Iran US Peace Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ 'डील' पर अब तक 38-40 बार बोल चुके हैं। कभी ट्रुथ सोशल पर तो कभी मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि 'हम डील के बहुत करीब हैं, डील बस होने वाली है, दो-तीन दिन में डील पर दोनों देश हस्ताक्षर कर देंगे, डील के लिए ईरान भीख मांग रहा है।' यानी संभावित डील पर ट्रंप के बयान लगातार बदलते रहे और वह तारीख पर तारीख देते रहे। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि इस दौरान ईरान की तरफ से ट्रंप जैसा कुछ भी नहीं कहा गया। ईरान ने एक कूटनीतिक चुप्पी साधे रखी। अब जाकर 12 जून की रात यानी शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने डील पर बयान दिया। अराघची ने अपने बयान में कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए किसी डील पर ईरान और अमेरिका इससे पहले कभी इतने करीब नहीं आए। हालांकि, X पर अपने पोस्ट में अराघची ने यह भी कहा कि इस डील के बारे में मीडिया को अटकलें लगानी की जरूरत नहीं है। किन मुद्दों पर डील हो रही है, उसके बारे में विस्तार से सभी को बताया जाएगा।
अराघची के इस बयान को डील पर ईरान का आधिकारिक रुख माना जा रहा है। अराघची के इस बयान के बाद यह तो साफ हो गया कि दोनों देश डील के करीब हैं और चीजें यदि सही तरीके से आगे बढ़ीं तो दोनों देशों के बीच सीजफायर हो जाएगा लेकिन दोनों के बीच किन मुद्दों पर सहमति और किन मुद्दों पर असहमति है, किस बात पर नरमी और किस बात को डील से दूर रखा गया है। डील का कंटेंट क्या है? सीजफायर किस तरीके से लागू होगा, यह सब अभी पर्दे के पीछे है लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि इस डील में कुछ मुद्दे ऐसे होंगे जिन्हें जरूर शामिल किया जाएगा। बिना इन्हें शामिल किए सीजफायर आकार नहीं ले सकता। ये मुद्दे इस प्रकार हैं-
1-स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
डील का सबसे बड़ा मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होमुज है। क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति 28 फरवरी से पहले वाली होगी। यानी क्या यह जहाजों के लिए पूरी तरह से खुला, स्वतंत्र, बिना रोकटोक और शुल्क के होगा? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान कई बार कह चुका है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर वह टोल लगाएगा। तो ट्रंप बिना शुल्क के इसे पूरी तरह खोलने की बात कह चुके हैं। इस बारे में ईरान की न्यूज एजेंसी मेहर ने कहा है कि होर्मुज को पूरी तरह से खोलने में कम से कम 30 दिन का समय लगेगा। यही नहीं समुद्र में बिछाई गईं माइंस भी तेहरान हटाएगा और इसके जवाब में अमेरिका अपना ब्लॉकेड हटाएगा। ईरान की आधिकारिक न्यूज एजेंसी इरना ने कहा है कि स्ट्रेट पर ईरान अपने नियंत्रण का दावा छोड़ देगा, डील के मसौदे में यह बात शामिल नहीं की गई है। यही नहीं स्ट्रेट को खोलने को लेकर यूएस और ईरान दोनों तरफ से विरोधाभासी बातें कही गई हैं। जानकार मानते हैं कि डील में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की बात होगी लेकिन यह किस रूप में होगा यह देखने वाली बात होगी।
Strait Of Hormuz
2-ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम
दूसरा, इस डील में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को जगह मिलेगी क्योंकि ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले का यह एक मुख्य वजह रहा है। ट्रंप बार-बार कह चुके हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता। वह इसे रखने नहीं देंगे। इजराइल भी यही चाहता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हो। हालांकि, ईरान कहता रहा है कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम ऊर्जा जैसी जरूरतों और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है लेकिन उसकी बातों पर यूएस और इजराइल भरोसा नहीं करते। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग यानी IAEA का कहना है कि ईरान अपना यूरेनियम 60 प्रतिशत तक समृद्ध कर चुका है और यदि वह थोड़ा और यूरेनियम संवर्धित कर लेता है तो वह परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंच जाएगा। इस डील में अमेरिका, ईरान से यह वादा ले सकता है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। वह यह भी चाहेगा कि ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम छोड़ दे। एक्सपर्ट मानते हैं कि ईरान को अपने ऊर्जा जरूरतों के लिए तय शर्तों के साथ न्यूक्लियर प्रोग्राम चलाने की इजाजत दी जाए। इसमें उसके परमाणु संयंत्रों की निगरानी भी शामिल हो सकती है।
3-ईरान के प्रॉक्सीज
डील में ईरान के प्रॉक्सीज को लेकर भी बातें हो सकती हैं। गाजा में हमास, लेबनान में हिज्बुल्ला, यमन में हुती ईरान के प्रॉक्सीज माने जाते हैं। ईरान इन्हें वित्तीय और हथियारों की मदद देता आया है। 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद इजराइल ने हमास को काफी हद तक खत्म कर दिया है लेकिन 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद हिज्बुल्ला और हुती दोनों ने इजराइल को निशाना बनाकर हमले किए। इसके जवाब में इजराइल, लेबनान में हिज्बुल्ला के खिलाफ बड़े हमले करते आया है। यहां तक कि उसने राजधानी बेरूत तक आईडीएफ को भेजने की बात कही। इससे ईरान बुरी तरह तिलमिला गया। उसने यूएस से साफ कह दिया कि लेबनान में यदि इजराइल ने हमले जारी रखे तो कोई डील नहीं होगी। जानकार मानते हैं कि डील में इस बात का जिक्र हो सकता है कि आगे कोई भी एक-दूसरे पर हमले नहीं करेगा। तो ईरान अपने प्रॉक्सीज की फंडिंग नहीं करने का वादा कर सकता है। फिर भी इस मुद्दे पर सबसे अहम रुख इजराइल का हो सकता है। इजराइल पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह इस डील का हिस्सा नहीं है।
iran
4-ईरान का मिसाइल प्रोग्राम
इस डील में ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को भी शामिल किया जा सकता है। ऐसी रिपोर्टें हैं कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइलों यानी आईसीबीएम और हाइपरसोनिक मिसाइलों पर काम कर रहा है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच विवाद और टकराव का यह एक बड़ा मुद्दा रहा है। हो सकता है कि अमेरिका यह शर्त रखे कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइलें नहीं बनाएगा। हो सकता है कि ईरानी मिसाइलों की संख्या और मारक क्षमता तय कर दी जाए। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ईरान मध्य पूर्व में और अपने आस-पास अमेरिकी सैन्य बेसों में कटौती की मांग रख सकता है। बहरहाल, डील में अपने मिसाइल प्रोग्राम पर ईरान का रुख क्या रहता है, यह देखने वाली बात होगी।
5-मुआवजा और प्रतिबंध
जाहिर है कि यूएस और इजराइल के हमलों में ईरान को काफी नुकसान पहुंचा है। ईरान चाहता कि अमेरिका उसके इस नुकसान की भरपाई करे। इस नुकसान के बारे में इस्लामिक रिपब्लिक ने आंकड़ा भी दिया है। ईरान का कहना है कि 28 फरवरी के बाद यूएस-इजराइल के हमलों में करीब 270 अरब डॉलर का उसका नुकसान हुआ है। हालांकि, अमेरिका ने ईरान के मुआवजे की मांग स्वीकार नहीं करता फिर भी हो सकता है कि डील में ईरान को कुछ वित्तीय मदद देने और उसकी जब्त संपत्तियों छोड़ने की बात की जाए। ईरान पर से खुल मार्केट में अपना तेल बेचने सहित कुछ प्रतिबंध हटाने का वादा किया जा सकता है। ईरान का कहना है अमेरिका और उसके सहयोगियों ने 24 अरब डॉलर मूल्य की उसकी संपत्तियां जब्त कर रखी हैं।
lebonan
6-लेबनान में इजराइल के हमले
ईरान और अमेरिका के बीच हमले रुकने के बाद भी इजराइल ने लेबनान में अपनी कार्रवाई जारी रखी। लिटानी नदी से आगे जाकर उसने टायर सिटी और बेक्का में हमले कर हिज्बुल्ला की सरंचनाओं एवं नेटवर्क को ध्वस्त किया। हिज्बुल्ला भी चुप नहीं रहा, उसने भी रॉकेट और ड्रोन से नॉर्थ इजराइल में हमले किए। बीच-बीच में इजराइल के हवाई हमले होते रहे। इस दौरान ईरान की तरफ से कुछ नहीं कहा गया लेकिन जैसे ही नेतन्याहू और इजराइल के रक्षा मंत्री ने राजधानी बेरूत में अपनी सेना भेजने का आदेश दिया। तेहरान, हिज्बुल्ला के बचाव में आ गया। ईरान ने इजराइल पर मिसाइलें दागीं और फिर इजराइल की तरफ से तेहरान और अन्य शहरों पर बमबारी की गई। हिज्बुल्ला पर इजराइल के भीषण हमले को देखते हुए ईरान ने डील पर बातचीत रोक दी। उसने साफ कहा कि हिज्बुल्ला पर यदि हमले हुए तो डील आगे नहीं बढ़ेगी। इसके बाद ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर जो गर्मागरम बहस हुई उसके बारे में सभी को पता है। ईरान चाहेगा कि वह इस डील में अमेरिका की तरफ से गारंटी ले कि इजराइल आगे हिज्बुल्ला पर हमले नहीं करेगा लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है क्योंकि अमेरिका के समर्थन और बिना समर्थन के इजराइल अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपना सैन्य अभियान चलाता आया है।
