महाराष्ट्र में फडणवीस ने कैसे लिखी जीत की पटकथा? चुनाव नतीजों का देश की राजनीति पर क्या होगा असर
महाराष्ट्र निकाय चुनाव में जीत का यह सेहरा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सिर बांधा जा रहा है। इस जीत के लिए भाजपा नेता एवं कार्यकर्ता मुक्त कंठ से फडणवीस की तारीफ कर रहे हैं। राजनीतिक जानकार भी मान रहे हैं कि इस चुनाव की तैयारी फडणवीस ने शुरुआत से की और एक योजना के तहत अपनी चुनावी अभियान को आगे बढ़ाया।
- Written by: आलोक कुमार राव
- Updated Jan 17, 2026, 01:31 PM IST
BJP win in Maharashtra: महाराष्ट्र की महानगरपालिकाओं में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भारी जीत हासिल हुई है। भगवा पार्टी ने राज्य की 29 महानगरपालिकाओं की 2,869 सीटों में से 1,425 पर अपना परचम लहराया है। भाजपा की यह जीत इस मायने और बड़ी हो गई है क्योंकि उसने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर से शिवसेना का नियंत्रण छीन लिया है। देश के सबसे धनी नगर निकाय में ठाकरे परिवार का तीन दशक पुराना वर्चस्व समाप्त हो गया है। इस जीत के साथ बीएमसी में भाजपा पहली बार अपना मेयर बनाएगी। बीएमसी की 227 सीटों में से भाजपा ने 89 सीटें जीतीं, जबकि सहयोगी शिवसेना ने 29 सीटें अपने नाम कीं। वहीं, शिवसेना (उबाठा) को 65 और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को छह सीटें मिलीं। भाजपा ने इसी तरह का शानदार प्रदर्शन ज्यादातर महानगरपालिकाओं में किया है। महाराष्ट्र में इस जीत से फडणवीस का कद भाजपा में और बढ़ गया है।
फडणवीस के सिर बांधा जा रहा जीत का सेहरा
महाराष्ट्र निकाय चुनाव में जीत का यह सेहरा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सिर बांधा जा रहा है। इस जीत के लिए भाजपा नेता एवं कार्यकर्ता मुक्त कंठ से फडणवीस की तारीफ कर रहे हैं। राजनीतिक जानकार भी मान रहे हैं कि इस चुनाव की तैयारी फडणवीस ने शुरुआत से की और एक योजना के तहत अपनी चुनावी अभियान को आगे बढ़ाया। अभियान तो बढ़ाया ही उन्होंने सामने से चुनाव का नेतृत्व भी किया। बीएमसी चुनाव में पार्टी की रणनीति भी उन्होंने खुद तैयार की। महाराष्ट्र में जीत के बाद पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि 'भाजपा ने लोगों के सामने एक विकासवादी एजेंडा रखा और लोगों ने भी इसे पसंद किया और सकारात्मक रुख दिखाया। हमने कई महानगरपालिकाओं में भारी जनादेश मिला है। इस जनादेश का मतलब है कि लोग विकास और ईमानदारी चाहते हैं। वही वजह है कि लोगों ने भाजपा को चुना है।'
उम्मीदवार चुनने में फडणवीस ने बेहद सतर्कता बरती
शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की विरासत पर दावा करते हुए सीएम ने कहा कि 'बालासाहेब के आशीर्वाद' ने सत्तारूढ़ दल एवं एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना को जीत दिलाने में मदद की। फडणवीस ने आगे कहा कि यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में एवं भाजपा की अगुवाई वाली सरकार की नीतियों में लोगों के भरोसे को दिखाती है। मुंबई में भाजपा नेताओं ने कहा कि चुनाव के लिए उम्मीदवारों को चुनने में फडणवीस ने काफी सावधानी बरती, उन्होंने व्यापक स्थानीय जनाधार वाले उम्मीदवारों को टिकट दिया और अपने चुनाव प्रचार को लोगों से जुड़े मुद्दों सड़क, सफाई और बुनियादी संरचना पर केंद्रित रखा। इस रणनीति से भाजपा को उन इलाकों में अपना जनाधार बढ़ाने में मदद मिली जहां विभाजन के बाद उद्धव गुट वाली शिवसेना कमजोर हो गई थी। लोगों ने भी एक स्थायी, संगठित और शहर को चला सकने में सक्षम भाजपा को चुना।
महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा की बंपर जीत। तस्वीर-PTI
शाह के मिशन 'शत प्रतिशत भाजपा' को आगे बढ़ाया
महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने 'शत प्रतिशत भाजपा' का लक्ष्य दिया था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए फडणवीस ने रणनीति पर काम किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं एवं पार्टी नेताओं की अंदरूनी खींचतान और बगावत को पनपने नहीं दिया। गुटबाजी और भीतरघात से उन्होंने पार्टी को दूर रखा। यही नहीं भाजपा और गठबंधन के उम्मीदवारों को जिताने के लिए उन्होंने मुंबई सहित राज्य भर में दौरे किए और प्रचार किया। अपनी चुनावी रैलियों में फडणवीस ने विकास एवं 'गुड गवर्नेंस' पर बात की।
चुनाव प्रचार से PM, शाह और CM योगी को रखा दूर
चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे एवं राज ठाकरे जिस तरह से कोर मराठी वोटरों को अपने साथ जोड़े रखने के लिए जिस तरह से बयानबाजी कर रहे थे, उससे मराठी वोटरों के लामबंद होने का खतरा था। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उन्होंने चुनाव रैलियों से दूर रखा। चुनाव प्रचार की कमान उन्होंने खुद अपने हाथ में रखी और स्थानीय नेताओं पर ज्यादा भरोसा जताया। भाजपा के इन तीनों दिग्गजों को चुनाव प्रचार से दूर रखकर फडणवीस ने उद्धव और राज ठाकरे को गुजरात और उत्तर भारत विरोधी भावनाएं भड़काने का मौका नहीं दिया।
पुणे चुनावों में भाजपा ने पवार परिवार को चौंकाया
बीएमसी की 227 सीटों में से भाजपा ने 89 सीटें जीतीं, जबकि सहयोगी शिवसेना ने 29 सीटें अपने नाम कीं। वहीं, शिवसेना (उबाठा) को 65 और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को छह सीटें मिलीं। वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को 24 सीटें, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को आठ, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को तीन, समाजवादी पार्टी को दो और राकांपा (शप)को सिर्फ एक सीट मिली। पुणे चुनावों में भाजपा ने पवार परिवार को चौंकाते हुए 119 सीटें जीतीं, जबकि अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा 27 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही और उसकी सहयोगी राकांपा (शप) को तीन सीटें मिलीं। कांग्रेस को 15 सीटें ही मिल पाईं।
बीएमसी में ुपहली बार बनेगा भाजपा का मेयर। तस्वीर-PTI
नागपुर-नासिक में भाजपा का दबदबा
नागपुर में 151 सदस्यीय महानगरपालिका में भाजपा का दबदबा रहा और उसे 102 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को मात्र 34 सीटें ही प्राप्त हुईं। नासिक में भाजपा को 72 सीटें, शिवसेना को 26, शिवसेना (उबाठा) को 15, कांग्रेस को तीन और राकांपा को चार सीटें मिलीं। छत्रपति संभाजीनगर में भी भाजपा की जीत का सिलसिला जारी रहा, जहां उसने 57 सीटें जीतीं। उसके बाद शिवसेना ने 13 और कांग्रेस ने एक सीट जीती, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) में पंजीकृत अन्य पार्टियों विशेष रूप से एआईएमआईएम ने 33 सीटें हासिल कीं। अंतिम मतगणना के अनुसार, कुल 2,869 सीटों में से भाजपा ने 1,425 सीटें, शिवसेना ने 399, कांग्रेस ने 324, राकांपा ने 167, शिवसेना (उबाठा) ने 155, राकांपा (शप) ने 36, मनसे ने 13, बसपा ने छह, एसईसी के साथ पंजीकृत पार्टियों ने 129, गैर-मान्यता प्राप्त दलों ने 196 और 19 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की।
महाराष्ट्र में जिन नगर निकायों में चुनाव हुए थे, उनमें मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर, नवी मुंबई, वसई-विरार, कल्याण-डोंबिवली, कोल्हापुर, नागपुर, सोलापुर, अमरावती, अकोला, नासिक, पिंपरी-चिंचवड़, पुणे, उल्हासनगर, ठाणे, चंद्रपुर, परभणी, मीरा-भायंदर, नांदेड़-वाघाला, पनवेल, भिवंडी-निजामपुर, लातूर, मालेगांव, सांगली-मिराज-कुपवाड, जलगांव, अहिल्यानगर, धुले, जालना और इचलकरंजी शामिल रहे।
विपक्षी दलों के मनोबल पर होगा सीधा असर
महाराष्ट्र में भाजपा की यह विपक्षी दलों के मनोबल पर सीधा असर डालती है। भाजपा की यह जीत कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना यूबीटी जैसे दलों के लिए एक बड़ा झटका है। इससे विपक्षी एकता कमजोर पड़ सकती है और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को मुकाबला देने की रणनीति पर सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं भाजपा के लिए यह संदेश जाता है कि उसकी नीतियां और नेतृत्व जनता में स्वीकार्य हैं। तीसरा, महाराष्ट्र में जीत का असर अन्य राज्यों की राजनीति पर भी पड़ता है। यह भाजपा के लिए एक 'मॉडल राज्य' बन सकता है, जहां विकास, बुनियादी ढांचे और प्रशासन के नाम पर पार्टी अपनी नीतियों को प्रचारित कर सकती है। महाराष्ट्र में भाजपा की जीत राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की पकड़ को और मजबूत करेगी।
