7400 kmph स्पीड, एक्टिव रडार सीकल... रूसी किलर मिसाइल R-37M बढ़ाएगी IAF की ताकत, खासियत जानकर थर-थर कापेंगे चीन और पाक!
R-37M Long-Range Missile: भारतीय वायु शक्ति के आधुनिकीकरण में एक और अहम अध्याय जुड़ने जा रहा है। रूस की लंबी दूरी तक वार करने वाली R-37M मिसाइल को लेकर हुई नई प्रगति भारतीय लड़ाकू विमानों की क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाने वाली है। लगभग 7400 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार और 300 किलोमीटर से ज्यादा दूर तक सटीक निशाना साधने की क्षमता ने इस मिसाइल को दुनिया की सबसे घातक एयर-टू-एयर हथियार प्रणालियों में शामिल कर दिया है।
- Authored by: Piyush Kumar
- Updated Dec 12, 2025, 03:16 PM IST
R-37M Long-Range Missile: भारतीय वायुसेना की ताकत में और इजाफा होने वाला है। भारत का सबसे भरोसेमंद मित्र देश रूस एक बार फिर भारत की हवाई ताकत को बढ़ाने में मदद करने जा रहा है। भारतीय वायुसेना और रूस के बीच R-37M, बेहद लंबी दूरी वाली एयर-टू-एयर मिसाइल के लिए होने वाला समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 300 मिसाइलें खरीदी जाएंगी। उम्मीद है कि आने वाले 12 से 18 महीनों में इनकी आपूर्ति भी शुरू हो सकती है। ये मिसाइलें भारतीय लड़ाकू विमानों की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगी।
भारतीय वायु सेना ने R-37M मिसाइल के अधिग्रहण का फैसला किया। ( @TheDCIndia)
दुनिया की सबसे एयर-टू-एयर मिसाइलों में से एक
भारतीय वायु सेना ने R-37M मिसाइल के अधिग्रहण का फैसला किया। इसकी रेंज 300 किलोमीटर से भी ज्यादा है, जो दुनिया में सबसे लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों में गिनी जाती है।
यह मिसाइल मैक 6 (7400 kmph) की हाइपरसोनिक स्पीड से उड़ती है और दुश्मन के AWACS, टैंकर और हाई-वैल्यू टारगेट्स को पलक झपकते ही तबाह कर सकती है। बता दें कि भारत के पास ब्रह्मोस मिसाइल है, जिसकी स्पीड करीब 3700 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो सुपरसोनिक मिसाइलों की लिस्ट में ब्रह्मोस को खड़ा करती है।
क्यों सबसे खतरनाक है यह मिसाइल?यह मिसाइल Su-30 MKI जैसे तेज लड़ाकू विमानों के लिए तैयार की गई है। मिसाइल में एक्टिव रडार सीकल लगा है, जो इसे बेहद खतरनाक बनाता है। इसमें लगे 60 किलो का शक्तिशाली वारहेड दुश्मन के किसी भी हाई-वैल्यू प्लेटफॉर्म को खत्म करने के लिए पर्याप्त है।
R-37M क्यों बनी IAF की पहली पसंद?यह मिसाइल भारतीय वायु सेना की पहली पसंद इसलिए भी है क्योंकि भारतीय Su-30MKI और रूसी Su-30SM एक ही फैमिली के विमान हैं, इसलिए R-37M को भारतीय फाइटर जेट में जोड़ने के लिए बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होगी।
सिर्फ मिशन कंप्यूटर और Bars रडार में सॉफ्टवेयर अपग्रेड से यह मिसाइल पूरी क्षमता से काम करने लगेगी। जानकारी के मुताबिक, हर एक Su-30MKI पर दो R-37M मिसाइल लगाई जाएंगी।
मिसाइल को Su-30 MKI जैसे तेज लड़ाकू विमानों के लिए तैयार की गई है।(फोटो सोर्स: @TheDCIndia)
बात करें टारगेट की तो ये मिसाइल दुश्मनों की AWACS, एयर-टैंकर, और जामिंग प्लेटफॉर्म को निशाना बनाने में सक्षम है।
गौरतलब है कि देश की डिफेंस सेक्टर भी 'आत्मनिर्भर भारत' के उद्देश्य के साथ काम कर रही है।
भारतीय वायु सेना अपनी स्वदेशी SFDR तकनीक वाली Astra Mk-3 मिसाइल (300+ किमी रेंज) पर निर्भर होना चाहती है। लेकिन यह मिसाइल 2030–32 के आसपास उत्पादन में आएगी। तब तक R-37M एक महत्वपूर्ण गैप भरने का काम करेगी। Su-30MKI पर इसे फ्यूज़लेज के नीचे सेमी-रिसेस्ड (semi-recessed) तरीके से लगाया जाएगा।
