क्या है NDRF, जिसकी 2006 में हुई थी स्थापना, देशभर के किन 15 राज्यों में रहती है हमेशा मुस्तैद?
जब भी कहीं कोई हादसा और दुर्घटना होते हैं तो नारंगी ड्रेस पहने, कुछ कर्मचारी, जान की परवाह किए बिना बचाव कार्यों में जुटे दिखते हैं। ये बचाव कर्मी, NDRF यानी कि National Disaster Response Force राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरफ) का हिस्सा होते हैं। NDRF का गठन 2006 में किया गया था, ताकि देश के किसी भी हिस्से में आपदा हो तो त्वरित गति से बचाव कार्य शुरू किया जा सके, लोगों की जान बचाई जा सके।
- Curated by: शिशुपाल कुमार
- Updated Jan 20, 2026, 12:23 PM IST
National Disaster Response Force (NDRF) यानी कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल- अक्सर यह शब्द तब सुनने को मिलता है, जब कहीं कोई आपदा और हादसा होती है। किसी भी आपदा के बाद तुरंत ही टीवी स्क्रीन पर एक लाइन बार-बार देखने को मिलती है- 'NDRF की टीम रवाना', 'NDRF का बचाव अभियान शुरू', 'देवदूत बनी NDRF' ऐसे में सवाल ये है कि आखिर NDRF है क्या, इसका काम क्या है, इसकी बटालियनें कहां-कहां हैं? आइए इसे जानते हैं।
क्या है NDRF?
चाहे कोई सुरंग हादसा हो या फिर भूकंप, बाढ़ हो या फिर रेल दुर्घटना, घटना के कुछ समय बाद ही नारंगी ड्रेस पहनी NDRF की टीम, बचाव कार्यों में जुट जाती है। किसी के लिए देवदूत तो किसी के लिए भगवान का अवतार, यही उपाधि मिलती रही है NDRF टीम को। हर कठिन से कठिन परिस्थितियों के लिए ही NDRF की स्थापना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत 2006 में की गई थी। तब एनडीआरफ 8 बटालियन से शुरू की गई थी। बाद में इनकी संख्या बढ़ती गई।
जब NDRF की जरूरत हुई महसूस
भारत में 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन, 2001 के गुजरात भूकंप और 2004 की सुनामी जैसी बड़ी आपदाओं के बाद यह महसूस किया गया कि अलग-अलग एजेंसियों के बजाय एक विशेष रूप से प्रशिक्षित राष्ट्रीय बल होना चाहिए, जो हर तरह की आपदा में तुरंत और प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर सके। इसी जरूरत को देखते हुए NDRF की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन, औद्योगिक हादसे और रासायनिक-जैविक-परमाणु आपदाओं में जान-माल की क्षति को न्यूनतम करना है।
बचाव कार्य के दौरान NDRF कर्मी (फोटो- HQNDRF)
आपदा बचाव कार्यों की रीढ़
NDRF की वेबसाइट के अनुसार एनडीआरएफ ने गठन के बाद से अब तक आपदाग्रस्त क्षेत्रों में उल्लेखनीय भूमिका निभाते हुए 1,55,205 से अधिक लोगों की जान बचाई है, जबकि देश और विदेश में 8,00,420 से ज्यादा फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। तेज, सटीक और पेशेवर कार्रवाई के कारण एनडीआरएफ को कई अंतरराष्ट्रीय आपदाओं में भी सराहना मिली है। 2011 की जापान ट्रिपल आपदा, 2015 के नेपाल भूकंप और 2023 के तुर्की भूकंप जैसे बड़े संकटों में एनडीआरएफ की भूमिका को वैश्विक स्तर पर प्रशंसा मिली। इन सफल अभियानों के पीछे मजबूत टीमवर्क, कड़ा प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल प्रमुख कारण रहे हैं।
- NDRF को बचाव कार्यों की रीढ़ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह आपदा के समय सबसे पहले पहुंचने वाला, सबसे ज्यादा प्रशिक्षित और सबसे भरोसेमंद बल बन चुका है।
- एनडीआरएफ की क्षमताओं की पहली बड़ी परीक्षा 2008 की कोसी बाढ़ के दौरान हुई, जब त्वरित और समन्वित बचाव अभियान के जरिए एक लाख से अधिक प्रभावित लोगों की जान बचाई गई।
- NDRF ने 2013 की उत्तराखंड केदारनाथ आपदा में हजारों फंसे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को सुरक्षित निकाला। दुर्गम पहाड़, टूटे रास्ते और खराब मौसम के बावजूद NDRF की टीमों ने दिन-रात रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।
- 2018 की केरल बाढ़ में NDRF ने नावों, गोताखोरों और विशेष उपकरणों की मदद से बाढ़ग्रस्त इलाकों से लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। कई जगह सेना से पहले NDRF की टीमें पहुंचीं।
- 2020 में विशाखापत्तनम गैस लीक जैसी रासायनिक आपदा में NDRF ने इलाके को सुरक्षित किया, लोगों को निकाला और जहरीली गैस के प्रभाव को कम करने में अहम भूमिका निभाई।
- 2023 के तुर्की-सीरिया भूकंप में भारत की ओर से भेजी गई NDRF की टीमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेस्क्यू कर यह साबित कर चुकी हैं कि यह बल केवल देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी जीवनरक्षक भूमिका निभाता है।
- 02 जून 2023 को ओडिशा के बालासोर के बहनागा क्षेत्र में हुई भीषण ट्रेन दुर्घटना में, जहां तीन ट्रेनें आपस में टकराईं और 17 कोच पटरी से उतर गए, एनडीआरएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तुरंत 9 टीमों को मौके पर भेजा। स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय में एनडीआरएफ ने 02 जून से 04 जून 2023 के बीच चलाए गए बचाव अभियान के दौरान 44 लोगों की जान बचाई और 121 मृतकों के शवों को बरामद किया।
- एनडीआरएफ की विशेषज्ञता केवल पारंपरिक आपदा राहत तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और आणविक (CBRN) खतरों से निपटने तक विस्तारित हो चुकी है। इसका स्पष्ट उदाहरण 2010 में दिल्ली के मायापुरी क्षेत्र में कोबाल्ट-60 रेडियोएक्टिव पदार्थ की बरामदगी के दौरान देखने को मिला, जब एनडीआरएफ ने अत्यंत संवेदनशील स्थिति को कुशलता से संभाला।
मलबों से लोगों को निकालते NDRF कर्मी (फोटो- HQNDRF)
NDRF की कार्यप्रणाली
किसी भी आपदा की स्थिति में इसका काम तय चरणों में आगे बढ़ता है। पूरे अभियान के दौरान NDRF राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस, सेना, SDRF और स्वास्थ्य विभाग के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखती है। ऑपरेशन समाप्त होने के बाद स्थिति सामान्य होने तक निगरानी रखी जाती है और फिर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाती है।
- आपदा की सूचना मिलते ही NDRF की नजदीकी बटालियन को अलर्ट किया जाता है। कंट्रोल रूम से टीमों को तुरंत रवाना किया जाता है ताकि न्यूनतम समय में प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचा जा सके। मौके पर पहुंचते ही सबसे पहले स्थिति का आकलन किया जाता है-आपदा का प्रकार, प्रभावित लोगों की संख्या, भौगोलिक जोखिम और संसाधनों की जरूरत का मूल्यांकन किया जाता है।
- इसके बाद खोज और बचाव अभियान शुरू होता है। बाढ़ में नावों और गोताखोरों की मदद से, भूकंप में मलबा हटाकर और विशेष उपकरणों से, जबकि रासायनिक या गैस रिसाव की स्थिति में सुरक्षा सूट और डिटेक्शन उपकरणों के साथ कार्रवाई की जाती है। प्राथमिकता हमेशा जीवित लोगों को सुरक्षित निकालने की होती है।
- बचाव के साथ-साथ NDRF प्राथमिक चिकित्सा और राहत कार्य भी करती है। घायलों को फर्स्ट एड, सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और स्थानीय प्रशासन को सौंपना इसका अहम हिस्सा है। जरूरत पड़ने पर अस्थायी शिविर लगाने और भीड़ प्रबंधन में भी सहयोग किया जाता है।
हर टीम में 47 प्रशिक्षित सदस्य
वर्तमान में NDRF की 16 बटालियनें देश के अलग-अलग संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं। एक बटालियन में 1149 जवान होते हैं। इन जवानों को बीएसएफ, सीआईएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और असम राइफल्स जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से प्रतिनियुक्त किया गया है। प्रत्येक बटालियन में 18 पूर्णतः स्वावलंबी और विशेषज्ञ खोज-बचाव टीमें होती हैं। हर टीम में 47 प्रशिक्षित सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें संरचनात्मक इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ, इलेक्ट्रिशियन, डॉग स्क्वॉड तथा चिकित्सा और पैरामेडिकल स्टाफ शामिल रहता है। एनडीआरएफ की सभी 16 इकाइयां प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों प्रकार की आपदाओं से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त और आधुनिक उपकरणों से लैस हैं।
पानी में बचाव अभियान के दौरान NDRF (फोटो- HQNDRF)
देश के किन 15 राज्यों में है NDRF का ठिकाना?
NDRF की इन बटालियनों की तैनाती भूकंप, बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन, औद्योगिक दुर्घटनाओं और शहरी आपदाओं की आशंका को ध्यान में रखकर की गई है। जम्मू कश्मीर, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम, नागालैंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में NDRF की बटालियनें तैनात रहती हैं।
