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Iran US War: डील नहीं हुई तो ईरान पर क्या कार्रवाई कर सकता है अमेरिका, ट्रंप के पास कौन-कौन विकल्प बचे?

Iran US War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा ईरान के साथ समझौते के लिए तय की गई मंगलवार रात की डेडलाइन नजदीक आने के साथ ही मध्य-पूर्व से लेकर वॉशिंगटन तक बेचैनी और अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। ट्रंप बार-बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि यह समयसीमा अंतिम है और इसे बढ़ाना लगभग असंभव है। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी उनका अगला कदम क्या होगा? क्या यह समय सीमा वास्तव में अंतिम है या ट्रंप आखिरी पल में फिर से रुख बदल सकते हैं? साथ ही उनके पास और क्या-क्या विकल्प होंगे...

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आठ बजे के बाद क्या करेंगे ट्रंप? (फोटो- AI)
Authored by: Shiv Shukla
Updated Apr 7, 2026, 20:49 IST

Iran-US War: 'आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है,जो फिर कभी वापस नहीं आ पाएगी। मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो,लेकिन शायद ऐसा हो ही जाए। आज रात हम जानेंगे कि यह दुनिया के लंबे और जटिल इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक हो सकता है।...' ईरान से जारी जंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की ये सबसे बड़ी धमकी है। उनकी ये धमकी और तेवर तब सामने आए हैं जब होर्मुज को खोलने और समझौते के लिए दी गई 10 दिन की समयसीमा को पूरा होने में कुछ ही घंटे बाकी हैं। वहीं, ईरान की प्रतिक्रिया को देखते हुए अमेरिकी प्रस्ताव को मानने की उसकी संभावना कम ही दिखती है बावजूद इसके ट्रंप उस पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर पहले से दी गई समयावधि में ईरान ने अगर समझौता नहीं किया तो ट्रंप का अगला कदम क्या होगा? क्या ट्रंप फिर से इस समयावधि को बढ़ाएंगे? वे ईरान पर नभ-जल और थल तीनों रास्तों से ईरान पर धावा बोलेंगे? आज हम ऐसे ही उन विकल्पों के बारे में बात करेंगे...

बड़े पैमाने पर एयर-स्ट्राइक

ईरान (Iran) के न झुकने की स्थिति में ट्रंप के संभावित कदमों में सबसे पहला विकल्प बड़े पैमाने पर एयर स्ट्राइक कर सकते हैं। उन्होंने पहले भी इसके संकेत कई बार दिए हैं। बीते दिन भी ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान उनकी बात नहीं मानता है तो वे उसके सैन्य और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी एयर-स्ट्राइक करा सकते हैं। उन्होंने ईरान के पावर ग्रिड,ब्रिज और हाईवे, सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर, कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम, मिसाइल लॉन्च साइट्स को निशाना बनाने की बात कही थी।अगर अमेरिका एयर स्ट्राइक करता है तो B-2 स्टील्थ बमवर्षक,विमानवाहक पोतों से उड़ान भरने वाले लड़ाकू विमान,क्रूज मिसाइलें और साइबर ऑपरेशन शामिल होंगे।

यूएस आर्मी की जमीनी कार्रवाई

अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने एक विकल्प ईरान में जमीनी रास्ते से अपनी फोर्स घुसाना भी है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के पहले से ही लगभग 50,000 सैनिक मौजूद हैं। हालांकि ईरान का रास्ता खोलने के लिए ट्रंप को अपनी नेवी भी उतारनी होगी। फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के सामने समुद्री माइंस भी बड़ी चुनौती होंगे। वहीं, अगर खाड़ी और सहयोगी नाटों देशों के रुख को देखते हुए ये विकल्प काफी जोखिम भरा हो सकता है।

    ब्लैकआउट बम का इस्तेमाल

    ट्रंप के हालिया बयानों (विशेषतौर पर बीते दिन और आज के) को देखते हुए कई सैन्य विशेषज्ञ संभावना जता रहे हैं कि ट्रंप ईरान के पूरे इलेक्ट्रिक ग्रिड को निशाना बनाने के लिए 'ब्लैकआउट बम'का इस्तेमाल कर सकते हैं। BLU-114/Bनाम का यह हथियार ट्रांसफॉर्मरों में शॉर्ट-सर्किट पैदा करता है,जिससे पूरा इलेक्ट्रिक ग्रिड बैठ जाता है। इसमें विस्फोट नहीं होता और ढांचा स्थायी रूप से नष्ट नहीं होता,लेकिन पूरा देश अंधेरे में चला जाता है। अमेरिका ने 1991 के खाड़ी युद्ध में इसी के जरिए इराक की 85% बिजली काट दी थी।

    डिसकॉम्बोबुलेटर के प्रयोग की भी संभावना

    इसके अलावा,'डिसकॉम्बोबुलेटर'के प्रयोग भी संभावना है। बेहद रहस्यमयी इस हथियार के बारे में अभी बहुत कम जानकारी है। ट्रंप ने पहली बार वेनेज़ुएला के तानाशाह निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के दौरान इसके इस्तेमाल का दावा किया था। ट्रंप ने दावा किया था कि इसके इस्तेमाल के जरिए उन्होंने वेनेजुएला के सभी हथियारों को फ्रीज कर दिया था। उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेस में कहा था कि वेनेजुएला के सैनिक अमेरिकी जवानों के लिए तैयार थे, लेकिने वे कुछ नहीं कर पाए।

    परमाणु और मिसाइल ठिकाने भी हो सकते हैं अगला बड़ा निशाना

    ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों को लेकर अमेरिका भले ही दावा कर चुका है कि उनका बड़ा हिस्सा पहले ही नष्ट कर दिया गया है,लेकिन अब भी कुछ महत्वपूर्ण ठिकाने बचे हैं, इनमें इस्फ़हान के भूमिगत मिसाइल साइट्स, फोर्दो और नतांज के परमाणु संयंत्र, IRGC के बेस और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। ऐसे में अगर हमला होता है तो ये सभी हाई-प्रायोरिटी टारगेट होंगे।

    ईरान की अर्थव्यवस्था को दे सकते हैं बड़ी चोट

    सूत्रों का कहना है कि अगर ईरान ने उनकी बात नहीं मानी तो अमेरिका ईरान की ऊर्जा ढांचों को भी निशाना बना सकता है। इनमें साउथ पार्स गैस फील्ड और बड़े पेट्रोकेमिकल केंद्र शामिल हैं। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को गहरे स्तर पर झटका पहुंच सकता है।

    तेल टर्मिनलों या शिपिंग हब पर कब्जा

    इसके अलावा, अगर हमला होता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी होर्मुज जलडमरूमध्य को जबरन खोलने की कोशिश कर सकते हैं और तेल टर्मिनलों या शिपिंग हब पर कब्जा या नियंत्रण स्थापित कर सकते हैं।

    ईरान के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को कर सकते हैं तबाह

    इसके अलावा, यह भी संकेत मिले हैं कि ईरान के परिवहन नेटवर्क खास तौर पर रेलवे अमेरिकी या इज़राइली निशाने पर हो सकता है, ताकि IRGC की मूवमेंट को पूरी तरह बाधित किया जा सके।

    फिर बढ़ा सकते हैं डेडलाइन

    वहीं,ट्रंप के सामने एक विकल्प ईरान को दी गई डेडलाइन बढ़ाना भी है। वे पहले ही तीन बार डेडलाइन बढ़ा चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप सरकार के कुछ लोगों का भी यह कहना है कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप को समझौते को लेकर आखिरी समय में भी कोई ठोस प्रगति दिखती है तो वे कार्रवाई को कुछ समय के लिए रोक सकते हैं। कहा जा सकता है कि अभी भी एक छोटी-सी उम्मीद बची हुई है। इसी दिशा में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे मध्यस्थ देश 45 दिन के एक लंबे सीजफायर का प्रस्ताव लेकर आगे आए हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है यह फैसला सिर्फ वही लेते हैं और हालिया हालात देखकर इस बार समय बढ़ाए जाने पर संदेह है।

    End of Article