Bollywood Extortion Threat: बॉलीवुड को धमकी देकर फिरौती मांगने का खेल भारतीय अंडरवर्ल्ड के इतिहास में कोई नया अध्याय नहीं है। यह एक ऐसा पैटर्न है जो दशकों से चला आ रहा है, बस इसके चेहरे बदलते रहे हैं। क्राइम बीट पर काम कर चुके वरिष्ठ खोजी पत्रकार और पुलिस के अनुभवी अधिकारी मानते हैं कि फिल्म इंडस्ट्री हमेशा से अंडरवर्ल्ड के लिए एक आसान और हाई-वैल्यू टारगेट रही है, क्योंकि यहां नाम बड़ा होता है और डर उससे भी बड़ा।
नब्बे के दशक में जब दाऊद इब्राहिम, छोटा राजन और अबू सलेम जैसे नामों का खौफ अपने चरम पर था, तब बॉलीवुड को धमकी देना अंडरवर्ल्ड की सबसे कारगर रणनीति मानी जाती थी। एक फोन कॉल, एक नाम और पूरा प्रोडक्शन हाउस हिल जाता था। उस दौर को करीब से कवर कर चुके एक सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट बताते हैं कि तब अंडरवर्ल्ड को गोली चलाने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी, डर अपने आप पैसा निकाल देता था। कई बड़े फिल्मकार और सितारे सिस्टम पर भरोसा न होने की वजह से चुपचाप फिरौती दे देते थे और मामला वहीं दब जाता था।
'लेकिन अंडरवर्ल्ड खत्म नहीं हुआ...'
समय बदला, कानून सख्त हुए, MCOCA जैसे प्रावधान आए, ATS और CBI ने बड़े नेटवर्क तोड़े और दाऊद का भारत-आधारित सिस्टम कमजोर पड़ा। लेकिन अंडरवर्ल्ड खत्म नहीं हुआ। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उसने खुद को नए हालात के हिसाब से ढाल लिया। यही वजह है कि आज फिर वही पुराना पैटर्न नए नाम के साथ सामने आता दिख रहा है।
आज जिस गैंग का जिक्र सबसे ज्यादा हो रहा है, वह लॉरेंस बिश्नोई गैंग है। टॉप कॉप्स का कहना है कि यह दाऊद मॉडल से अलग जरूर है, लेकिन उसकी बुनियाद उसी सोच पर टिकी है। फर्क इतना है कि पहले ऑपरेशन विदेश से होते थे और अब जेल के भीतर से। सोशल मीडिया, वीडियो मैसेज और वॉइस नोट इस नए दौर के हथियार हैं। एक सीनियर आईपीएस अधिकारी के मुताबिक आज की अंडरवर्ल्ड को असली ताकत पब्लिसिटी से मिलती है। एक नामी अभिनेता को धमकी दी और पूरा देश उस गैंग का नाम जान गया।
'बॉलीवुड को टारगेट करने के पीछे सिर्फ पैसा नहीं'
बॉलीवुड को टारगेट करने के पीछे सिर्फ पैसा नहीं, पहचान बनाने की रणनीति भी है। पुलिस और क्राइम एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जब किसी सुपरस्टार का नाम किसी धमकी से जुड़ता है, तो गैंग को बिना मेहनत के राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल जाती है। इससे न सिर्फ डर फैलता है, बल्कि छोटे अपराधियों और शूटरों में उस गैंग की साख भी बढ़ती है।
इस डर का असर सिर्फ अभिनेता या निर्माता तक सीमित नहीं रहता। शूटिंग यूनिट, टेक्नीशियन, डिस्ट्रीब्यूटर और यहां तक कि इंश्योरेंस कंपनियां भी प्रभावित होती हैं। शेड्यूल बिगड़ते हैं, लागत बढ़ती है और इंडस्ट्री में एक अनकहा साइलेंस छा जाता है। क्राइम रिपोर्टर्स कहते हैं कि यही साइलेंस अंडरवर्ल्ड के लिए सबसे बड़ा हथियार होता है।
'नब्बे के दशक जैसे हालात नहीं'
हालांकि पुलिस यह भी मानती है कि आज हालात नब्बे के दशक जैसे नहीं हैं। इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन, डिजिटल ट्रैकिंग और जेल मॉनिटरिंग ने सिस्टम को मजबूत किया है। फिर भी चुनौती सिर्फ अपराधियों को पकड़ने की नहीं है, बल्कि उस डर के नैरेटिव को तोड़ने की है, जिसे जानबूझकर हवा दी जाती है।
कुल मिलाकर, बॉलीवुड को धमकी देकर फिरौती मांगने की कहानी पुरानी है। तरीका वही है, सोच वही है। फर्क सिर्फ इतना है कि आज अंडरवर्ल्ड ज्यादा शोर करता है ताकि उसका डर बिके। अब यह सिस्टम और समाज पर निर्भर करता है कि वह इस शोर को हकीकत मानकर सहमे या उसे उसी जगह सीमित कर दे जहां वह सबसे ज्यादा असरदार है यानी सुर्खियों तक।