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भारत की रसोई तक कैसे पहुंची LPG? जानिए पहला गैस कनेक्शन कब और कहां लगा

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव खासकर ईरान इजरायल और अमेरिका के बीच जंग का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। अमेरिकी और इजरायली हमलों के खिलाफ ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है और वहां से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों को निशाना बना रहा है, जिसके कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन बिगड़ गई है।

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भारत की रसोई तक कैसे पहुंची LPG? जानिए पहला गैस कनेक्शन कब और कहां लगा
Authored by: Shiv Shukla
Updated Apr 10, 2026, 22:05 IST

History of LPG in India: गैस एजेंसियों के बाहर खाली सिलेंडर लेकर खड़े लोग,लंबी कतारें और मन में चिंता...इन दिनों देश के कई हिस्सों में एलपीजी की किल्लत खूब देखी जा रही है। न सिर्फ घरेलू गैस बल्कि कमर्शियल एलपीजी कनेक्शन धारक भी हैरान और परेशान है। कई लोगों का व्यवसाय खास कर छोटे ठेले लगा कर खाने-पीने की चीजें बेचने वालों के धंधे पर ताला लग गया है। ईरान-अमेरिका तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में आई हलचल ने भारत में भी LPG की सप्लाई पर बड़ा असर डाला है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस LPG सिलेंडर पर आज करोड़ों भारतीय परिवार निर्भर हैं, वह भारत की रसोई तक पहुंची कैसे? पहला गैस कनेक्शन कब लगा और किस तरह इसने चूल्हे के धुएं वाली रसोई को साफ-सुथरे आधुनिक किचन में बदल दिया? आज हम आपको भारत में LPG के आगमन और उसके प्रसार की पूरी कहानी बताएंगे...

भारत में LPG की शुरुआत कैसे हुई?

भारत में LPG की कहानी तेल और प्राकृतिक गैस की खोज से जुड़ी है। आजादी के बाद देश में ऊर्जा संसाधनों की तलाश तेज हुई। इसी दिशा में 1956 में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) की स्थापना की गई। ओएनजीसी की स्थापना ऊर्जा क्षेत्र में भारत के लिए मील का एक पत्थर साबित हुआ। इसके बाद देश के कई हिस्सों में तेल और गैस के भंडार खोजने का मिशन शुरू हुआ और इसमें सफलता भी मिली। इन प्रयासों से ही देश में एलपीजी उत्पादन की राह आसान हुई।

क्या कच्चे तेल की तरह ही जमीन से निकलती है एलपीजी

ऐसे में एक ये भी बड़ा सवाल है कि क्या कच्चे तेल की तरह ही एलपीजी जमीन से निकलती है तो इसका जवाब है नहीं...LPG सीधे जमीन से उसी रूप में नहीं निकलती जैसे कच्चा तेल निकलता है। दरअसल, यह दो गैसों प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है। इसे दो तरीकों से तैयार किया जाता है-

  • कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान
  • प्राकृतिक गैस की प्रोसेसिंग के जरिए

भारत में तेल और गैस के कहां हैं भंडार

ओएनजीसी की स्थापना के बाद जब भारत में कच्चे तेल और गैस के भंडारों की खोज शुरू हुई तो कई राज्यों में ऐसे स्थान मिले जो तेल और गैस के क्षेत्र थे। भारत में कच्चे तेल का प्रमुख भंडार पश्चिमी अपतटीय (मुम्बई हाई-37%) और असम (27%) में स्थित है, जबकि प्राकृतिक गैस के मुख्य स्रोत पूर्वी अपतटीय (कृष्णा-गोदावरी - 40.6%) और पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र हैं। राजस्थान (बाड़मेर के मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या) भी एक बड़ा उत्पादक है। भारत रणनीतिक रूप से मैंगलोर, पादुर और विशाखापत्तनम में लगभग 250+ मिलियन बैरल तेल का भंडार रखता है। इन स्थानों की खोज के बाद भारत में LPG उत्पादन का रास्ता बना। इन स्रोतों से मिलने वाले कच्चे तेल और गैस की प्रोसेसिंग के दौरान LPG भी तैयार होने लगी।

  • डिगबोई (असम)-भारत का सबसे पुराना तेल क्षेत्र माना जाता है। यहां रिफाइनिंग के दौरान LPG भी तैयार की गई।
  • नाहरकटिया (असम)- 1950 के दशक में यहां बड़े तेल और गैस भंडार मिले, जिससे गैस उत्पादन बढ़ा।
  • अंकलेश्वर (गुजरात)- 1960 के दशक में खोजा गया यह क्षेत्र पश्चिम भारत में ऊर्जा उत्पादन का बड़ा केंद्र बना।
  • मुंबई हाई- समुद्र में मिला यह तेल क्षेत्र भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ।
  • कृष्णा-गोदावरी बेसिन- दक्षिण भारत में प्राकृतिक गैस का बड़ा स्रोत।
भारत में एलपीजी की शुरुआत।

भारत में एलपीजी की शुरुआत।

भारत की रसोई में कब और कैसे हुई LPG की एंट्री

भारत में घरेलू LPG की शुरुआत 1950 के दशक में हुई। उस समय पेट्रोलियम क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी बर्मा शेल ने पहली बार घरेलू गैस को बाजार में उतारा। बाद में सरकारी तेल कंपनियों ने इसे बड़े पैमाने पर आम लोगों तक पहुंचाने का काम किया। इसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की बड़ी भूमिका रही।

पहला LPG कनेक्शन कब मिला?

भारत में LPG इतिहास की एक अहम तारीख 22 अक्टूबर 1965 मानी जाती है। इस दिन कोलकाता में पहला Indane LPG कनेक्शन जारी किया गया। उस समय देश में केवल लगभग 2000 उपभोक्ता थे। लेकिन आने वाले दशकों में यह संख्या तेजी से बढ़ती गई और LPG धीरे-धीरे हर घर की जरूरत बन गई।

LPG ने कैसे बदल दी भारतीय रसोई?

LPG के आने से पहले भारत के ज्यादातर घरों में खाना पकाने के लिए लकड़ी, कोयला या मिट्टी के तेल का इस्तेमाल होता था। चूल्हे का धुआं घर भर में फैल जाता था और इससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता था। LPG के आने के बाद रसोई में कई बड़े बदलाव हुए-

    धुएं से राहत

लकड़ी या कोयले के चूल्हे में बहुत धुआं निकलता था,जिससे महिलाओं और बच्चों को सांस और आंखों की समस्या होती थी। LPG साफ ईंधन साबित हुआ।

  • खाना जल्दी बनना
  • चूल्हा जलाने और लकड़ी जुटाने में समय लगता था। LPG स्टोव ने खाना बनाना तेज और आसान कर दिया।

  • साफ-सुथरी रसोई
  • चूल्हे के धुएं से दीवारें और बर्तन काले हो जाते थे। LPG के इस्तेमाल से कालिख नहीं बनती और रसोई साफ रहती है।

  • महिलाओं के जीवन में बदलाव
  • ईंधन जुटाने में लगने वाला समय बचा, जिससे महिलाओं की दिनचर्या आसान हुई।

    उज्ज्वला योजना से गांवों तक पहुंची LPG

    LPG का असली विस्तार ग्रामीण भारत में तब हुआ जब सरकार ने गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन देने की योजना शुरू की। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (2016) के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को मुफ्त या रियायती LPG कनेक्शन दिए गए। इस योजना के बाद गांवों में भी लकड़ी के चूल्हे की जगह गैस स्टोव तेजी से फैलने लगे और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिला।

    PM Ujjwala Yojana

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    भारत खुद कितना LPG बनाता है?

    भारत में LPG का उत्पादन भी होता है, लेकिन घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात भी करना पड़ता है। अनुमान के मुताबिक, देश में खर्च होने वाली करीब 40% LPG भारत में तैयार होती है। वहीं लगभग 60% LPG विदेशों से आयात की जाती है।

    भारत किन देशों से LPG मंगाता है?

    भारत का LPG आयात मुख्यतः ऊर्जा-समृद्ध देशों से होता है। एलपीजी के लिए भारत के सबसे बड़े सप्लायर देश सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात हैं। इन तीन देशों से भारत अपने कुल LPG आयात का लगभग 70% मंगाता है। इसके अलावा, भारत अमेरिका, अल्जीरिया, नाइजीरिया से भी एलपीजी का आयात करता है। इन देशों से करीब 30% LPG आयात की जाती है।

    आज क्यों चर्चा में है LPG?

    पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव खासकर ईरान इजरायल और अमेरिका के बीच जंग का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। अमेरिकी और इजरायली हमलों के खिलाफ ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है और वहां से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों को निशाना बना रहा है, जिसके कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन बिगड़ गई है। ऐसे में जब तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होती है,तो LPG जैसे ईंधन की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर दिखाई देता है। यही वजह है कि हाल के दिनों में कई जगह गैस सिलेंडर की किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं।
    End of Article