतनी ऊंचाई पर युद्ध के सभी साजो-सामान, तकनीक से लेकर हथियार सभी हल्के चाहिए। इसे ध्यान में रखते हुए आईबीजी का गठन हुआ है। जरूरत पड़ने पर ये हल्के आईबीजी तेजी से अपने अभियान की तरफ बढ़ेंगे। यानी शॉर्ट नोटिस पर आईबीजी अपने मिशन के लिए तैयार होगा।

IBG

IBG

17 माउंटेन स्ट्राइक कोर के तहत हुआ गठन

अभी आईबीजी को 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर के तहत एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। यह अपने आप में एक स्वतंत्र और पूर्ण सैन्य ढांचा होगा। इसमें इन्फ्रैंट्री, मेकनाइज्ड फोर्स, ऑर्मर, ऑर्टिलरी, इंजीनियर, एयर डिफेंस, सिग्नल और लॉजिस्टिक यानी फौज की वे सभी इकाइयां एक जगह होंगी जिनकी जरूरत युद्ध के दौरान पड़ती है। अभी तक युद्ध और संकट का सामना करने के लिए सेना की इन सभी इकाइयों को समन्वित करना पड़ता है और इसमें समय लगता है लेकिन अब एक कमांडर के पास ये सभी इकाइयां होने पर अभियान या मिशन चलाने के लिए जरूरी हथियारों, उपकरणों को जुटाना नहीं पड़ेगा। कमांडर का आदेश मिलने पर IBG तुरंत अपने मिशन को अंजाम देने के लिए तत्पर रहेगा।

चीफ ऑपरेशन ऑफिसर COO का नया पद सृजित

भारतीय सेना ने सैन्य सुधारों के तहत चीफ ऑपरेशन ऑफिसर COO का नया पद बनाया है। इस पद की कमान ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी के पास होगी। इस अधिकारी ऑपरेशन की योजना, खुफिया जानकारी (इंटेलिजेंस), लॉजिस्टिक्स, फायरपावर और युद्ध क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई का समन्वय देखेगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि डिवीजन के कमांडिंग मेजर जनरल रोजमर्रा के ऑपरेशनल समन्वय से मुक्त होकर व्यापक रणनीतिक और सैन्य निर्णयों पर अधिक ध्यान दे सकें। इस मॉडल के तहत फील्ड कमांडरों को अधिक अधिकार दिए जाएंगे। कमांड चेन को छोटा किया जाएगा। कम समय में सैनिकों और हथियारों की तैनाती संभव होगी। बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुसार तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।

फायर सपोर्ट ग्रुप से बढ़ेगी सटीक मारक क्षमता

सेना ने FSG का भी गठन किया है। इस नई इकाई के तहत निम्न क्षमताओं को एक ही कमांडर के अधीन लाया जाएगा-
  • लंबी दूरी की तोपें
  • रॉकेट सिस्टम
  • प्रिसिजन स्ट्राइक हथियार
  • निगरानी और सर्विलांस सिस्टम
IBG

IBG

शक्तिशाली फायर सपोर्ट देगा FSG

इसका उद्देश्य IBG को एकीकृत और शक्तिशाली फायर सपोर्ट उपलब्ध कराना है, जिससे दुश्मन के ठिकानों पर अधिक सटीक और प्रभावी हमला किया जा सके। कुल मिलाकर IBG और फायर सपोर्ट ग्रुप का गठन भारतीय सेना के व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका लक्ष्य सेना को अधिक फुर्तीली, आधुनिक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाना है। इसी मकसद को ध्यान में रखते हुए अधिक चुस्त और लचीले सैन्य गठन तैयार किए जा रहे हैं और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर संयुक्त संचालनपर जोर दिया जा रहा है। इन सैन्य इकाइयों में ड्रोन का व्यापक उपयोग बढ़ाने के साथ-साथ नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर क्षमताओं का विस्तार किया जा रहा है। भारतीय सेना का मानना है कि IBG और FSG, नई तकनीकों का समावेश और संगठनात्मक सुधार मिलकर सेना को भविष्य के युद्धों के लिए अधिक सक्षम, तेज और घातक बनाएंगे।

भारतीय सेना में 4 स्ट्राइक कोर

भारतीय सेना में चार स्ट्राइक कोर हैं और प्रत्येक कोर में 50 हजार से लेकर 70 हजार जवान हैं। यह एक आक्रामक सैन्य संरचना है जिसमें बड़ी संख्या में पैदल सेना, बख्तरबंद (टैंक) रेजिमेंट, तोपखाना, इंजीनियर और वायु रक्षा इकाइयां शामिल हैं। इसे युद्ध के दौरान दुश्मन के क्षेत्र में तेज और गहराई तक हमला करने के लिए तैयार किया गया है। स्ट्राइक कोर का मुख्य उद्देश्य दुश्मन की रक्षा पंक्तियों को तोड़ना, रणनीतिक क्षेत्रों पर कब्जा करना और निर्णायक बढ़त हासिल करना है। भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक कोर मुख्य रूप से पश्चिमी मोर्चे पर केंद्रित रही हैं, हालांकि बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुसार इनके स्वरूप और तैनाती में लगातार सुधार किए जा रहे हैं।

End of Article