US attack on Oil Tankers: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ओमान तट के पास अमेरिका ने जिन तेल टैंकरों को निशाना बनाया, उन सभी पर भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। तेल टैंकरों पर अमेरिकी सेना के हमलों में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। इससे भारत में काफी गुस्सा देखा जा रहा है। हालांकि, इन हमलों और भारतीय नागरिकों के मारे जाने पर विदेश मंत्रालय की ओर से बयान भी जारी हुआ है लेकिन ये बयान नाकाफी माने जा रहे हैं। लोग भारत सरकार से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देखना चाहते हैं। अलग-अलग देशों के ध्वज वाले तेल टैंकरों पर हमले की जिम्मेदारी अमेरिका का सेंट्रल कमांड ले चुका है। सेंट्रल कमांड ने माना है कि इन तेल टैंकरों पर उसने हमले किए लेकिन शुक्रवार को इसमें नया मोड़ आ गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन भारतीयों नागरिकों की मौत के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि ईरान के ड्रोन हमलों में भारतीय नागरिकों की जान गई। हालांकि, ट्रंप के इस दावे को खारिज ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। तेल टैंकर पर हमलों पर ट्रंप के दावे और ईरान के रुख के बाद बहस शुरू हो गई है कि आखिर कौन सच बोल रहा है।
भारतीय क्रू वाले जहाजों पर कब-कब हुए हमले
8 जून - MT मैरिवेक्स
24 भारतीयों को बचाया
10 जून- MT सेत्तेबेलो
3 भारतीयों की मौत
21 का रेस्क्यू
11 जून- MT जलवीर
20 भारतीयों को बचाया
चालक दल सदस्य वाले पहले तेल टैंकर पर हमला बीते 8 जून यानी सोमवार को हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी सेना ने तेल टैंकर मैरिवेक्स को निशाना बनाकर हमले किए। इस ऑयल टैंकर पर पलाउ देश का झंडा लगा था। अमेरिकी सेना का कहना है कि तेल टैंकर जब ओमान के तट के करीब था तो उसने उसके निर्देशों का अनुपालन करने से मना कर दिया और वहां से बचकर निकलने की कोशिश में था। सेंटकाम के हमले में इस तेल टैंकर को नुकसान पहुंचा लेकिन इस पर सवार सभी 24 भारतीय क्रू को ओमान की सेना ने वहां से सुरक्षित निकाल लिया।
MT सेत्तेबेलो पर 10 जून को हुआ हमला
भारतीय क्रू वाले दूसरे जहाज MT सेत्तेबेलो पर हमला बीते 10 जून को यानी बुधवार को हुआ। सेत्तेबेलो पर भी पलाउ का ध्वज लगा था। इस टैंकर पर 24 भारतीय सवार थे। इस टैंकर पर हुए हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हुई जबकि 21 को बचा लिया गया। इस हमले में केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि तीन शवों को जल्द भारत लाया जाएगा। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक सेत्तेबेलो को चलाने वाले ऑपरेटर आईओएस मरीन ने अपने एक बयान में कहा कि जहाज का ईरान और उसके तेल से कोई संबंध नहीं था। बृहस्पतिवार को 20 भारतीय को ले जा रहे गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले जहाज 'जलवीर’ पर भी अमेरिकी नौसेना ने हमला किया। इन हमलों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि 'सेटेबेलो’, 'मैरीवेक्स’ और 'जलवीर’ पर हमले ’अमेरिकी नौसेना की ओर से किए गए ।’ जहाज जलवीर पर सवार सभी 20 भारतीयों को बचा लिया गया।
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा-3 तेल टैंकरों पर किए हमले
विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान है कि तेल टैंकरों पर हमले अमेरिका ने किया और अमेरिका का सेंट्रल कमांड भी इसकी पुष्टि करता है। सेंटकॉम ने कहा कि 'अमेरिकी सेना 10 जून को करीब 11 बजकर 20 मिनट पर ओमान के तट के करीब गुएना-बिसाउ के झंडे वाले टैंकर एमटी जलवीर पर हमले किए। इस सप्ताह यूएस सेना ने तीसरे वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाया है।' अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड का यह बयान इस बात की पुष्टि करने के लिए काफी है कि भारतीय क्रू वाले जहाजों पर हमले अमेरिका ने किए। भारतीय विदश मंत्रालय ने भी इसी बात को दोहराया है। तो सवाल है कि इन हमलों पर ट्रंप का झूठ बोल रहे हैं, वह इन हमलों से पल्ला झाड़ते हुए ईरान को क्यों जिम्मेदार बता रहे हैं?
जहाज के इंजन पर दो हेलफायर मिसाइलों से किए हमले-CENTCOM
सेंटकॉम ने कहा कि 'उसने उस जहाज पर हमले किए जो ईरान का तेल लेकर गल्फ ऑफ ओमान से निकलने की कोशिश कर रहा था। यह जहाज अमेरिकी सेना के निर्देशों का पालन करने में लगातार असफल हो रहा था। इसे देखते हुए एक अमेरिकी युद्धपोत ने उसके इंजन पर दो हेलफायर मिसाइलों से हमले किए।'
तेल टैंकरों पर हमले पर ट्रंप ने क्या कहा
ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलने वाले भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला करने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को कहा कि यह 'पूरी तरह से अस्वीकार्य’है। ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा, 'कल रात होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ईरान के ड्रोन हमले को पूरी तरह से नाकाम कर दिया गया। यह हरकत पूरी तरह से अस्वीकार्य है।’ ओमान तट के पास भारतीय नागरिकों को ले जा रहे वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी हमलों के विरोध में भारत द्वारा नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के प्रभारी को तलब किए जाने के बाद ट्रंप की ये टिप्पणी आई। भारत ने वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों को 'बेहद चिंताजनक’बताया है और इस मामले को अमेरिका के सामने सख्ती से उठाया।
मारे गए भारतीयों पर ईरान ने जाहिर की शोक-संवेदना
वहीं ट्रंप के इस दावे को ईरान ने खारिज कर दिया। वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी हमलों की आलोचना करते हुए ईरान ने शुक्रवार को कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां 'वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा’हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने शोक संतप्त परिवारों और भारत सरकार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, 'हम हमले में मारे गए भारतीय नाविकों के परिवारों और मित्रों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं।’उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अमेरिका को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया और कहा कि उसका आचरण 'वैश्विक शांति और सुरक्षा को लगातार खतरे में डाल रहा है, साथ ही नौवहन की स्वतंत्रता को भी जोखिम में डाल रहा है।’
अमेरिकी राष्ट्रपति के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद-ईरान
दिल्ली में ईरानी दूतावास ने अपने बयान में कहा कि 'भारतीय जहाज के बारे में ईरान पर अमेरिकी राष्ट्रपति के लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। यह लोगों का ध्यान इस क्रूर सच्चाई से हटाने की कोशिश है कि यूएस ने एक हफ्ते से भी कम समय में 3 भारतीय जहाजों पर हमला किया है और 3 बेगुनाह भारतीय नाविकों को मार डाला है। यह बहुत बुरा है!' जाहिर है कि ईरान ने तीन तेल टैंकरों पर साफ-साफ कह दिया है कि इन हमलों से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
भारत ने दिल्ली में अमेरिकी राजनयिक को तलब किया
भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी जेसन मीक्स को तलब किया और उन्हें बताया कि ओमान के तट के निकट भारतीय चालक दल के सदस्यों वाले वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी सेना के 'घातक और जानलेवा' हमले अस्वीकार्य हैं। भारत ने कहा कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करते हैं। सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा था कि अमेरिकी कार्रवाई में एक टैंकर के भारतीय चालक दल के तीन सदस्यों की मौत हो गई। अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी को विदेश मंत्रालय के मुख्यालय में तलब किया गया और उन्हें अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को लेकर भारत की कड़ी आपत्ति से अवगत कराया गया। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने मीक्स के समक्ष अमेरिकी हमलों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। मीक्स को बुधवार की रात भी तलब किया गया था।
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अमेरिकी हमलों पर भारत ने कड़ा विरोध जताया
विदेश मंत्रालय ने कहा, 'ओमान की खाड़ी में भारतीय चालक दल के सदस्यों वाले तीन वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी नौसेना के हमलों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।’मंत्रालय ने कहा कि उसने एक बार फिर 'जहाजों पर घातक बल प्रयोग को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। ऐसे कदम अस्वीकार्य हैं और एक संवेदनशील क्षेत्र में इस मुश्किल समय पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करते हैं।’ मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी से अनुरोध किया गया कि वह भारत की चिंताओं को अपने अधिकारियों तक पहुंचाएं और यह सुनिश्चित करें कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्य बल नागरिकों के जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं।’ यह पहली बार था जब भारत ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि अमेरिकी नौसेना ने भारतीय चालक दल वाले जहाजों को निशाना बनाया था। भारत ने कहा था कि ये हमले तुरंत रुकने चाहिए।
यूएस आर्मी को 'क्लीन चिट' देने की कोशिश कर रहे ट्रंप?
तेल टैंकरों पर हमलों पर सेंटकॉम, ईरान और भारत की प्रतिक्रिया से जाहिर है कि हमले कहां से हुए और किसने किए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपनी सेना की 'उदंडतापूर्ण कार्रवाई' को छिपाने और उसे क्लीन चिट देने का ढोंग कर रहे हैं। तेल टैंकर यदि निर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे तो अमेरिकी फौज छोटी बोट या अपने युद्धपोत के जरिए उसका रास्ता रोक सकती थी या चालक दल के सदस्यों को हिरासत में ले सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, यह पता होते हुए भी टैंकर पर भारतीय सवार हैं, जैसा कि कई रिपोर्टों में दावा किया गया है, उसने हमले कर भारतीय क्रू की जान लेने की कोशिश की। भारत को इस मामले को उच्च स्तर पर प्रभावी तरीके से उठाते हुए यूएस को साफ संदेश देना चाहिए कि इस तरह के हमले वह बर्दाश्त नहीं करेगा। खासतौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 की बैठक के लिए फ्रांस जा रहे हैं। वहां पर उनकी मुलाकात राष्ट्रपति ट्रंप से होगी। इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप से जरूर आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।
