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क्यों अटकी रही भारत-बांग्लादेश बॉर्डर फेंसिंग? सुवेंदु सरकार से कैसे बदलेगा बंगाल बॉर्डर

India-Bangladesh Border Fencing: भारत-बांग्लादेश सीमा पर पश्चिम बंगाल में लंबे समय से रुकी फेंसिंग को अब नई सरकार ने तेज करने का फैसला लिया है। बीजेपी सरकार ने बीएसएफ को जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि घुसपैठ और तस्करी पर रोक लगाई जा सके।

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बंगाल में तेज होगी भारत-बांग्लादेश बॉर्डर फेंसिंग (AI Generated)
Authored by: monu jha
Updated May 11, 2026, 22:29 IST

India-Bangladesh Border Fencing: भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल से होकर गुजरता है। पश्चिम बंगाल की सीमा लगभग 2,216 किलोमीटर लंबी है। लंबे समय से केंद्र सरकार और सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force) इस सीमा पर फेंसिंग यानी कंटीले तारों की बाड़ लगाने का काम कर रहे हैं। इसका मकसद अवैध घुसपैठ, तस्करी और सुरक्षा से जुड़े खतरों को रोकना है। लेकिन पश्चिम बंगाल में यह काम कई सालों तक धीमी रफ्तार से चलता रहा और इसी वजह से यह मुद्दा राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए अहम बन गया।

पश्चिम बंगाल में करीब 1,647 किलोमीटर सीमा पर फेंसिंग का काम पूरा

मौजूदा आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल (Bengal Border Fencing) में करीब 1,647 किलोमीटर सीमा पर फेंसिंग का काम पूरा हो चुका है। यानी लगभग 74 प्रतिशत इलाके में बाड़ लग चुकी है। हालांकि अभी भी करीब 569 किलोमीटर हिस्सा बिना फेंसिंग के है। इसमें लगभग 113 किलोमीटर ऐसा इलाका है, जहां तकनीकी कारणों से फेंसिंग लगाना मुश्किल माना जाता है। ये मुख्य रूप से नदी वाले क्षेत्र हैं, जहां नदियां बार-बार अपना रास्ता बदलती रहती हैं। इच्छामती और पद्मा जैसी नदियों के किनारे कई जगहों पर जमीन स्थिर नहीं रहती, इसलिए वहां स्थायी बाड़ लगाना आसान नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में बीएसएफ नावों और विशेष निगरानी व्यवस्था के जरिए सुरक्षा करती है।

(Photo: AI Generated)

(Photo: AI Generated)

बड़ी मात्रा में जमीन का अधिग्रहण का काम रहा बाकी

बाकी करीब 456 किलोमीटर क्षेत्र ऐसा है, जहां फेंसिंग लगाई जा सकती है, लेकिन वहां जमीन से जुड़े मामले लंबे समय तक अटके रहे। जानकारी के मुताबिक पिछली राज्य सरकार के दौरान केवल लगभग 78 किलोमीटर तक की जमीन ही केंद्र सरकार या बीएसएफ को सौंपी गई थी। बड़ी मात्रा में जमीन का अधिग्रहण बाकी रहा। कुछ हिस्सों में प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई थी, जबकि कई जगह फाइलें सरकारी मंजूरी के स्तर पर अटकी हुई थीं।

(Photo: iStock)

(Photo: iStock)

सीमा सुरक्षा में देरी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा-अमित शाह

इस देरी को लेकर राज्य की पूर्व सरकार पर कई आरोप लगे। विपक्षी दल भाजपा और केंद्र सरकार का कहना था कि फेंसिंग का काम राजनीतिक कारणों से रोका जा रहा है। बीजेपी नेताओं का आरोप था कि अवैध घुसपैठ रोकने के बजाय वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता दी गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कई बार कहा कि सीमा सुरक्षा में देरी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। मामला अदालत तक भी पहुंचा। कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) ने कई बार इस मुद्दे पर राज्य सरकार को फटकार लगाई।

(Photo: iStock)

(Photo: iStock)

सीएम सुवेंदु ने पहली कैबिनेट बैठक में लिया बड़ा फैसला

अदालत ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बताते हुए समयसीमा के भीतर कार्रवाई करने को कहा था। इसके बावजूद काम में खास प्रगति नहीं हो पाई। अब 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद स्थिति बदलती नजर आ रही है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने सीमा फेंसिंग को प्राथमिकता देने की घोषणा की है। अपनी पहली कैबिनेट बैठक में उन्होंने बीएसएफ को जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज करने का फैसला लिया। सरकार ने करीब 600 एकड़ जमीन जल्द उपलब्ध कराने की दिशा में काम शुरू किया है। अधिकारियों को 45 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य दिया गया है।

क्यों जरूरी है फेंसिंग?

सरकार का कहना है कि इससे सीमा पर सुरक्षा मजबूत होगी और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। पूरी फेंसिंग होने से घुसपैठ, ड्रग्स और नकली नोटों की तस्करी जैसे मामलों पर नियंत्रण आसान होगा। साथ ही बीएसएफ को निगरानी और कार्रवाई करने में भी ज्यादा सुविधा मिलेगी। हालांकि नदी वाले इलाकों में अब भी तकनीकी चुनौतियां बनी हुई हैं। वहां स्थायी समाधान निकालना आसान नहीं है। इसके बावजूद केंद्र और राज्य सरकार अब इस काम को तेजी से आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि तय समयसीमा में कितना काम पूरा हो पाता है और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आगे कौन-कौन से कदम उठाए जाते हैं।

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