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युद्ध के दौर के बाद US-IRAN डील फाइनल होने के करीब, क्या हैं 5 सबसे बड़ी चुनौतियां?

यूएस-ईरान डील को लेकर कई बड़े अनसुलझे सवाल भी जुड़े हैं। इसमें ईरान पर प्रतिबंधों में ढील और ईरान की जब्त संपत्तियों तक पहुंच से लेकर तेहरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने जैसे मुद्दे बाधा बन सकते हैं।

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यूएस-ईरान की डील की चुनौतियां? (AI Image)
Authored by: Amit Mandal
Updated Jun 14, 2026, 14:20 IST
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Iran-US Deal Challenges: फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और ईरान किसी समझौते पर पहुंचने के सबसे करीब नजर आ रहे हैं। दोनों देशों ने संकेत दिया है कि समझौते का ड्राफ्ट लगभग तैयार है। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, एक ड्राफ्ट तैयार हो गया है और वाशिंगटन को उम्मीद है कि कुछ ही दिनों में इसे औपचारिक रूप दे दिया जाएगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी प्रगति के संकेत दिए हैं, हालांकि उन्होंने कहा कि अंतिम घोषणा से पहले बदलाव संभव हैं। फिर भी कई बड़े अनसुलझे सवाल भी जुड़े हैं। इसमें ईरान पर प्रतिबंधों में ढील और ईरान की जब्त संपत्तियों तक पहुंच से लेकर तेहरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने जैसे मुद्दे बाधा बन सकते हैं। समझने की कोशिश करते हैं कि इस डील को लेकर आगे क्या चुनौतियां हैं।

वाशिंगटन और तेहरान समझौते के कितने करीब हैं?

अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि दोनों पक्ष एक मसौदे पर सहमत हो गए हैं और चर्चाएं बहुत अच्छी स्थिति में हैं। ईरानी अधिकारियों ने भी इसी तरह स्वीकार किया कि एक शुरुआती सहमति बन गई है। ईरानी सरकारी टेलीविजन पर बोलते हुए अराघची ने इसे तेहरान के लिए फायदेमंद बताया। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका के साथ युद्ध का विजेता है। पश्चिमी राजनयिक सूत्रों ने संकेत दिया है कि जिनेवा को संभावित स्थान के रूप में विचार किया जा रहा है। कहा गया है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ इसमें हिस्सा ले सकते हैं।

अराघची ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक घोषणा से पहले समझौते पर दूर से हस्ताक्षर किए जाएंगे। डील की सुगबुगाहट के बीच सैन्य तनाव पूरी तरह से कम नहीं हुआ है। राजनयिक बयानों के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे कई ईरानी एकतरफा हमलावर ड्रोन को रोका। ड्रोन को वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा माना जा रहा था। इस बीच, ईरानी मीडिया ने सिरिक बंदरगाह और केशम द्वीप के पास धमाकों की सूचना दी।

प्रस्तावित समझौते के मुख्य बिंदु क्या?

वार्ता में शामिल सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित ज्ञापन दो प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित है: होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान पर आर्थिक दबाव कम करना। रिपोर्ट के मुताबिक, मसौदा समझौते में अरबों डॉलर की फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को धीरे-धीरे जारी करने और ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में छूट देने की मांग की गई है। इसके बदले में तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाल करने में मदद करेगा। यह जलमार्ग युद्ध में सबसे अहम मुद्दा बन गया। यातायात बाधित होने से पहले, दुनिया के लगभग एक-पांचवें तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन इस संकरे समुद्री गलियारे से होता था। जहाजरानी पर प्रतिबंधों के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ीं और वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। अराघची ने संकेत दिया कि ईरान, ओमान के साथ मिलकर, इस मार्ग पर अपना अहम प्रभाव बनाए रखेगा। उन्होंने कहा, हमारी तलवार हमेशा होर्मुज जलडमरूमध्य पर लटकी रहेगी।

डील के लेकर 5 बड़ी चुनौतियां

परमाणु कार्यक्रम

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी और सीमाएं कितनी सख्त रहेंगी?

प्रतिबंथों में ढील

कब और कितने हद तक हटाए जाएंगे आर्थिक प्रतिबंध?

फ्रीज संपत्तियों तक पहुंच

ईरान की जब्त संपत्तियों को वापस करने पर क्या सहमति बनेगी

होर्मुज का संकट

इस रणनीतिक जलमार्ग को खोलने और सुरक्षा की क्या गारंटी होगी?

क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा

क्या डील से मध्य पूर्व में तनाव कम होगा या नए खतरे पैदा होंगे?

क्या इस युद्ध से ट्रंप के सैन्य उद्देश्य पूरे हुए?

अब सवाल यह है कि क्या इस युद्ध ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वरिष्ठ प्रशासन अधिकारियों द्वारा बार-बार बताए गए लक्ष्यों को हासिल किया। सबसे अधिक बार जिक्र किए गए उद्देश्यों में से एक ईरान की मिसाइल क्षमताओं को कम करना था। युद्ध के शुरुआती महीनों में ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के लगभग 90 प्रतिशत मिसाइल भंडार और प्रक्षेपण इंफ्रास्ट्र्क्चर को नष्ट कर दिया गया है। हालांकि, मई तक राष्ट्रपति द्वारा दिया गया अनुमान बदल गया था और ट्रंप ने कहा कि इन क्षमताओं का 82 प्रतिशत ही नष्ट किया गया।

सैन्य आकलन बताते हैं कि तेहरान के पास हमले जारी रखने की कुछ क्षमता अभी भी मौजूद है। वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने सांसदों को बताया कि ईरान के पास सीमित लेकिन निरंतर हमले करने की क्षमता है। संघर्ष के दौरान हुई घटनाओं से इस आकलन की पुष्टि होती दिखी। ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले और क्षेत्र में ड्रोन संचालन सहित हमले जारी रखे। एक अन्य उद्देश्य ईरान के रक्षा उत्पादन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाना था। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने कहा कि उसके अभियानों ने मिसाइल उत्पादन, ड्रोन निर्माण और हथियार विकास से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बाद में सांसदों को बताया कि ईरान के रक्षा औद्योगिक आधार को व्यापक क्षति पहुंची है और इसके पुनर्निर्माण में वर्षों लगेंगे।

परमाणु कार्यक्रम को लेकर कौन से मुद्दे अनसुलझे?

शायद सबसे महत्वपूर्ण अनसुलझा मुद्दा ईरान की परमाणु गतिविधियों से संबंधित है। पूरे संघर्ष के दौरान, ट्रंप प्रशासन ने बार-बार ईरान की परमाणु क्षमताओं को नष्ट करना एक प्रमुख उद्देश्य बताया। फिर भी, बातचीत के अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद तेहरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार से निपटने के तरीके पर असहमति बनी हुई है। एक प्रमुख मुद्दा लगभग 970 पाउंड समृद्ध यूरेनियम है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह उन परमाणु सुविधाओं के नीचे स्थित है जिन्हें पहले अमेरिका और इजराइल के हमलों का निशाना बनाया गया था। ट्रम्प ने मई के अंत में कहा था कि ईरान और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सहयोग से इस सामग्री को बरामद कर नष्ट कर दिया जाएगा।

हालांकि, ईरान ने सार्वजनिक रूप से इस नजरिए का समर्थन नहीं किया है। बातचीत से संबंधित चर्चाओं को लेकर विशेषज्ञों का तर्क है कि तेहरान के सहयोग के बिना इस सामग्री को जब्त करने के किसी भी कोशिश के लिए सैन्य तैनाती की जरूरत होगी और इसमें काफी जोखिम होंगे। प्रशासन का कहना है कि यूरेनियम भंडार के संबंध में सैद्धांतिक सहमति है, लेकिन व्यावहारिक व्यवस्थाओं पर अभी भी बातचीत चल रही है।

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