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Canada Crisis: कैसे टूट की कगार पर पहुंच गया कनाडा, ट्रंप का दबाव या अंदरूनी बगावत? अल्बर्टा में आजादी की जंग तेज

Canada Crisis: कनाडा के अल्बर्टा में आजादी की मांग तेज हो चुकी है, जनमत संग्रह की कोशिशें हो रही हैं। इसे भड़काने का आरोप अमेरिका और ट्रंप पर भी लग रहा है। आइए जानते हैं कि इसका सच क्या है?

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कनाडा में अल्बर्टा प्रांत में आजादी की हो रही है मांग
Authored by: Shishupal Kumar
Updated May 5, 2026, 18:19 IST

Canada Crisis: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हमेशा से कहा जाते रहा है कि जहां तेल होता है वहां अमेरिका होता है, खाड़ी देशों में जारी जंग इस कथन की पुष्टि भी करता है, अमेरिका कई जंग इस तेल के चक्कर में लड़ चुका है। अब कनाडा में एक अलग ही तरह की आग धधक रही है। कनाडा का एक सबसे समृद्ध प्रांत अल्बर्टा अलग होने के लिए लड़ाई लड़ रहा है। आंदोलन हो रहे हैं, हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है, जनमत संग्रह की बात हो रही है। कहा जा रहा है इस अलगाववाद को हवा विदेशी जमीन से मिल रही है। इन सबमें एक नाम सामने आ रहा है- अमेरिका और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का।

अल्बर्टा क्यों होना चाहता है अलग?

अल्बर्टा के लोगों का आरोप है कि कनाडाई सरकार उसे उचित हिस्सेदारी नहीं दे रही है। अल्बर्टा के निवासी लंबे समय से कनाडा की संघीय प्रणाली में अपनी स्थिति से असंतुष्ट महसूस करते रहे हैं। उनका कहना है कि कनाडाई सरकार को जितना अल्बर्टा देता है, उतना उसे हिस्सा नहीं मिलता है। जितना वो टैक्स भरता है, उतना वहां इन्वेस्ट नहीं होता है। एक और कारण इसके इतिहास में छिपा है। कनाडा का गठन वर्ष 1867 में हुआ था, जब ओंटारियो, क्यूबेक, नोवा स्कोटिया और न्यू ब्रंसविक ने मिलकर एक परिसंघ बनाया। उस समय अल्बर्टा इसका हिस्सा नहीं था और इसे औपचारिक रूप से 1905 में प्रांत का दर्जा देकर देश में शामिल किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती दौर में अल्बर्टा एक सीमांत क्षेत्र (फ्रंटियर) की तरह विकसित हुआ, जहां बसने वाले लोगों में आत्मनिर्भरता और स्थानीय स्तर पर फैसले लेने की मजबूत इच्छा थी। यही वजह है कि यहां के समाज में स्वशासन की भावना अन्य पारंपरिक क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा गहराई से देखी जाती है।

अल्बर्टा में जनमत संग्रह की मांग के लिए चला हस्ताक्षर अभियान (फोटो- AP)

अल्बर्टा में जनमत संग्रह की मांग के लिए चला हस्ताक्षर अभियान (फोटो- AP)

अल्बर्टा की आजादी की मांग में ट्रंप का कितना हाथ?

इस बात से सीधे तौर पर तो इनकार नहीं किया जा सकता है कि अमेरिका का इस अलगाव के नारे में हाथ नहीं है। ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से कनाडा के साथ रिश्ते ठीक नहीं हैं, ट्रंप तो कनाडा को भी अमेरिका में मिलाने की बात कह चुके हैं, अल्बर्टा तो सिर्फ एक प्रांत है। अल्बर्टा के वर्तमान प्रीमियर डैनियल स्मिथ को इस अलगाववाद को हवा देने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। डैनियल स्मिथ और ट्रंप के रिश्ते अच्छे हैं, ये बात किसी से छिपी नहीं है। अलगाव की मांग करने वालों के साथ ट्रंप प्रशासन की मीटिंग की भी खबरें है। खुद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अल्बर्टा में अलगाववादी आंदोलन पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा था कि पश्चिमी कनाडा का यह प्रांत "अमेरिका के लिए एक स्वाभाविक साझेदार" है।

अल्बर्टा में कहां तक पहुंची आजादी की मांग?

AP की रिपोर्ट के अनुसार अल्बर्टा में अलगाव की मांग को लेकर हलचल तेज है। यहां सक्रिय समूहों का कहना है कि उन्होंने कनाडा से अलग होने के मुद्दे पर जनमत संग्रह कराने के लिए लगभग 3.02 लाख हस्ताक्षर संबंधित अधिकारियों को सौंप दिए हैं। इस पहल के लिए जरूरी न्यूनतम 1.78 लाख हस्ताक्षरों की सीमा वे पहले ही पार कर चुके हैं। अब इन हस्ताक्षरों की जांच के बाद यह मुद्दा वोटिंग तक पहुंच सकता है। प्रांत की प्रीमियर डैनियल स्मिथ ने संकेत दिया है कि अगर सभी हस्ताक्षर वैध पाए जाते हैं, तो सरकार जनमत संग्रह की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।

अल्बर्टा की आजादी में कितने रोड़े?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही जनमत संग्रह हो जाए और उसमें अलगाव के पक्ष में नतीजा आए, फिर भी अल्बर्टा को तुरंत स्वतंत्रता नहीं मिलेगी। इसके लिए कनाडा की संघीय सरकार के साथ विस्तृत बातचीत और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। Daniel Béland, जो McGill University में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर हैं, का कहना है कि कई स्वदेशी समुदाय पहले से ही अदालतों में इस पहल को चुनौती दे रहे हैं। उनके अनुसार, ये समूह कानूनी माध्यमों से अलगाव की कोशिशों को रोकने की दिशा में सक्रिय हैं।

अल्बर्टा में आजादी की मांग (फोटो- AP)

अल्बर्टा में आजादी की मांग (फोटो- AP)

अगर अलग हुआ अल्बर्टा तो कनाडा को कितना नुकसान?

अल्बर्टा कनाडा का एक महत्वपूर्ण प्रांत है, जिसकी आबादी करीब 50 लाख के आसपास मानी जाती है और यह भौगोलिक रूप से अमेरिका के मोंटाना राज्य की सीमा से जुड़ा हुआ है। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, खासकर तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार के लिए प्रसिद्ध है, और यहीं से इसकी आर्थिक ताकत का बड़ा हिस्सा आता है। अल्बर्टा की अर्थव्यवस्था में ऊर्जा क्षेत्र की भूमिका सबसे अहम है। खनन, संसाधनों का दोहन और तेल-गैस उत्पादन यहां की आर्थिक गतिविधियों का मुख्य आधार हैं। यही वजह है कि यह प्रांत कनाडा की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। ऊर्जा उत्पादन के आंकड़े इसकी ताकत को और स्पष्ट करते हैं। हाल के वर्षों में अल्बर्टा देश का सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन उत्पादक बनकर उभरा है। वर्ष 2023 में कनाडा के कुल कच्चे तेल उत्पादन का लगभग 84 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस उत्पादन का करीब 61 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी प्रांत से आया। आर्थिक प्रदर्शन के लिहाज से भी अल्बर्टा मजबूत स्थिति में है। 2024 में जीडीपी वृद्धि में योगदान के मामले में यह Ontario के बाद दूसरे स्थान पर रहा। इतना ही नहीं, प्रति व्यक्ति जीडीपी के मामले में भी यह देश के सभी प्रांतों में सबसे आगे माना जाता है, जो इसकी आर्थिक समृद्धि और संसाधन-आधारित ताकत को दर्शाता है।

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