कितना ताकतवर है यूरोपीय संघ? कैसे करता है यह काम, ट्रेड पर क्या है इसकी नीति
ट्रेड डील पर हस्ताक्षर होने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि 'आज यूक्रेन, पश्चिम एशिया सहित वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। विश्व उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में भारत और यूरोपियन यूनियन की साझेदारी अंतरराष्ट्रीय सिस्टम में स्थिरता को मजबूती देगी'। ट्रेड डील की तारीफ करते हुए पीएम ने कहा कि 'यह समझौता साझा समृद्धि का ब्लू प्रिंट है।
- Written by: आलोक कुमार राव
- Updated Jan 27, 2026, 02:48 PM IST
India EU Trade deal : भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को अपने बहु-चर्चित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर अपनी मुहर लगा दी। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वोन डेर लेयेन की मौजूदगी में दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रियों ने इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। बदलते वैश्विक परिदृश्य खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ की धमकियों एवं दबावों के बीच भारत-EU की यह डील बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस डील के कई मायने हैं। पीएम मोदी ने इस डील को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि 'यह समझौता साझा समृद्धि का ब्लू प्रिंट है।' इस डील के तहत दोनों देश एक-दूसरे के उत्पादों पर कम से कम टैरिफ लगाने पर सहमत हुए हैं। इस डील के अलावा रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक भागीदारी एवं सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए भारत और EU के बीच भी एक समझौता हुआ है।
'यह समझौता साझा समृद्धि का ब्लू प्रिंट है'
ट्रेड डील पर हस्ताक्षर होने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि 'आज यूक्रेन, पश्चिम एशिया सहित वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। विश्व उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में भारत और यूरोपियन यूनियन की साझेदारी अंतरराष्ट्रीय सिस्टम में स्थिरता को मजबूती देगी'। ट्रेड डील की तारीफ करते हुए पीएम ने कहा कि 'यह समझौता साझा समृद्धि का ब्लू प्रिंट है। हम मोबिलिटी के नया फ्रेमवर्क बना रहे है। साइंस और टेक्नोलॉजी में हमारा व्यापक संबंध रहा है। इससे काउंटर टेररिज्म साइबर सिक्योरिटी, मैरीटाइम सिक्योरटी के खिलाफ हमारी लड़ाई मजबूत होगी। इंडो पैसिफिक में हमारा दायरा बढ़ेगा। अगले 5 वर्ष के लिए कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप एजेंडा लॉन्च कर रहे है।'
हैदराबाद हाउस में यूरोपीय नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी। तस्वीर-PIB
मैं एक नया ओवरसीज इंडियन सिटिजन भी-कोस्टा
ईयू परिषद के अध्यक्ष कोस्टा ने कहा कि भारत की क्षमताओं और विविधता का यह प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली है। आज एक ऐतिहासिक क्षण है। हम अपने संबंधों में एक नया अध्याय खोल रहे हैं-व्यापार में, सुरक्षा में और लोगों के आपसी संबंधों में। मैं यूरोपीय परिषद का अध्यक्ष हूं, लेकिन मैं अब एक नया ओवरसीज इंडियन सिटिजन भी हूं।' उन्होंने कहा कि 'जैसा कि आप समझ सकते हैं, मेरे लिए इसका विशेष महत्व है। मुझे अपनी गोवा की जड़ों पर गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आया था। यूरोप और भारत के बीच का यह संबंध मेरे लिए व्यक्तिगत है।'
क्या है यूरोपीय आयोग?
यूरोपीय आयोग, यूरोपीय यूनियन का मुख्य एग्जीक्यूटिव संस्था है। इसका मुख्य काम नए कानून एवं नीतियां बनाना है। इसके अलावा वह ईयू के बजट की देखरेख एवं प्रबंधन भी करता है। यूरोपीय आयोग का मुख्यालय ब्रुसेल्स में है। आयोग यह देखता है कि यूनियन के सभी सदस्य देशों के बीच उसकी नीतियां सही तरीके से लागू हो रही हैं या नहीं। यह ईयू की तरफ से वैश्विक मंचों उसका प्रतिनिधित्व एवं फंड का आवंटन करता है। यूरोपीय आयोग के अलावा ईयू की अन्य छह संस्थाएं भी हैं-
- यूरोपीय संसद
- काउंसिल ऑफ द ईयू
- यूरोपियन काउंसिल
- कोर्ट ऑफ जस्टिस ऑफ द ईयू
- यूरोपियन सेंट्रल बैंक
- यूरोपियन कोर्ट ऑफ ऑडिटर्स
यूरोपीय आयोग, यूरोपीय संघ (EU) की एकमात्र संस्था है जो संसद और परिषद द्वारा अपनाए जाने के लिए कानूनों का प्रस्ताव रखती है। जब इसके प्रस्तावों को यूरोपीय संसद और EU के 27 सदस्य देशों के मंत्रियों की परिषद से मंजूरी मिल जाती है, तब वे कानून का रूप ले लेते हैं। आयोग वार्षिक बजट भी तैयार करता है, जिसे परिषद और संसद की मंजूरी मिलती है, और बजट के क्रियान्वयन की निगरानी करता है। यदि कोई सदस्य देश EU के कानूनों का पालन नहीं करता, तो आयोग उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA पर हुए हस्ताक्षर। तस्वीर-PIB
कैसे होता है EU का गठन, कैसे करता है काम
यूरोपीय आयोग में 27 आयुक्त होते हैं, जिनमें से प्रत्येक EU के एक-एक सदस्य देश से होता है। इस संस्था का नेतृत्व एक अध्यक्ष करता है। इस भूमिका में, उर्सुला वोन डेर लेयेन आयोग के संगठन की जिम्मेदारी संभालती हैं और अलग-अलग आयुक्तों को विभाग (पोर्टफोलियो) आवंटित करती हैं। वे आयोग की नीति-सूची तय करती हैं और यूरोपीय परिषद की बैठकों, G7 और G20 शिखर सम्मेलनों, गैर-EU देशों के साथ होने वाले शिखर सम्मेलनों तथा यूरोपीय संसद और परिषद में होने वाली प्रमुख बहसों में आयोग का प्रतिनिधित्व करती हैं।
26 आयुक्तों की नियुक्ति करता है अध्यक्ष
सभी 27 आयुक्तों को मंत्रियों की तरह विशिष्ट विभाग सौंपे जाते हैं। आयुक्तों और आयोग के अध्यक्ष को मिलाकर आयुक्तों का कॉलेज बनता है। यूरोपीय आयोग का अध्यक्ष कॉलेज के उपाध्यक्ष की नियुक्ति करता है, जो आमतौर पर विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के लिए उच्च प्रतिनिधि होता है। यूरोपीय संसद चुनावों के बाद, यूरोपीय परिषद आयोग के अध्यक्ष पद के लिए एक उम्मीदवार का प्रस्ताव करती है। आम तौर पर यह उम्मीदवार संसद में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाले राजनीतिक समूह से होता है। यूरोपीय संसद को पूर्ण बहुमत से नए अध्यक्ष को मंजूरी देनी होती है, जिसके बाद यूरोपीय परिषद औपचारिक रूप से उनकी नियुक्ति करती है। इसके बाद, अध्यक्ष निर्वाचित 27 में से 26 आयुक्तों की नियुक्ति करता है।
व्यापार और यात्रा की स्वतंत्रता प्रदान करता है EU
संप्रभुता किसी देश को बिना किसी विदेशी हस्तक्षेप के अपने निर्णय स्वयं लेने की शक्ति देती है। एक संप्रभु देश अपने कानून और नीतियां खुद बनाता है, और कोई अन्य देश उसके घरेलू मामलों में दखल नहीं दे सकता। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) के अनुसार, 'बहुपक्षीय संगठनों से जुड़े देश अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लाभों के बदले अपने स्वयं के नियम तय करने के अधिकार का कुछ हिस्सा छोड़ देते हैं और कुछ शक्तियां उन संस्थाओं को सौंप देते हैं।' EU के मामले में, यह समूह अपने 27 सदस्य देशों को व्यापार और यात्रा की स्वतंत्रता प्रदान करता है। श्रमिक, वस्तुएं, पूंजी और सेवाएं EU की सीमाओं के भीतर स्वतंत्र रूप से आवागमन कर सकती हैं। EU एक एकल बाजार संचालित करता है, यानी ऐसा आर्थिक क्षेत्र जहां समान नियम लागू होते हैं और आंतरिक व्यापार बाधाएं शून्य होती हैं। इसके अलावा, EU में शेंगेन क्षेत्र है, जहां वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा उपलब्ध है।
भारत के लिए EU एक महत्वपूर्ण बाजार
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदारों में से एक है। दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में वस्तुओं और सेवाओं का बड़ा योगदान है, जिसमें मशीनरी, ऑटोमोबाइल, रसायन, वस्त्र, आईटी सेवाएं, दवाइयाँ और कृषि उत्पाद शामिल हैं। हाल के वर्षों में भारत-EU व्यापार में स्थिर वृद्धि देखी गई है, हालांकि वैश्विक मंदी, आपूर्ति-श्रृंखला में बाधाएं और भू-राजनीतिक तनावों का असर भी पड़ा है। भारत के लिए EU एक महत्वपूर्ण बाजार है, जबकि EU के लिए भारत एक तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और रणनीतिक साझेदार है। हरित ऊर्जा, स्वच्छ तकनीक, सेमीकंडक्टर, डिजिटल नवाचार और टिकाऊ विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। कुल मिलाकर, भारत-EU व्यापार न केवल आर्थिक लाभ का साधन होगा बल्कि दोनों के बीच रणनीतिक और राजनीतिक साझेदारी को भी मजबूती देगा।
