Explained: ग्रीनलैंड पर यूरोप के साथ ट्रंप के विवाद से रूस को कैसे हो सकता है फायदा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को फिर दोहराया कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने के अपने लक्ष्य से पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने सेना के दम पर आर्कटिक द्वीप पर कब्जा करने की संभावना से इनकार नहीं किया और नाटो सहयोगियों पर जमकर हमला बोला। ट्रंप की महत्वाकांक्षा सोशल मीडिया पोस्ट और एआई इमेज में साफ तौर पर दिखाई देती है।
- Authored by: अमित कुमार मंडल
- Updated Jan 21, 2026, 11:35 PM IST
ग्रीनलैंड पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजरें हैं और यूरोप के साथ तनातनी लगातार बढ़ रही है। यूक्रेन शांति योजना के मुद्दे पर अपना प्लान सिरे न चढ़ते देख ट्रंप व्लादिमीर पुतिन से तंग आ चुके थे। ट्रप वर्षों से पुतिन की एक सशक्त नेता के रूप में प्रशंसा करते रहे थे, लेकिन यूक्रेन समझौते पर रूसी राष्ट्रपति के बातचीत के लिए तैयार न होने से निराश दिखाई दिए। हालांकि, अब स्थिति बदल गई है। ट्रंप का पूरा ध्यान ग्रीनलैंड पर है और पुतिन को इससे बड़ा फायदा हो सकता है। दरअसल, ट्रंप अब ग्रीनलैंड को लेकर उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) गठबंधन के कई सदस्यों सहित यूरोपीय देशों के साथ मतभेद चरम पर पहुंचा चुके हैं। इस पूरे मामले में रूस को किस तरह का फायदा हो सकता है, जानने की कोशिश करते हैं।
ग्रीनलैंड पर क्या है ट्रंप की मंशा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को फिर दोहराया कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने के अपने लक्ष्य से पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने सेना के दम पर आर्कटिक द्वीप पर कब्जा करने की संभावना से इनकार नहीं किया और नाटो सहयोगियों पर जमकर हमला बोला। लेकिन बाद में ट्रंप ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्हें लगता है कि हम कुछ ऐसा हल निकालेंगे जिससे नाटो भी बहुत खुश होगा और हम भी बहुत खुश होंगे। बातों को अक्सर बदल देना ट्रंप की खूबी है। ट्रंप की महत्वाकांक्षा सोशल मीडिया पोस्ट और एआई इमेज में साफ तौर पर दिखाई देती है। उनकी मंशा नाटो के सदस्य डेनमार्क से ग्रीनलैंड की संप्रभुता छीनने की है, जिससे दशकों से पश्चिमी सुरक्षा का आधार रहे गठबंधन के टूटने का खतरा मंडरा रहा है। इससे यूरोप के साथ व्यापार युद्ध के फिर से भड़कने का भी खतरा है, जिसने पिछले साल बाजारों और कंपनियों को हिलाकर रख दिया था।
ग्रीनलैंड के साथ कनाडा को भी पाने का ख्वाब
मंगलवार को नाटो महासचिव मार्क रुट्टे से बात करने के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा- ग्रीनलैंड राष्ट्रीय और विश्व सुरक्षा के लिए जरूरी है। इससे पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं है, इस पर सभी सहमत हैं। अपने संदेश को और पुख्ता करने के लिए उन्होंने ग्रीनलैंड में अमेरिकी झंडा पकड़े हुए अपनी एक कृत्रिम छवि पोस्ट की। एक अन्य छवि में उन्हें नेताओं से बात करते हुए दिखाया गया है, जिसके बगल में एक नक्शा है जिसमें कनाडा और ग्रीनलैंड को संयुक्त राज्य अमेरिका का हिस्सा दिखाया गया है। बाद में जब उनसे पूछा गया कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए वे कितनी दूर तक जाने को तैयार हैं, तो ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा, आपको पता चल जाएगा।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री का रुख भी अडिग
इसके अलावा, ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सहित कई संदेशों को लीक किया, जिनमें मैक्रोंन ने ट्रंप के ग्रीनलैंड पर किए जा रहे कार्यों पर सवाल उठाए थे। ट्रंप ने इससे पहले फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। डेनमार्क की प्रधानमंत्री का रुख अभी भी अडिग है।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि वह ट्रंप की मांगों के आगे नहीं झुकेंगी और ग्रीनलैंड को नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने पत्रकारों से कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति ने दुर्भाग्य से सेना के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया है। इसलिए हम भी इससे इनकार नहीं कर सकते।
मैक्रों ने कहा कि यूरोपीय संघ को ताकतवर के कानून के आगे नहीं झुकना चाहिए। दावोस में हुई बैठक में मैक्रों ने कहा, हमारा मानना है कि हमें और अधिक विकास और स्थिरता की जरूरत है, लेकिन हम दादागिरी करने वालों के बजाय सम्मान को प्राथमिकता देते हैं। कुछ लोगों ने सुरक्षा के लिए अमेरिका पर यूरोपीय निर्भरता को कम करने के महत्व पर जोर दिया। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने एक बड़े बदलाव का जिक्र किया, जिसके कारण यूरोपीय आजादी का एक नया स्वरूप बनाना बेहद जरूरी हो गया है।
रूस को आखिर कैसे हो सकता है फायदा?
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप द्वारा नाटो गठबंधन पर किए जा रहे हमले को देखकर रूस अपनी खुशी मुश्किल से छिपा पा रहा है। नाटो पर मौजूदा तनाव असर और यूक्रेन युद्ध पर इसके संभावित प्रभाव ने रूस को खुश होने का मौका दे दिया है। जाहिर है, अगर नाटो कमजोर होता है तो सीधा फायदा रूस को होगा। पोलिटिको के अनुसार, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि इस तरह की घटना की कल्पना करना पहले मुश्किल था। लावरोव ने नाटो को एक एकीकृत पश्चिमी सैन्य-राजनीतिक गुट के रूप में बनाए रखने की धूमिल होती संभावनाओं की ओर इशारा किया। लावरोव ने दावा किया कि नाटो गहरे संकट में है और कहा कि ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का नियंत्रण औपनिवेशिक अतीत का अवशेष है। उन्होंने कहा कि सिद्धांत रूप में ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वाभाविक हिस्सा नहीं है।
क्रेमलिन कर रहा ट्रंप की जमकर तारीफ
वहीं, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने सोमवार को ट्रंप की जमकर प्रशंसा की। पेस्कोव ने कहा, कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनलैंड को नाटो में शामिल करने के मुद्दे को सुलझाकर ट्रंप निश्चित रूप से इतिहास में अपना नाम दर्ज कराएंगे, न सिर्फ संयुक्त राज्य अमेरिका के इतिहास में बल्कि विश्व इतिहास में भी। क्रेमलिन समर्थक राजनीतिक विश्लेषक सर्गेई मार्कोव ने अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा, ग्रीनलैंड एक आदर्श समाधान है। मार्कोव ने कहा कि ग्रीनलैंड को लेकर चल रहे विवाद के कारण नाटो भंग हो सकता है। उन्होंने आगे कहा, तब यूरोपीय संघ रूस के खिलाफ अपना युद्ध रोकने के लिए मजबूर हो जाएगा। मार्कोव ने द मॉस्को टाइम्स को बताया, डेनमार्क ने रूस विरोधी उन्माद को हवा देने पर जोर देते हुए बार-बार झूठ बोला कि ग्रीनलैंड को रूस से खतरा है। वास्तव में खतरा क्या था, वे इसका स्पष्टीकरण भी नहीं दे सके, लेकिन उन्होंने रूसी खतरे के बारे में बार-बार झूठ बोला।
