एक्सप्लेनर्स

क्या है इंटरनेशनल सोलर एलायंस, जिससे बाहर हुए ट्रंप? भारत-US को नुकसान तो चीन को होगा फायदा

International Solar Alliance: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) से बाहर होने के फैसले को विशेषज्ञ भारत-अमेरिका रिश्तों और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा प्रयासों के लिए नुकसानदेह मान रहे हैं। भारत-फ्रांस की अगुवाई वाले इस संगठन से हटकर अमेरिका न सिर्फ सोलर सेक्टर में निवेश और रोजगार के मौके खो सकता है, बल्कि चीन को वैश्विक सौर ऊर्जा बाजार में बढ़त भी मिल सकती है।

ट्रंप का सेल्फ गोल! (1)

राष्ट्रपति ट्रंप ने इंटरनेशनल सोलर एलांयस से अमेरिका को बाहर निकालने का किया फैसला।(फोटो सोर्स: AP)

Photo : AP
KEY HIGHLIGHTS
  • ट्रंप के फैसले से भारत–अमेरिका संबंधों में खटास आ सकती है।
  • इंटरनेशनल सोलर एलायंस से बाहर होना वैश्विक क्लीन एनर्जी प्रयासों को कमजोर कर सकता है।
  • विशेषज्ञों के मुताबिक इस कदम से चीन को रणनीतिक फायदा मिल सकता है।

International Solar Alliance: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कई ऐसे बयान दिए जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी है। इतना ही नहीं, उन्होंने 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकालने का फैसला किया है। इनमें संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कई निकायों के साथ-साथ भारत-फ्रांस के नेतृत्व वाला अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (इंटरनेशनल सोलर एलांयस) भी शामिल है। ट्रंप प्रशासन (Trump) ने इन संस्थाओं को अमेरिका के हितों के लिए अनावश्यक और विरोधी करार दिया है।

इंटरनेशनल सोलर एलांयस (ISA) से अमेरिका को बाहर निकालने के पीछे ट्रंप ने जो तर्क दिया है, वो समझ से परे है। दरअसल, इस फैसले के बाद भारत और अमेरिका के बीच पिछले तीन दशकों से बने मजबूत रिश्तों में दरार तो पड़ेगी ही, साथ ही यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बुरी खबर है। मोटे तौर पर कहें तो ट्रंप ने खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा काम किया है।

trump ap

ट्रंप ने 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकालने का फैसला किया है।(फोटो सोर्स: AP)

चीन के लिए गिफ्ट

ट्रंप ने ISA से बाहर निकलने का फैसला लेते हुए चीन को बड़ा 'तोहफा' भी दे दिया है। अमेरिका के पूर्व जलवायु दूत जॉन केरी ने ट्रंप प्रशासन से इस कदम पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि ट्रंप का यह फैसला चीन के लिए 'गिफ्ट' की तरह है क्योंकि ड्रैगन और उन देशों को प्रदूषण फैलाने वाली ताकतों को छूट मिल जाएगी जो अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहते हैं। इसके अलावा, अमेरिका ट्रिलियन डॉलर के निवेश और रोजगार के अवसरों को भी खो देगा जो क्लीन एनर्जी सेक्टर से विकसित होने वाले हैं यानी ट्रंप ने इस फैसले के जरिए 'सेल्फ गोल' ही किया है।

अमेरिका को क्या नुकसान होगा? इसे जानने से पहले जान लेते हैं कि आखिर इंटरनेशनल सोलर एलायंस है क्या

दरअसल, इस संगठन की शुरुआत 2015 में पेरिस जलवायु शिखर सम्मेलन (COP21) के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने की थी। इस संगठन का हेडक्वाटर हरियाणा के गुरुग्राम में है। इसका लक्ष्य 2030 तक सौर ऊर्जा में 1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश जुटाना था।

इसके अलावा विकासशील देशों को सस्ती सौर तकनीक और फाइनेंस उपलब्ध कराना ताकि वे प्रदूषण बढ़ाए बिना अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर सकें। बता दें कि अमेरिका 2021 में इस संगठन में शामिल हुआ था।

isa

इंटरनेशनल सोलर एलांयस से जुड़े सदस्य देशों के नेताओं की फाइल फोटो। (फोटो सोर्स: ISA)

ISA के सदस्य देश

120 से ज्यादा देश इस संगठन के सदस्य हैं।

संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश आईएसए में शामिल होने के पात्र हैं।

आईएसए की प्रमुख परियोजनाएंवन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड (OSOWOG)

इसका उद्देश्य एक वैश्विक सौर ऊर्जा नेटवर्क स्थापित करना है ताकि हर कोई सौर ऊर्जा का उपयोग कर सके।

सौर प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोग संसाधन केंद्र (ISTAR-C)

यह सौर ऊर्जा में प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण के लिए केंद्रों का एक नेटवर्क है।

आईटीईसी प्रशिक्षण कार्यक्रम

यह भारत सरकार द्वारा पूर्णतः वित्त पोषित 21 दिवसीय सौर ऊर्जा प्रशिक्षण कार्यक्रम है।

ISA का मकसद क्या है?

ISA का फोकस मुख्य रूप से इन बातों पर है:

  • सोलर एनर्जी की लागत कम करना
  • विकासशील देशों को सौर तकनीक और फाइनेंस उपलब्ध कराना
  • क्लाइमेट चेंज से निपटने में मदद
  • फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता घटाना
  • ग्लोबल सोलर सप्लाई चेन को मजबूत करना
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मानें तो आईएसए से हटना केवल एक जलवायु संबंधी फैसला नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका के रिश्तों के लिए भी हानिकारक है। बता दें कि टैरिफ और ट्रेड डील की वजह से पहले से ही दोनों देशों के रिश्तों में खटास पैदा हो चुकी है। हाल ही में अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बड़ा दावा किया है। अमेरिका के मंत्री ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया था, इसलिए ये डील नहीं हुई थी।
modi trump

व्हाइट हाउस में हुए ट्रंप और पीएम मोदी की मुलाकात की तस्वीर।(फोटो सोर्स: AP)

जब ट्रंप ने पेरिस एग्रीमेंट से बाहर होने का किया था फैसला

यह पहली बार नहीं है कि ट्रंप ने जलयावु परिवर्तन को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया हो। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने 1 जून 2017 को औपचारिक रूप से घोषणा की थी कि अमेरिका पेरिस जलवायु समझौते (Paris Agreement) से बाहर होगा।

हालांकि, समझौते के नियमों के कारण अमेरिका की आधिकारिक वापसी 4 नवंबर 2020 को हुई। ट्रंप ने इसे अमेरिका की अर्थव्यवस्था और नौकरियों के लिए नुकसानदेह बताते हुए यह फैसला लिया था। बाद में जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने पर अमेरिका 2021 में फिर से पेरिस एग्रीमेंट में शामिल हो गया।

trump new

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान पेरिस एग्रीमेंट से बना ली थी दूरी।(फोटो सोर्स: AP)

ट्रंप ने क्यों लिया था ये फैसला?

ये ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने से जुड़ा एग्रीमेंट था। अमेरिका में चूंकि इंडस्ट्रीज के चलते ग्रीन हाउस एमिशन ज्यादा है, लिहाजा उसका टारगेट भी बड़ा था। ट्रंप प्रशासन ने उस समय इसे देश के आर्थिक हितों के खिलाफ बताते हुए साफ कर दिया वे इससे अलग हो रहे हैं

Piyush Kumar
Piyush Kumar author

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घट... और देखें

End of Article