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कैसे आसिम मुनीर को अकूत ताकत देने वाला है संविधान का 27वां संशोधन, पाक में क्यों हो रहा इसका जोरदार विरोध

पाकिस्तान में असली ताकत सेना प्रमुख के पास ही रहती आई है लेकिन जब भी इन्हें अपनी ताकत में कटौती की जरा सी भी आशंका हुई या सरकार ज्यादा मजबूत होती दिखी तो उन्होंने उसे रास्ते से हटा दिया। सेना प्रमुख रहते हुए कोई फील्ड मार्शल बन गया तो कोई राष्ट्रपति।

Asim Munir

आसिम मुनीर को एसओडीएफ बनाया गया है। तस्वीर-AP

What is Pakistan 27th Amendment : पाकिस्तान के सेना प्रमुखों में सत्ता की भूख होना नई बात नहीं है। इसकी एक लंबी फेहरिस्त है। सेना प्रमुखों को जब-जब लगा कि उन्हें देश की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में लेनी है, उन्होंने नागरिक सरकारों को उखाड़कर तख्तापलट किया और सत्ता पर काबिज हो गए। अयूब खान, याह्या खान, जिया उल हक, परवेज मुशर्रफ और अब आसिम मुनीर। वैसे तो पाकिस्तान में असली ताकत सेना प्रमुख के पास ही रहती आई है लेकिन जब भी इन्हें अपनी ताकत में कटौती की जरा सी भी आशंका हुई या सरकार ज्यादा मजबूत होती दिखी तो उन्होंने उसे रास्ते से हटा दिया। सेना प्रमुख रहते हुए कोई फील्ड मार्शल बन गया तो कोई राष्ट्रपति। फील्ड मार्शल बन चुके सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब संविधान संशोधन के जरिए पाकिस्तान के सर्वे सर्वा और संविधान से ऊपर उठ जाना चाहते हैं। इसके लिए पाकिस्तान सरकार ने संविधान में 27वां संशोधन कर दिया। इस संशोधन प्रस्ताव पर पिछले दिनों राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हस्ताक्षर कर दिए। यह संशोदन प्रस्ताव सीनेट और नेशनल असंबेली से भी पारित हो गया है।

संवैधानिक ढांचे को तहस-नहस कर देगा यह संशोधन

हालांकि, संविधान के इस 27वें संशोधन को लेकर पाकिस्तान में विरोध-प्रदर्शन हो रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जो कि जेल में बंद हैं, उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) और वकील सहित बुद्धिजीवी वर्ग इस संशोधन के खिलाफ है। वे सड़कों पर उतरकर शहबाज सरकार और आसिम मुनीर का विरोध कर रहे हैं। समझा जाता है कि यह संशोधन पाकिस्तान के संवैधानिक ढांचे को पूरी तरह से तहस-नहस कर देगा। यह सरकार और सैन्य ढांचे की व्यवस्था में व्यापक फेरबदल करते हुए असली ताकत सेना प्रमुख/फील्ड मार्शल के हाथों में देगा।

क्या बदलाव लाएगा यह संशोधन?

27वें संविधान संशोधन के जरिए आसिम मुनीर को चीफ ऑफ डिफेंस फोर्स (सीओडीएफ) बनाया जाएगा। इस सीओडीएफ का ओहदा पाकिस्तान की थल सेना, नौसेना और वायु सेना प्रमुख से ऊपर होगा यानी ये तीनों सीओडीएफ को रिपोर्ट करेंगे। ये तीनों अधिकारी सीओडीएफ का हुक्म मानेंगे। यही नहीं पांच स्टार वाले अधिकारी यदि रिटायर भी हो जाते हैं तो उन्हें किसी अदालत में जवाबदेह नहीं ठहराया जाएगा। यानी अपराध में संलिप्तता या कानून का उल्लंघन करने पर भी उनके फैसलों को किसी अदालत में चुनौती में नहीं दी जा सकेगी। वे न्यायालयों से ऊपर होंगे। पाकिस्तान में यह छूट अभी राष्ट्रपति अथवा प्रधानमंत्री को भी नहीं है। इसके अलावा एक नए संघीय संवैधानिक कोर्ट के जरिए पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के अधिकारों को कमजोर बनाया जा रहा है। इस संघीय कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को हड़पने वाला बताया जा रहा है। इस संविधान संशोधन पर पाकिस्तान की सेना और शहबाज सरकार तो एक पेज पर हैं लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी पीटीआई पूरी तरह से इसके खिलाफ है। भ्रष्टाचार के मामले में इमरान खान तो जेल में बंद हैं लेकिन उनके नेता जो बाहर हैं, वे सड़क पर उतर कर इस संशोधन का विरोध कर रहे हैं।

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पाक में हो रहा 27वें संविधान संशोधन का विरोध। तस्वीर-AP

पाकिस्तान की विदेश नीति भी CODF तय करेगा

देश की राजनीतिक और आर्थिक संरचनाओं पर सेना का वर्चस्व ऐतिहासिक है लेकिन यह संशोधन सेना की घरेलू लोकप्रियता कम कर रही है। बावजूद इसके फील्ड मार्शल आसिम मुनीर सेना पर अपनी पकड़ मजबूत बनाते हुए अपने एजेंडे पर आगे बढ़ रहे हैं। 27वें संशोधन के जरिए पाकिस्तान की विदेश नीति को भी मुनीर अपनी निगरानी के दायरे में लाना चाहते हैं। यानी किसी देश के साथ कूटनीति, रक्षा सहयोग, आपसी संबंध सभी पर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज की राय या फैसला ही अंतिम माना जाएगा। संशोधन से सेना प्रमुख आसिम मुनीर को रक्षा बलों के प्रमुख (सीडीएफ) के रूप में 2030 तक पद पर बने रहने की अनुमति मिल जाएगी।

लाहौर में वकीलों की हड़ताल, जजों के हुए इस्तीफे

बीते रविवार को लाहौर में इस संशोधन के खिलाफ वकील हड़ताल पर चले गए। तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों - उच्चतम न्यायालय के दो न्यायाधीश न्यायमूर्ति सैयद मंसूर अली शाह, न्यायमूर्ति अतहर मिनल्लाह और लाहौर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति शम्स महमूद मिर्जा ने विवादास्पद संशोधन के खिलाफ इस्तीफा दे दिया। न्यायाधीशों ने इसे 'संविधान और न्यायपालिका पर हमला' करार दिया। लाहौर उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (एलएचसीबीए) ने इस्तीफा देने वाले न्यायाधीशों की उनके 'सिद्धांतवादी रुख' के लिए रविवार को उनकी सराहना की और सोमवार को लाहौर में अदालती कार्यवाही की हड़ताल की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वे न्यायपालिका और लोकतंत्र पर हमले के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए अदालती कार्यवाही का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।

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2020 तक सीओडीएफ पद पर बने रहेंगे आसिम मुनीर। तस्वीर-AP

जस्टिस शाह ने इसे ‘संविधान पर गंभीर हमला’बताया

बृहस्पतिवार को, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा 27वें संशोधन को मंजूरी दिए जाने के कुछ ही घंटों बाद इस्तीफा देने वाले उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सैयद मंसूर अली शाह ने संशोधन को ‘संविधान पर गंभीर हमला’बताया और कहा कि 27वें संशोधन ने पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय को तहस-नहस कर दिया, न्यायपालिका को कार्यपालिका के नियंत्रण में ला दिया और हमारे संवैधानिक लोकतंत्र के मूल पर प्रहार किया। यह संशोधन, अन्य क्षेत्रों में परिवर्तन लाने के अलावा, न्यायपालिका के कामकाज को दो क्षेत्रों में विभाजित कर देता है - संवैधानिक मामले और न्यायाधीशों का स्थानांतरण। इंटरनेशनल कमीशन ऑफ जूरिस्ट्स ने 27वें संशोधन के पारित होने को न्यायिक स्वतंत्रता पर एक ‘बड़ा हमला’करार दिया है।

लाहौर में पीटीआई ने मार्च निकाला

राजनीतिक पार्टियों में इस संशोधन का सबसे ज्यादा विरोध पीटीआई कर रही है। अपना विरोध जताते हुए पीटीआई सोमवार को पंजाब विधानसभा से वॉक आउट कर गई। पीटीआई के महासचिव सलमान अकरम रजा की अगुवाई में पार्टी के एमपीए ने चेरिंग क्रास तक मार्च किया। इस दौरान उन्होंने अपने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं जिन पर लिखा था कि '27वें संविधान संशोधन का हम विरोध करते हैं।' मीडिया से बातचीत करते हुए रजा ने कहा कि न्यायपालिका पर हमला हुआ है। यह संशोधन गरीबों और हाशिए के लोगों को न्याय नहीं दे पाएगा। उन्होंने कहा कि पीटीआई लोगों के साथ है। वह चुप नहीं रहेगी और इस लड़ाई को सड़क पर लेकर जाएगी।

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आलोक कुमार राव
आलोक कुमार राव Author

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारो... और देखें

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