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चीन-ब्रिटेन के बीच किन-किन क्षेत्रों में हुआ समझौता, स्ट्रार्मर की बीजिंग यात्रा से क्यों चिढ़े ट्रंप

ट्रंप के तेवरों, धमकियों और कोई नियम-कानून नहीं मानने की जिद और धौंस ने पश्चिम देशों को डरा दिया है। वे अब ट्रंप पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी सहित यूरोपीय देशों को लग गया है कि कारोबार और अपनी सुरक्षा के लिए अब अमेरिका पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसकी व्यवस्था उन्हें खुद करनी होगी। ट्रंप से डरे ये देश एक-एक कर उनसे दूर जा रहे हैं।

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Photo : AP
चार दिनों की यात्रा पर चीन आए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर।
  • Agency by: Agency
  • Updated Jan 30, 2026, 03:02 PM IST

China Britain Trade Deal : यूरोप के देश एक-एक कर चीन के करीब जा रहे हैं और उसके साथ बड़ी-बड़ी ट्रेड डील कर रहे हैं। कनाडा यूरोपीय देश तो नहीं, लेकिन ट्रंप का 'सताया' हुआ जरूर है। इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी EV कारों के निर्माण में उसने चीन के साथ बड़ी डील की है। यही नहीं दोनों देश अपना आपसी सहयोग रणनीतिक भागीदारी तक ले जाने पर सहमत हुए हैं। अब यूरोप का बड़ा देश और अमेरिका का करीबी सहयोगी ब्रिटेन चीन की शरण में है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर एक-दो नहीं बल्कि चार दिनों की यात्रा पर बीजिंग पहुंचे हैं। यहां उनका खूब स्वागत हुआ। दोनों देशों के बीच वीजा फ्री यात्रा, दवा सेक्टर में निवेश सहित कई अहम डील हुए हैं। चीन के साथ ब्रिटेन अपने रिश्तों में गर्माहट ला रहा है। जाहिर है कि ब्रिटेन का चीन के करीब जाना ट्रंप को पसंद नहीं आया है। स्टार्मर की इस यात्रा पर ट्रंप ने कहा कि चीन के साथ कारोबार करना ब्रिटेन के लिए 'बहुत खतरनाक' है।

ट्रंप पर अब भरोसा नहीं कर पा रहे पश्चिमी देश

दरअसल, ट्रंप के तेवरों, धमकियों और कोई नियम-कानून नहीं मानने की जिद और धौंस ने पश्चिम देशों को डरा दिया है। वे अब ट्रंप पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी सहित यूरोपीय देशों को लग गया है कि कारोबार और अपनी सुरक्षा के लिए अब अमेरिका पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसकी व्यवस्था उन्हें खुद करनी होगी। ट्रंप से डरे ये देश एक-एक कर उनसे दूर जा रहे हैं। इनमें कनाडा और ब्रिटेन तो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही यूएस के बेहद करीब रहे। ये दोनों देश 'आंख मूंदकर' अमेरिका पर भरोसा करते आ रहे थे। यानी अमेरिका का कुछ कहना उनके लिए 'बड़े भाई' का आदेश जैसा था। दुनिया भर में अमेरिका के सैन्य अभियानों एवं मिशनों में नाटो के इन देशों ने अपना खून-पसीना बहाया, अमेरिका के साथ खड़े रहे, लेकिन ट्रंप ने इस दोस्ती और करीबी की परवाह नहीं की। ट्रंप की नजर में दोस्ती और नाटो जैसे रक्षा संबंधों की कोई अहमियत नहीं है। वह सभी चीजें को कारोबार और अमेरिकी फायदे की नजर से देख रहे हैं।

31 जनवरी तक चीन की यात्रा पर हैं स्टार्मर

ट्रंप के इस रुख के बाद अमेरिका के सयहोगी और दोस्त सतर्क हो गए हैं। अपनी सुरक्षा और कारोबार के लिए नए पार्टनर की तलाश में हैं। इसी कड़ी में स्टार्मर बीजिंग पहुंचे। चार दिनों की उनकी इस यात्रा का समापन 31 जनवरी को होगा। बीते करीब एक दशक में ब्रिटेन के किसी प्रधानमंत्री की यह पहली चीन यात्रा है। स्टार्मर से पहले 2018 में पीएम थेरेसा मे बीजिंग आई थीं। ब्रिटेन अब चीन के साथ अपने संबंधों को मजबूत बना रहा है। स्टार्मर की यात्रा से करीब एक सप्ताह पहले ब्रिटेन ने लंदन में एक भव्य चीनी दूतावास खोलने की इजाजत दे दी। दूतावास खोलने के मसले को ब्रिटेन सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर लटकाता आ रहा था लेकिन संबंध मधुर बनाने के लिए उसने इसके लिए भी हामी भर दी।

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करीब एक दशक बाद ब्रिटेन के किसी पीएम की चीन यात्रा।

ब्रिटेन के बड़ी कंपनियों के CEOs भी साथ

स्टार्मर की इस चीन यात्रा की खास बात यह है कि वह अपनी सरकार के कुछ एक मंत्रियों के साथ नहीं बल्कि अपनी कैबिनेट के भारी-भरकम और सीनियर सदस्यों के साथ गए हैं। उनके साथ HSBC, ब्रिटिश एयरवेज, एस्ट्राजेनेका एवं जीएसके जैसी दिग्गज कंपनियों के सीईओ भी हैं। इन सबकी चीनी कंपनियों के साथ बातचीत हो रही है। जाहिर है कि चीन-ब्रिटेन में होने वाली कारोबारी डील ट्रंप को पसंद नहीं आएगी। बीजिंग में स्टार्मर की मुलाकात करीब डेढ़ घंटे तक राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ चली। वह प्रधानमंत्री ली क्यांग और नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के चेयरमैन से भी मिलेंगे।

2020 में दोनों देशों के रिश्तों में आई कटुता

हाल के वर्षों में ब्रिटेन और चीन के रिश्ते सामान्य नहीं देखा जाता था। खासकर 2020 में बीजिंग द्वारा हांगकांग में एक व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू किए जाने के बाद दोनों देशों के रिश्ते में कड़वाहट आ गई। इसके बाद से दोनों देशों के बीच जासूसी के आरोप-प्रत्यारोप के साथ रिश्ते और बिगड़ते गए। हालांकि, लेबर नेता कीर स्टारमर ने सोमवार को द टेलीग्राफ अखबार की उस रिपोर्ट के बाद चीनी जासूसी के नए दावों को तुरंत खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि चीन ने कई वर्षों तक डाउनिंग स्ट्रीट के वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल फोन हैक किए थे।

वीजा मुक्त यात्रा कर सकेंगे ब्रिटेन के नागरिक

नेताओं ने घोषणा की कि चीन की यात्रा करने वाले ब्रिटिश नागरिक चाहे व्यवसाय के लिए हों या पर्यटन के लिए, यात्रा की उनकी अवधि यदि एक महीने से कम है तो उन्हें वीजा की जरूरत नहीं होगी। फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया के नागरिक पहले से ही यह सुविधा प्राप्त करते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह समझौता कब से लागू होगा। ब्रिटिश सरकार ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि यह जल्दी लागू होगा। बीबीसी के अनुसार स्टारमर ने कहा, 'दुनिया की आर्थिक महाशक्तियों में से एक होने के नाते, कारोबार लंबे समय से चीन में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के तरीकों की मांग कर रहे हैं। हम इसे आसान बनाएंगे जिसमें अल्पकालिक यात्रा के लिए वीजा नियमों में ढील शामिल है ताकि वे विदेशों में विस्तार कर सकें, और साथ ही देश में विकास और रोजगार को बढ़ावा मिले।'

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चीन और ब्रिटेन के बीच हुए कई समझौते।

चीन में 15 अरब डॉलर का निवेश करेगी एस्ट्राजेनेका

इस बीच, दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने अगले चार वर्षों में चीन में अनुसंधान और विकास के लिए 15 अरब डॉलर (₹1.38 लाख करोड़) के निवेश की घोषणा की है। एस्ट्राजेनेका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पास्कल सोरियोट, स्टारमर के साथ गए प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं। ब्लूमबर्ग के हवाले से सोरियोट ने कहा कि यह पहल 'चीन और वैश्विक स्तर पर मरीजों तक अत्याधुनिक उपचार पहुंचाने' में मदद करेगी। कंपनी ने बताया कि वह वूशी, ताइझोउ, छिंगदाओ, बीजिंग और शंघाई में सुविधाओं में निवेश करेगी जो अब तक चीन में उसकी सबसे बड़ी निवेश प्रतिबद्धता है। ब्रिटिश सरकार ने दोनों देशों के बीच सेवाओं के व्यापार पर एक समझौते के लिए संयुक्त व्यवस्था की भी घोषणा की।

ब्रिटेन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है चीन

2025 के मध्य तक के 12 महीनों में, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चीन ब्रिटेन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था, और कुल व्यापार लगभग 137 अरब डॉलर (₹12.59 लाख करोड़) का रहा। हालांकि, यूके सरकार के आंकड़े दिखाते हैं कि लंदन का बीजिंग के साथ 58 अरब डॉलर (₹5.33 लाख करोड़) का भारी व्यापार घाटा है। यह घाटा 2017 में लगभग 23 अरब डॉलर (₹2.11 लाख करोड़) था। चीन ब्रिटेन में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) का मात्र 0.2 प्रतिशत हिस्सा रखता है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका का हिस्सा लगभग एक-तिहाई है। साथ ही, चीन के साथ वस्तुओं और सेवाओं में ब्रिटेन की बाजार हिस्सेदारी पिछले वर्ष घट गई। डाउनिंग स्ट्रीट ने यूके और चीन के बीच हस्ताक्षरित कई समझौतों की भी घोषणा की-

  • अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और अवैध आव्रजन पर सहयोग
  • द्विपक्षीय सेवा साझेदारी की स्थापना
  • अनुरूपता आकलन के क्षेत्र में सहयोग
  • यूके से चीन को निर्यात
  • यूके-चीन संयुक्त आर्थिक और व्यापार आयोग के कार्य को सुदृढ़ करना
  • घरेलू सेवाओं और खेल उद्योगों में सहयोग
  • तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा व प्रशिक्षण में सहयोग
  • खाद्य सुरक्षा, पशु एवं पादप संगरोध पर सहयोग
  • स्वास्थ्य सहयोग

समझौतों के विवरण सामने नहीं आए

चीन और ब्रिटेन के बीच हुए इन समझौतों का विवरण नहीं दिया गया है, इसलिए इन समझौतों को लेकर एक्सपर्ट सवाल भी कर रहे हैं। बीबीसी की उप अर्थशास्त्र संपादक धार्शिनी डेविड का कहना है कि किसी भी तरह के समझौते संभवतः छोटे-मोटे और सीमित होंगे। उन्होंने कहा, 'आर्थिक दृष्टि से यह कोई गेम-चेंजर नहीं होगा, और यह आंशिक रूप से जानबूझकर किया गया है, सिर्फ उच्च-जोखिम वाले व्यापारिक साझेदार को लेकर सावधानी के कारण ही नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित प्रतिक्रिया के कारण भी।' लंदन स्थित थिंक टैंक चाइना स्ट्रैटेजिक रिस्क्स इंस्टीट्यूट के नीति निदेशक सैम गुडमैन ने कहा कि बीजिंग के साथ संबंध सुधारने की कोशिशों से अब तक ब्रिटेन को बहुत कम आर्थिक लाभ मिला है, और वह संयुक्त राज्य अमेरिका पर अपनी आर्थिक निर्भरता की भरपाई करने में संघर्ष करेगा।

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