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बंगाल में ऐतिहासिक जीत के बाद देश के 72 प्रतिशत हिस्से में भाजपा काबिज; अब कैसा है देश का सियासी नक्शा?

पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के चुनाव परिणामों के साथ ही देश के सियासी नक्शे में भगवा रंग और भी गहरा हो गया है। 2014 में पीएम मोदी के सत्ता में आने के समय जहां भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार महज सात राज्यों में थी, वहीं आज यह 21 राज्यों तक पहुंच गई है।

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बंगाल में जीत के बाद भाजपा मुख्यालय में पीएम मोदी। (फोटो- PTI)
Edited by: Shiv Shukla
Updated May 4, 2026, 23:02 IST

पश्चिम बंगाल में भाजपा की बड़ी जीत ने देश की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। मतगणना के साथ साफ हो चुका है कि पश्चिम बंगाल में सिर्फ सरकार ही नहीं बदली है, बल्कि भारत का सियासी भूगोल भी एक बार फिर नए रंग में रंग गया है। पूर्व से लेकर उत्तर और पश्चिम तक भाजपा का विस्तार अब और व्यापक रूप से दिखाई दे रहा है।

कहां-कहां भाजपा+ की सरकार?

आज आए पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम में आए नतीजों में असम और पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने के बाद अब भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकारें 21 राज्यों तक पहुंच चुकी हैं। इनमें कई राज्यों में भाजपा अपने दम पर सत्ता में है,जबकि कुछ जगहों पर वह सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार चला रही है।

देश के 72 प्रतिशत हिस्से में भाजपा की सरकार

अगर भूगोल के नजरिए से देखें तो इन राज्यों का कुल क्षेत्रफल देश के लगभग 72 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है। वहीं,अगर आबादी के हिसाब से देखें तो करीब 76 प्रतिशत लोग ऐसे राज्यों में रहते हैं,जहां भाजपा या एनडीए का शासन है। राज्यों की बात करें तो क्षेत्रफल के हिसाब से भाजपा शासित राजस्थान सबसे बड़ा राज्य है,जबकि पुडुचेरी सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश है। आबादी के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे अहम है।

2014 में क्या थी स्थिति?

जब 2014 में नरेंद्र मोदी ने केंद्र की सत्ता संभाली थी, उस वक्त भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकारें केवल सात राज्यों में थीं। इनमें छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री थे,जबकि आंध्र प्रदेश और पंजाब में सहयोगी दल सत्ता में थे। उस समय देश की करीब 26 प्रतिशत आबादी पर ही भाजपा या उसके गठबंधन का शासन था। इसके उलट, कांग्रेस और उसके सहयोगियों का दबदबा ज्यादा था और 14 राज्यों में उनकी सरकारें थीं,जहां देश की करीब 37 प्रतिशत आबादी रहती थी।

2018 में अपने चरम पर था भाजपा और उसके सहयोगियों का राजनीतिक प्रभाव

2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद भाजपा ने तेजी से विस्तार किया और मार्च 2018 तक यह आंकड़ा 21 राज्यों तक पहुंच गया। यह वह समय था जब भाजपा और उसके सहयोगियों का राजनीतिक प्रभाव अपने चरम पर था। 2018 में देश की करीब 71 प्रतिशत आबादी ऐसे राज्यों में रहती थी,जहां एनडीए की सरकार थी। वहीं,कांग्रेस का दायरा सिमटकर केवल चार राज्यों तक रह गया था। फिर 2024 के आम चुनावों में भाजपा को उम्मीद अनुरूप सफलता नहीं मिली। उस चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। ऐसे में उसने जदयू और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी के साथ गठबंधन की सरकार बनाई। केंद्र में भाजपा को दोनों दलों का साथ है।

दिल्ली चुनाव के बाद ऐसा हुआ असर?

फिर फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 27 साल बाद सत्ता में वापसी की। यह जीत भले ही भौगोलिक रूप से छोटे क्षेत्र में थी, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व काफी बड़ा रहा। दिल्ली देश की करीब 1.3 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करती है और यहां की जीत ने भाजपा के शहरी विस्तार को भी मजबूत किया।

बिहार चुनाव के बाद क्या बदला?

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की वापसी ने भाजपा के सियासी नक्शे को स्थिर बनाए रखा। अगर यहां सत्ता परिवर्तन होता, तो भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकारें घटकर 19 राज्यों तक आ सकती थीं। लेकिन जीत के साथ एनडीए ने अपनी स्थिति बरकरार रखी और 20 राज्यों में अपनी मौजूदगी बनाए रखी।

2026 के नतीजों के बाद नई तस्वीर

अब 2026 के चुनाव,खासकर पश्चिम बंगाल में मिली जीत के बाद भाजपा का दायरा फिर बढ़कर 21 राज्यों तक पहुंच गया है। यह विस्तार इस बात का संकेत है कि पार्टी अब उन क्षेत्रों में भी मजबूत हो रही है,जहां पहले उसकी मौजूदगी सीमित मानी जाती थी। पूर्वी भारत में मिली यह सफलता आने वाले समय में दक्षिण और अन्य क्षेत्रों में भी भाजपा की रणनीति को नई दिशा दे सकती है। अगर पूरे दौर को देखें तो 2014 में जहां भाजपा और उसके सहयोगी सिर्फ सात राज्यों तक सीमित थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 21 हो चुकी है।

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