सिरकप और मोहरा मोरादू जैसे स्थलों के साथ पाकिस्तान कर रहे छेड़छाड़।
तक्षशिला भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक।
UNESCO Warns Pakistan: पाकिस्तान ने फिर एक बार ऐसा किया है, जिसकी वजह से उसकी जगहंसाई हो रही है। ऑर्कियोलॉजिकल साइट तक्षशिला (तक्षशिला विश्वविद्यालय) पर पाकिस्तान की बुरी नजर है। इस साइट पर पाकिस्तान ने संरक्षण कार्य के नाम पर कुछ ऐसा किया है, जिसने दुनिया को हैरान-परेशान कर दिया है। आखिरकार संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को (UNESCO) ने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी दी है कि अगर तक्षशिला कॉम्प्लेक्स (Taxila) में किए गए हस्तक्षेपों को ठीक नहीं कराया गया, तो तक्षशिला को 'विश्व धरोहर' स्थलों की लिस्ट से हटाकर 'वर्ल्ड हेरिटेज इन डेंजर,' यानी संकटग्रस्त विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल कर दिया जाएगा।
आइए पहले समझते हैं कि आखिर मामला क्या है। दरअसल, पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग (Department of Archaeology and Museums) ने संरक्षण कार्य के नाम पर प्राचीन संरचनाओं में सीमेंट और आधुनिक चिनाई (मॉडर्न मैसनरी) का इस्तेमाल किया। यूनेस्को का मानना है कि इस तरह की सामग्री का उपयोग अंतरराष्ट्रीय संरक्षण सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे स्मारकों की ऐतिहासिक प्रामाणिकता और मौलिक स्वरूप पर असर पड़ता है।
पाकिस्तान ने तक्षशिला विश्वविद्यालय साइट के साथ की छेड़छाड़। istock
यूनेस्को ने इन कार्यों को बताया 'गैरजरूरी हस्तक्षेप'
यह विवाद तक्षशिला पुरातात्विक परिसर के दो महत्वपूर्ण स्थलों सिरकप (Sirkap) और मोहरा मोरादू (Mohra Moradu) में कराए गए संरक्षण कार्यों को लेकर है। हाल ही में पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत एवं संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में यूनेस्को ने इन कार्यों को 'गैरजरूरी हस्तक्षेप' बताया। यूनेस्को ने दो कहा कि पुरातात्विक स्मारकों में इस प्रकार के बदलाव उनकी ऐतिहासिक विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं. संस्था ने यह भी संकेत दिया कि अगर इन बदलावों को पहले जैसी स्थिति में नहीं किया गया या संरक्षण के स्टैंडर्ड का पालन नहीं किया गया तो वह कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।
जानकारी के मुताबिक, मार्च में यहां आए एक पर्यटक ने पेरिस स्थित पाकिस्तान के यूनेस्को प्रतिनिधि को इन संरक्षण कार्यों की तस्वीरें और जानकारी भेजी थी. इसके बाद मामला यूनेस्को के संज्ञान में आया. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, शिकायत में कहा गया कि कई स्थानों पर मूल पुरातात्विक दीवारों को नई चिनाई से बदल दिया गया या उनकी ऊंचाई बढ़ा दी गई। यूनेस्को ने माना कि इस तरह के हस्तक्षेप विश्व धरोहर स्थल की प्रामाणिकता और अखंडता को प्रभावित कर सकते हैं।
इन स्थलों की तस्वीरों की समीक्षा का दावा करते हुए लिखा कि कई स्थानों पर प्राचीन पत्थरों की जगह नई चिनाई दिखाई दे रही है. जहां मूल निर्माण अनियमित आकार के प्राचीन पत्थरों से हुआ था, वहीं नई मरम्मत में समान आकार के आधुनिक और तराशे हुए पत्थरों का उपयोग किया गया है।
प्राचीन पत्थरों की जगह नई चिनाई दिखाई दे रही: दावा
हालांकि, पाकिस्तान के पंजाब पुरातत्व विभाग ने आरोपों को खारिज कर दिया है। विभाग के महानिदेशक मलिक ज़हीर अब्बास ने डॉन से कहा कि इसे पुनर्निर्माण (Reconstruction) कहना गलत है। उनके अनुसार यह कार्य केवल संरक्षण के लिहाज से किया गया ताकि कमजोर हो चुकी संरचनाओं को संभाला जा सके। उन्होंने कहा कि विभाग ने अंतरराष्ट्रीय संरक्षण सिद्धांतों के अनुरूप ही काम किया है और किसी भी तरह के पुनर्निर्माण को वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि वहां पुनर्निर्माण किया ही नहीं गया।
बुरी तरह फंस गया पाकिस्तान
इस घटना ने पाकिस्तान की मुसीबत बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर यूनेस्को इस मामले में सख्त रुख अपनाता है तो पाकिस्तान की अन्य विरासत स्थलों को विश्व धरोहर लिस्ट में शामिल कराने की कोशिशों पर भी असर पड़ सकता है. पाकिस्तान 1997 से 24 अतिरिक्त स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने का प्रयास कर रहा है। इनमें खैबर पख्तूनख्वा का बौद्ध स्थल रानी घाट और सिंध प्रांत का भानभोर जैसे ऐतिहासिक स्थल भी शामिल हैं।
तक्षशिला भारतीय उपमहाद्वीप में साहित्य और संस्कृति का प्रतीक।
तक्षशिला से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां
तक्षशिला भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में केवल एक शहर नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक रहा है। यह प्राचीन गांधार सभ्यता का प्रमुख केंद्र था और छठी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर पांचवीं शताब्दी ईस्वी तक एशिया के सबसे बड़े शिक्षा केंद्रों में गिना जाता था। यहां भारत ही नहीं, बल्कि मध्य एशिया और अन्य क्षेत्रों से भी विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने आते थे। तक्षशिला का उल्लेख रामायण, महाभारत, बौद्ध ग्रंथों और कई संस्कृत साहित्य में मिलता है।
इतिहासकारों के अनुसार, मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 316 ईसा पूर्व इसे अपने साम्राज्य में शामिल किया था। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) ने यहीं शिक्षा दी थी और महान आयुर्वेदाचार्य चरक का भी तक्षशिला से संबंध माना जाता है। प्रसिद्ध संस्कृत व्याकरणाचार्य पाणिनि का संबंध भी इसी क्षेत्र से जोड़ा जाता है।
यहां राजनीति, अर्थशास्त्र, चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, सैन्य विज्ञान, गणित, दर्शन, ज्योतिष, व्याकरण और वेदों सहित लगभग 60 से अधिक विषय पढ़ाए जाते थे। यही कारण है कि तक्षशिला को दुनिया के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक माना जाता है, हालांकि यह आधुनिक विश्वविद्यालय की तरह एक ही परिसर में नहीं, बल्कि अलग-अलग आचार्यों के गुरुकुलों का समूह था।
आज तक्षशिला परिसर में धर्मराजिका स्तूप, जौलियां बौद्ध मठ, मोहरा मोरादू, सिरकप, सिरसुख, भिर टीला और तक्षशिला संग्रहालय जैसे कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल मौजूद हैं। यहां आकेमेनिड, मौर्य, इंडो-ग्रीक, कुषाण और गुप्त काल की सांस्कृतिक परतें एक ही स्थान पर देखने को मिलती हैं। इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने 1980 में तक्षशिला को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।
