US Visa Freeze: ना चापलूसी काम आई, न नोबेल की पैरवी... PAK- बांग्लादेश के नागरिकों की US में NO Entry! ट्रंप ने क्यों लिया ये फैसला?
US Immigrant Visa Freeze List: अमेरिका ने डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में 75 देशों के नागरिकों को इमिग्रेंट वीजा जारी करने पर रोक लगा दी है। इस सूची में पाकिस्तान और बांग्लादेश शामिल हैं, जबकि भारत को इससे बाहर रखा गया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन प्रवासियों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है जो अमेरिका पहुंचकर सरकारी वेलफेयर योजनाओं पर बोझ बन सकते हैं। नई नीति के तहत ‘पब्लिक चार्ज’ नियमों के आधार पर वीजा आवेदकों की सख्त जांच होगी, हालांकि छात्र, पर्यटक और वर्क वीजा जैसी नॉन-इमिग्रेंट कैटेगरी पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
- Authored by: Piyush Kumar
- Updated Jan 16, 2026, 03:03 PM IST
US Immigrant Visa Freeze List: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश रखने के लिए पाकिस्तान ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने कई बार राष्ट्रपति ट्रंप की पैरवी की।
पैरवी तो मानों छोटी बात हो। शहबाज शरीफ ने तो ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार तक के लिए नॉमिनेट कर दिया है। शहबाज-मुनीर ने ट्रंप की चमचागिरी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन 'पत्थरदिल' ट्रंप खुश नहीं हुए।
बुधवार को अमेरिका ने 75 देशों के नागरिकों को अप्रवासी वीजा जारी करने पर रोक लगा दी। इस फेहरिस्त में पाकिस्तान का नाम सुनहरे अक्षरों से लिखा गया। वहीं, लिस्ट में धार्मिक कट्टरपंथियों की चपेट में आ चुका बांग्लादेश भी है, जो पिछले कुछ दिनों से भारत विरोधी हरकतों में लगा है। गौरतलब है कि भारत इस लिस्ट में शामिल नहीं है।
शहबाज शरीफ आसिम मुनीर से ट्रंप की मुलाकात की तस्वीर।(फोटो सोर्स: AP)
ट्रंप प्रशासन ने आखिर यह फैसला क्यों लिया?
दरअसल, ट्रंप अपने देश में उन लोगों को देखना पसंद नहीं करते जो अमेरिका के लिए बोझ बन चुके हैं। बुधवार को ट्रंप प्रशासन ने जानकारी देते हुए बताया कि ट्रंप प्रशासन ने यह कदम ऐसे प्रवासियों पर नकेल कसने के प्रयासों काे हिस्से के रूप में उठाया है जो सरकार पर बोझ बन सकते हैं।
अमेरिका के विदेश विभाग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अमेरिकी विदेश विभाग उन 75 देशों के लिए आप्रवासी वीजा जारी नहीं करेगा जिनके प्रवासी अमेरिकी जनता की कल्याणकारी योजनाओं का दुरुपयोग करते हैं। यह प्रतिबंध तब तक लागू रहेगा जब तक अमेरिका यह सुनिश्चित नहीं कर लेता कि नए आप्रवासी अमेरिकी जनता से धन संसाधन का दोहन नहीं करेंगे।”
व्हाइट हाउस ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “ट्रंप प्रशासन 75 देशों से आने वाले आप्रवासी वीजा की प्रक्रिया को तब तक रोक देगा जब तक अमेरिका यह सुनिश्चित नहीं कर लेता कि आने वाले आप्रवासी जनता पर बोझ नहीं बनेंगे या अमेरिकी करदाताओं से धन नहीं वसूलेंगे। अमेरिका प्रथम।”
क्या होते हैं इमिग्रेंट वीजा?
इमिग्रेंट वीजा उन लोगों को जारी किया जाता है जो स्थायी रूप से अमेरिका में बसना चाहते हैं। इसके लिए किसी अमेरिकी नागरिक या ग्रीन कार्ड धारक रिश्तेदार या फिर किसी अमेरिकी कंपनी द्वारा स्पॉन्सर किया जाना जरूरी होता है। आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) में याचिका दाखिल करने से होती है।
इसके उलट, नॉन-इमिग्रेंट वीजा (NIV) अस्थायी यात्रा के लिए होता है, जैसे पढ़ाई, पर्यटन, इलाज या बिजनेस। राहत की बात यह है कि नया प्रतिबंध नॉन-इमिग्रेंट वीजा पर लागू नहीं होगा। छात्र और पर्यटक वीजा फिलहाल इस दायरे से बाहर हैं।
इमिग्रेंट वीजा उन लोगों को जारी किया जाता है जो स्थायी रूप से अमेरिका में बसना चाहते हैं।(फोटो सोर्स: istock)
क्या है नया नियम?
अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के मुताबिक, प्रशासन का मानना है कि कुछ संभावित प्रवासी अमेरिका पहुंचने के बाद सरकारी सहायता और वेलफेयर स्कीम्स पर निर्भर हो सकते हैं। विभाग अब ‘पब्लिक चार्ज’ प्रावधान के तहत वीजा आवेदकों की और सख्त जांच करेगा।
नए नियमों के तहत अब आवेदकों की उम्र, सेहत, पारिवारिक स्थिति, आर्थिक स्थिति, शिक्षा, कौशल, अंग्रेजी भाषा ज्ञान और पहले सरकारी मदद लेने का रिकॉर्ड भी परखा जाएगा। इसके लिए इंटरव्यू अंग्रेजी में भी लिए जा सकते हैं।
किस पर पड़ेगा ज्यादा असर?
यह रोक विशेष रूप से आप्रवासी वीजा (स्थायी निवास) पर लागू होती है। बी1/बी2 पर्यटक वीजा, H-1B वर्क वीजा और F-1 छात्र वीजा जैसी गैर-आप्रवासी वीजा श्रेणियां इस रोक के दायरे में नहीं आती हैं। हालांकि, सामान्य प्रक्रिया में देरी और वीजा साक्षात्कार के लंबित आवेदनों से आवेदकों पर असर पड़ सकता है।
क्या गवाही दे रहे आंकड़े?
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, साल 2024 में अमेरिका ने 6 लाख से ज्यादा इमिग्रेंट वीजा जारी किए थे, जिनमें बड़ी संख्या अमेरिकी नागरिकों के करीबी रिश्तेदारों की थी। नवंबर 2025 में ही दूतावासों को निर्देश दिए गए थे कि यह सुनिश्चित किया जाए कि नए प्रवासी सरकारी मदद पर निर्भर न हों।
एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?
हालांकि, इस फैसले पर एक्सपर्ट्स ने सवाल भी खड़े किए हैं। अमेरिकी थिंक टैंक और शोध संस्थानों जैसे कैटो इंस्टीट्यूट और अमेरिकन इमिग्रेशन काउंसिल की रिपोर्ट्स की मानें तो प्रवासी, अमेरिकी नागरिकों की तुलना में कम सरकारी लाभ लेते हैं।
क्लीवलैंड स्थित इमिग्रेशन वकील डेविड लियोपोल्ड का कहना है कि मौजूदा कानूनों में पहले से ही सख्त जांच का प्रावधान है। ऐसे में अनिश्चितकालीन रोक की जरूरत समझ से परे है।
क्या है ट्रंप की सोच?
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा है। हाल ही में वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड के दो जवानों पर हमले के मामले में एक अफगान मूल के व्यक्ति पर आरोप लगे थे। इसके बाद से ही कुछ देशों को सुरक्षा के लिहाज से हाई रिस्क माना जा रहा है। कुल मिलाकर, यह फैसला अमेरिका की सख्त इमिग्रेशन नीति की एक और कड़ी माना जा रहा है, जिसका असर लाखों लोगों के अमेरिकी सपनों पर पड़ सकता है।
