Startup India के 10 साल: इनोवेशन की दौड़ में कहां है भारत, चीन से कितना पीछे औरों से कितना आगे?
Startup India National Day: 10 वर्ष पहले केंद्र सरकार ने देश में इनोवेशन और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप इंडिया अभियान शुरू किया। लक्ष्य साफ था, भारत को नवोन्मेष, तकनीक और उद्यमिता के जरिये विकसित देशों की कतार में लाना। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने नए उद्योग और उद्योगपतियों को बढ़ावा दिया। 10 साल बाद हम इनोवेशन की दौड़ में कहां हैं और चीन से हम कितने पीछे हैं, जिसे हमारा स्वाभाविक प्रतिस्पर्धी माना जाता है।
- Authored by: यतींद्र लवानिया
- Updated Jan 16, 2026, 04:24 PM IST
Startup India Mission Analysis: 2016 में जब ‘Startup India’ की शुरुआत हुई, तो यह महज एक पॉलिसी ब्रांड था। लेकिन, 10 वर्ष में 2026 आते-आते यह भारत की नई आर्थिक पहचान के सबसे बड़े पिलर्स में से एक बन गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या दिसंबर 2025 तक 2 लाख से ज्यादा हो चुकी है। जाहिर तौर पर मोदी सरकार की यह सबसे हिट योजनाओं में से एक है।
स्केलिंग का नतीजा रोजगार में दिखा
योजना की जब शुरुआत हुई, तो स्टार्टअप कैटेगरी में सिर्फ 4 कंपनियां आती थीं, आज इनकी तादाद 2 लाख से ज्यादा है। यह स्केलिंग सिर्फ कागजी नहीं है। बल्कि इस स्केलिंग का सबसे ठोस नतीजा रोजगार के आंकड़ों में दिखता है। सरकार के दावों और तमाम रिपोर्ट्स के मुताबिक स्टार्टअप्स ने करीब 21 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा की हैं।
निवेश का प्रतिफल भी मिल रहा
Startup India की कहानी सिर्फ नई कंपनियों के खुलने और नौकरियां देने तक सीमित नहीं है। बल्कि, इन स्टार्टअप्स ने निवेश का प्रतिफल भी देना शुरू कर दिया है। देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम के भीतर अब IPO और प्रॉफिटेबिलिटी पर जोर है। ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में 20 वेंचर कैपिट बैक्ड स्टार्टअप्स लिस्ट हुए और 28 यूनिकॉर्न प्रॉफिटेबल बने। यह बताता है कि भारत ने 10 साल पहले जो शुरू किया, अब उसका नेक्स्ट फेज शुरू हो गया है। अब क्वांटिटी से क्वालिटी की ओर शिफ्ट साफ दिख रहा है।
ग्लोबल रेस में भारत की पोजिशन
अमेरिका और चीन के बाद भारत को व्यापक तौर पर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम माना जाता है। लेकिन जब बात इनोवेशन की गहराई खासतौर पर High Teck R&D, पेटेंटिंग, यूनिवर्सिटी-इंडस्ट्री लिंक, हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर जैसी क्षमताओं की आती है, तो तस्वीर बदली हुई नजर आती है। वर्ल्ड इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइजेशन (WIPO) के Global Innovation Index 2025 में भारत 38वें स्थान पर है, जबकि चीन टॉप-टियर में है। WIPO का संकेत साफ है कि भारत के पास ICT सर्विसेज एक्सपोर्ट्स, लेट-स्टेज वेंचर कैपिटल डील्स जैसी ताकतें हैं, पर R&D और इंडस्ट्री-रिसर्च इंटीग्रेशन जैसी कमजोरियां बनी हुई हैं। लिहाजा, ग्लोबल रेस के लिहाज से देखें, तो निष्कर्ष निकलता है कि भारत का स्टार्टअप मॉडल “डिजिटल-फर्स्ट स्केल” में बहुत मजबूत है, लेकिन “डीप साइंस-फर्स्ट” इनोवेशन में अब भी पिछड़ रहा है।
फंडिंग के मोर्चे पर चिंताएं
2025 में भारत की स्टार्टअप फंडिंग को लेकर अलग-अलग ट्रैकर्स में नंबर अलग हैं। हालांकि, मोटा ट्रेंड यही है कि कुल मिलाकर पैसा आया है। लेकिन चिंता की बात यह है कि डील्स और चेक कम हुए हैं, जो बताता है कि अब निवेशकों के बीच सेलेक्टिविटी बढ़ रही है। TechCrunch के मुताबिक 2025 में भारत ने करीब $11B जुटाए हैं। दूसरी तरफ TheKredible/Entrackr के मुताबिक 2025 में करीब $13B और 1,250 डील्स रिपोर्ट हुईं। यह विरोधाभास नहीं है। बल्कि, डेटा-मेथडोलॉजी का फर्क है कि कौन-सी डील्स राउंड्स इसमें शामिल हैं। लेकिन, नतीजा यह निकलता है कि भारत के लिए यह दौर “फंडिंग विंटर के बाद मैच्योरिटी टेस्ट” है, जहां कम पैसे में बेहतर बिजनेस बनाने का दबाव दिखेगा।
भारत का सबसे बड़ा इम्तिहान
भारत का इकोसिस्टम लंबे समय तक कंज्यूमर इंटरनेट यानी फिनटेक और मार्केटप्लेस के इर्दगिर्द विकसित हुआ है। अब बदलाव दिख रहा है। 2025 में भारत में डीपटेक फंडिंग $1.6B तक बढ़ी, भले ही डील्स की संख्या कम हुई है। सरकार भी अब स्टार्टअप इंडिया का “लेवल अप” करना चाहती है, जहां AI और डीपटेक पर जोर देने की बात हो रही है। डीपटेक में भारत का असली बेंचमार्क चीन है, क्योंकि चीन के पास हार्ड टेक में स्टेट-कैपिटल, मैन्युफैक्चरिंग बेस और सप्लाई-चेन का कम्पाउंड एडवांटेज है।
चीन बनाम भारत
चीन का मॉडल: चीन ने हाल के वर्षों में टेक पर रेगुलेटरी सख्ती भी देखी है और वेंचर कैपिटल माहौल में सुस्ती भी। Crunchbase के मुताबिक 2025 की पहली छमाही में एशिया में फंडिंग स्लाइड में चीन का रोल बड़ा रहा। लेकिन चीन “हार्ड टेक” को रणनीतिक तौर पर आगे बढ़ा रहा है, जैसे स्टेट-बैक्ड बड़े वेंचर फंड्स का निर्माण।
भारत का मॉडल: दूसरी तरफ भारत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रा, बड़ा मार्केट, और सर्विस टैलेंट पूल का एडवांटेज ले रहा है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्श (GII) में भारत का प्रदर्शन दिखाता है कि वेंचर कैपिटल और फाइनेंस-साइड के कुछ इंडिकेटर्स में भारत की स्थिति मजबूत है।
भारत बनाम चीन की तुलना में चीन इंडस्ट्रियल-ग्रेड इनोवेशन में बढ़त रखता है, पर उसके साथ रेगुलेटरी और जियोपॉलिटिकल डिस्काउंट जुड़ा रहता है। वहीं, भारत मार्केट-ड्रिवन स्केल में आगे है, पर R&D और डीप साइंस में गैप ग्लोबल रैंकिंग और नीतिगत बहसों में साफ दिखता है।
इमर्जिंग मार्केट्स के सामने भारत
इमर्जिंग मार्केट यानी विकासशील देश, जिनकी बाजार और अर्थव्यवस्था के लिहाज से भारत से तुलना की जाती है। इस मामले में भारत की तुलना तीन अलग-अलग क्लस्टर्स में करनी होगी।
1. साउथ ईस्ट एशिया
इंडोनेशिया: 2025 में टेक फंडिंग $213M तक गिरने की रिपोर्ट है, यानी डाउनसाइकिल का असर ज्यादा गहरा दिखता है।
वियतनाम: यहां का इकोसिस्टम सीधे AI/हाई-टेक सेक्टर्स में तेजी दिखा रहा है। वियतनाम इनोवेशन एंड प्राइवेट कैपिटल रिपोर्ट 2025 में AI फंडिंग में उछाल जैसी बातें सामने आती हैं। भारत की इन दोनों से तुलना करें, तो इन मार्केट्स का स्केल छोटा है, लेकिन वे सेक्टर-फोकस्ड होकर तेजी से खास क्षेत्रों में पहचान बना रहे हैं।
2. लेटिन अमेरिका
लैटिन अमेरिका में 2025 में फंडिंग रिबाउंड की खबरें हैं। ब्राजील का इकोसिस्टम फिनटेक, एंटरप्राइज व लीगलटेक जैसी जगहों पर मजबूत है और ग्लोबल फंड्स चुनिंदा डील्स में उतर रहे हैं। ब्राजील के पास बड़े मार्केट का एडवांटेज, तो है लेकिन लेकिन मैक्रो इकोनॉमी, मसलन इंटरेस्ट रेट्स, कैपिटल कॉस्ट के मामले में चुनोतियां मिल रही हैं।
3. इनोवेशन हेवी स्मॉलर मार्केट्स
WIPO के डेटा में इजरायल जैसे इकोसिस्टम्स VC और यूनिकॉर्न वैल्यूएशन जैसे इंडिकेटर्स में बहुत ऊपर दिखते हैं। भारत का मुकाबला यहां स्केल से नहीं, बल्कि कटिंग-एज इनोवेशन आउटपुट से है। ये पेटेंटिंग, रिसर्च स्पिनआउट्स, डिफेंसटेक, सेमीकंडक्टर, बायोटेक में भारत से काफी आगे दिखते हैं।
10 साल की बड़ी कामयाबी
इस दशक की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि भारत में 2 लाख स्टार्टअप्स हैं। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि भारत ने उद्यमिता को मेनस्ट्रीम करियर बनाया है। सरकारी सिस्टम में स्टार्टअप-फ्रेंडली टूल्स आए हैं, मसलन टेंडर में EMD और टर्नओवर रिलैक्सेशन जैसी चीजें शामिल हुई हैं। इसके अलावा एग्जिट पाथ को बेहतर किया गया है। वहीं, IPO की तरफ बढ़ती कंपनियां एक कल्चरल शिफ्ट दिखा रही हैं। हालांकि, यहां फिर भी, 2026 का सबसे अनकंफर्टेबल सवाल हमारे सामने है कि क्या हम “भुजिया-टू-AI” जंप कर पा रहे हैं?
निर्णायक चुनौतियां और अगला पड़ाव
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को अब आगे बढ़ाने के लिए चार बड़ी चुनौतियों से निपटना होगा। पहली, R&D खर्च और रिसर्च-टू-मार्केट पाइपलाइन पर जोर देना होगा। इसके बिना भारत डीपटेक की रेस में पीछे छूटता चला जाएगा। इसके अलावा हार्डवेयर और मैन्युफैक्चरिंग-लिंक्ड स्टार्टअप्स का स्केल करना बेहद जरूरी है। तीसरी, चुनौती है ग्लोबल मार्केट में पहुंच बनाना।
भारत के ज्यादातर स्टार्टअप अभी भारत की खपत से चिपके हैं, लेकिन अब भारत को ‘Born Global’ कंपनियों की जरूरत है। इसके अलावा, एक्जिट क्वालिटी पर भी काम करना होगा, जहां IPO और M&A की निरंतरता और वैल्यू क्रिएशन पर जोर देना होगा। इन चार चुनौतियों को पार करने के बाद ही भारत “स्टार्टअप हब” से “इनोवेशन पावरहाउस” बन पाएगा। 10 साल की कहानी ने भारत को ग्लोबल टेबल पर सीट दिलाई। अगले 10 साल की कहानी तय करेगी कि यह सीट “सिर्फ मार्केट-स्केल” के लिए है या “टेक्नोलॉजी-लीडरशिप” के लिए।