GSAT-7R की क्या खासियतें?
इसरो ने इस महीने की शुरुआत में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से देश के सबसे भारी रक्षा संचार उपग्रह, GSAT-7R का प्रक्षेपण कर एक नई उपलब्धि हासिल की। इसके साथ ही भारत ने अपने समुद्री संचार नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा किया। लगभग 4,400 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह, हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारतीय नौसेना के सुरक्षित, रीयल टाइम समय संचार और समुद्र में सुरक्षा को मजबूत करेगा। समुद्री क्षेत्र में चीन ने हाल के वर्षों में अपनी सैन्य मौजूदगी का विस्तार किया है। यह प्रक्षेपण ऑपरेशन सिंदूर के छह महीने बाद हुआ है। GSAT-7R कई स्वदेशी, अत्याधुनिक खासियतों से लैस है, जिन्हें विशेष रूप से भारतीय नौसेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। क्या है GSAT-7R और कैसे देगा चीन की ताकत को चुनौती, विस्तार से समझते हैं।
चीन का सैन्य उपग्रह बेड़े की संख्या 1,000 से अधिक है। चीन ने अंतरिक्ष में मारक क्षमताएं जैसे कि सीधे-सीधे उपग्रह-रोधी मिसाइलें, सह-कक्षीय उपग्रह, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां, और उच्च-शक्ति वाले निर्देशित ऊर्जा हथियार जैसे लेजर, जो किसी अन्य देश की अंतरिक्ष तक पहुंच को बाधित या कम करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, तेजी से विकसित की हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2010 में सिर्फ 36 से बढ़कर, चीन का सैन्य उपग्रह बेड़ा 2024 तक 1,000 से अधिक हो गया। इसमें लगभग 360 उपग्रह खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) मिशनों के लिए समर्पित हैं।
जून में एक सेमिनार में बोलते हुए इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारत के निगरानी क्षेत्र का विस्तार करने की जरूरत पर जोर दिया और सैन्य अभियानों में रीयल-टाइम जागरूकता के महत्व को बताया है। उन्होंने कहा, हमें संभावित खतरों का पता लगाना, पहचानना और उन पर नजर रखना चाहिए, न कि तब जब वे हमारी सीमाओं की ओर आते हैं, बल्कि तब जब वे अभी भी अपने क्षेत्रों, हवाई अड्डों और ठिकानों में किसी विरोधी के क्षेत्र में गहराई में मौजूद हों।
चीन द्वारा अप्रैल 2023 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) एयरोस्पेस फोर्स की स्थापना के फैसले का जिक्र करते हुए, एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि यह कदम बीजिंग द्वारा अंतरिक्ष को आधुनिक युद्ध में सबसे आगे रहने की इच्छा का प्रमाण है। उन्होंने कहा, उनके उपग्रहों ने हाल ही में LEO [पृथ्वी की निचली कक्षा] में परिष्कृत 'डॉगफाइटिंग' युद्धाभ्यास का प्रदर्शन किया है, जिसमें विरोधी अंतरिक्ष संपत्तियों को ट्रैक करने और संभावित रूप से निष्क्रिय करने के लिए डिजाइन की गई रणनीतियों का अभ्यास किया गया है। वे 'किल चेन' से 'किल मेश' में विकसित हो गए हैं- एक एकीकृत नेटवर्क जो आईएसआर उपग्रहों को हथियार प्रणालियों के साथ सहजता से जोड़ता है।
अंतरिक्ष में GSAT-7R की तैनाती भारत के लिए बेहद अहम है और इससे चीन की ताकत पर भी अंकुश लगेगा। भले ही चीन ने अंतरिक्ष में उपग्रह तैनाती के मामले बाजी मार ली है, लेकिन भारत धीरे-धीरे अपनी ताकत भी बढ़ा रहा है। GSAT-7R की तैनाती से सबसे बड़ा फायदा समुद्री मोर्चे पर होगा जहां नौसेना को इसके जरिए अहम जानकारियां मिलेंगी। समुद्र में चीन लगातार अपनी ताकत बढ़ा रहा है और एकछत्र राज कायम करना चाहता है। GSAT-7R की तैनाती चीन की निरंकुशता पर अंकुश लगाएगी। GSAT-7R हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूत दूरसंचार कवरेज प्रदान करेगा। इसके पेलोड में कई संचार बैंडों पर ध्वनि, डेटा और वीडियो लिंक को सपोर्ट करने में सक्षम ट्रांसपोंडर शामिल हैं। यह उपग्रह उच्च क्षमता वाले बैंडविड्थ के साथ कनेक्टिविटी को मजबूती से बढ़ाएगा, जिससे जहाजों, विमानों, पनडुब्बियों और भारतीय नौसेना के समुद्री संचालन केंद्रों के बीच निर्बाध और सुरक्षित संचार संपर्क संभव होगा। यानि इस उपग्रह से नौसेना को बहुत बड़ी ताकत हासिल होगी।
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