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बांग्लादेश संसदीय चुनाव में कौन सी हैं चुनौतियां, चुनाव आयोग को करने होंगे क्या-क्या उपाय

बांग्लादेश में अवामी लीग, बीएनपी और जमात ए इस्लामी बड़ी पार्टियां हैं। इसमें से हसीना की अवामी लीग पर प्रतिबंध लग चुका है। उस पर चुनावी गतिविधियां करने पर प्रतिबंध लग चुका है। उस पर से यदि प्रतिबंध नहीं हटता है तो वह चुनाव नहीं लड़ पाएगी। चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीयन रद्द कर दिया है। हालांकि, शेख हसीना की पार्टी पहले ही चुनाव कार्यक्रम खारिज कर चुकी है।

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बाग्लादेश में 12 फरवरी को होंगे आम चुनाव। तस्वीर-AP

Photo : AP

Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में आम चुनाव की घोषणा होने के बाद राजनीतिक हलचल काफी बढ़ गई है। बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने कहा है कि देश में आम चुनाव 12 फरवरी को कराए जाएंगे और इसी दिन 'जुलाई चार्टर' के अनुरूप जनमत संग्रह भी होगा। जनमंत संग्रह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ जुलाई 2024 के आंदोलन के बाद हुए सुधारों पर होगा। यानी कि बांग्लादेश के नागरिक 12 फरवरी को दो बार मतदान करेंगे। यह चुनाव बांग्लादेश के भविष्य के लिहाज काफी महत्वपूर्ण हैं। यह चुनाव ऐसे समय होगा जब देश की दोनों बड़ी पार्टियां अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा हुआ है जबकि पूर्व पीएम शेख हसीना वेंटीलेटर पर हैं। इस बीच, चुनाव की घोषणा होने के बाद बांग्लादेश में हिंसा का दौर भी शुरू हो गया है। ऐसे में बांग्लादेश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस और चुनाव आयोग के समक्ष चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराने की बड़ी चुनौती है।

बांग्लादेश में अभी क्या है राजनीतिक स्थिति

बांग्लादेश में अवामी लीग, बीएनपी और जमात ए इस्लामी बड़ी पार्टियां हैं। इसमें से हसीना की अवामी लीग पर प्रतिबंध लग चुका है। उस पर चुनावी गतिविधियां करने पर प्रतिबंध लग चुका है। उस पर से यदि प्रतिबंध नहीं हटता है तो वह चुनाव नहीं लड़ पाएगी। चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीयन रद्द कर दिया है। हालांकि, शेख हसीना की पार्टी पहले ही चुनाव कार्यक्रम खारिज कर चुकी है। चुनावी परिदृश्य में अवामी लीग के नहीं होने पर सबसे बड़ी पार्टी बीएनपी होगी लेकिन खालिदा जिया की तबीयत और उनके सक्रिय न होने से उनकी पार्टी लोगों को अपनी तरफ कितना आकर्षित कर पाएगी, यह बड़ा सवाल है। चुनाव में बांग्लादेश की तीसरी सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी जमात ए इस्लामी पूरा दम खम लगा रही है। जमात देश में उपजे राजनीतिक संकट को अपने लिए एक अवसर के रूप में देख रही है। वह अवामी लीग की अनुपस्थिति एवं बीएनपी की कमजोरी का भरपूर फायदा उठाना चाहती है। जाहिर है कि तीसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उसे इस चुनाव में फायदा पहुंच सकता है।

नफा-नुकसान देख गठबंधन कर रहे दल

इन तीन पार्टियों के अलावा बांग्लादेश में नए गठबंधनों एवं दलों को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता। शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन चलाने वाला छात्रों का गठबंधन नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) भी चुनाव में उतर रहा है। ये सभी पार्टियां अपने चुनावी नफा-नुकसान का आकलन करते हुए सियासी फायदे के लिए गठबंधन कर रही हैं। ऐसे राजनीतिक हालात में बांग्लादेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने की है। यहां के चुनावों में हिंसा आम बात है। पिछले चुनाव में भी काफी हिंसा देखने को मिली। चुनाव शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष हों यह चुनौती तो है ही, चुनाव को विश्वसनीय और समावेशी बनाना भी चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती है। बांग्लादेश के इस चुनाव पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी करीबी नजर होगी। भारत पहले ही एक स्वतंत्र, निष्पक्ष, हिंसा मुक्त, समावेशी एवं विश्वसनीय चुनाव की मांग कर चुका है।

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बांग्लादेश में शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव कराना एक चुनौती है। तस्वीर-AP

एक दिन में दो बार वोटिंग कराने की चुनौती

बांग्लादेश में एक ही दिन संसदीय चुनाव और जनमत संग्रह के लिए वोटिंग होगी और दोनों चुनाव में अल-अलग रंग के मतपत्रों का इस्तेमाल होगा। रिपोर्टों के मुताबिक आम चुनाव के लिए सफेद कागज पर काले रंग से छपे मतपत्रों और जनमत संग्रह के लिए रंगीन मतपत्रों का उपयोग किया जाएगा। ढाका में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में, मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने खुद कहा कि राष्ट्रीय चुनाव और जनमत संग्रह को एक ही दिन आयोजित करने के लिए चुनाव आयोग को कई अतिरिक्त काम करने होंगे। बताया जा रहा है कि इस चुनाव में करीब 80 प्रतिशत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिसका मतलब है कि लगभग 10 करोड़ मतदाता मतदान कर सकते हैं।

कानून-व्यवस्था बनाए रखना होगा

रिपोर्टों के अनुसार चुनाव के दौरान कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए तीनों बलों के करीब एक लाख सदस्य मौक़े पर तैनात रहेंगे। इनमें से 90 हजार थल सेना के जवान, 2,500 नौसेना के जवान और 1,500 वायु सेना के जवान तैनात किए जाएंगे। चुनाव आयोग ने कहा है कि कार्यक्रम की घोषणा के बाद, मोबाइल अदालतों, मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति, चुनावी जांच समितियों की नियुक्ति, न्यायिक मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति, निगरानी प्रकोष्ठों के गठन और कानून एवं व्यवस्था प्रकोष्ठों के गठन जैसे मुद्दों पर लगातार सर्कुलर जारी किए जाएंगे।

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अवामी लीग फिलहाल चुनाव नहीं लड़ पाएगी। तस्वीर-AP

चुनाव की घोषणा होते ही बांग्लादेश में हिंसा का दौर शुरू हो गया है। शेख हसीना के खिलाफ चले आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले उस्मान हैदर की शुक्रवार को गोली मार दी गई। उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जाता हैदर ढाका-8 निर्वाचन क्षेत्र से संभावित निर्दलीय उम्मीदवार हैं। एक्सपर्ट्स की आशंका है कि चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आएगी, वैसे-वैसे बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा जोर पकड़ेगी।

17 साल बाद वापस लौट रहे तारिक रहमान

बीएनपी ने शुक्रवार को घोषणा की कि गंभीर रूप से बीमार पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटेंगे। वह पिछले 17 वर्षों से लंदन में स्वनिर्वासन में रह रहे हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब इसकी 80 वर्षीय अध्यक्ष जिया की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ गई और बृहस्पतिवार को उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने पार्टी की नीति-निर्माण स्थायी समिति की बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, ‘हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हमारे कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान 25 दिसंबर को ढाका लौटेंगे।’ आलमगीर ने कहा, 'पार्टी उनका स्वागत करती है।' स्वनिर्वासित 60 वर्षीय रहमान 2008 से लंदन में रह रहे हैं।

आलोक कुमार राव
आलोक कुमार राव author

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारो... और देखें

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