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BMC चुनाव 2026: कौन-कौन से काम करता है देश का सबसे बड़ा नगर निगम, क्या है इसकी जिम्मेदारी, जानें कितना है बजट

इस बार बीएमसी पर कब्जा करने के लिए भाजपा एवं शिंदे गुट वाली शिवसेना ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है तो वहीं नगर निगम की सत्ता में बने रहने के लिए उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के साथ आए हैं। दोनों भाइयों के बीच करीब दो दशक के बाद सियासी सुलह हुई है।

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Photo : PTI
16 जनवरी को आएंगे बीएमसी चुनाव के नतीजे। तस्वीर-PTI

BMC Polls 2026: बृह्नमुंबई नगर निगम (BMC) के लिए गुरुवार (15 जनवरी) को चुनाव होंगे। यह चुनाव करीब 4 साल के अंतराल के बाद हो रहा है। इस चुनाव के बाद नगर निगम को अपनी एक नवनिर्वाचित परिषद मिलेगी जो देश की आर्थिक राजधानी की बुनियादी संरचना, रोजमर्रा एवं विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाएगी। बीएमसी की स्थापना 1865 में हुई और यह देश की सबसे अमीर और प्रभावशाली नगर निगम है। बीएमसी पर दो दशकों से ज्यादा समय से शिवसेना का कब्जा रहा है। शिवसेना में विभाजन होने के बाद इसके दो धड़े हैं। एक की अगुवाई दिवंगत बाला साहेब ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे शिवसेना (यूबीटी) करते हैं जबकि दूसरे धड़े (शिवसेना) का नेतृत्व एकनाथ शिंदे के हाथ में है।

इस बार बीएमसी पर कब्जा करने के लिए भाजपा एवं शिंदे गुट वाली शिवसेना ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है तो वहीं नगर निगम की सत्ता में बने रहने के लिए उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के साथ आए हैं। दोनों भाइयों के बीच करीब दो दशक के बाद सियासी सुलह हुई है। कांग्रेस, राकांपा के साथ एआईएमआईएम भी मैदान में है। कई जगह राजनीतिक दल एक दूसरे के साथ तो कई वार्डों में एक दूसरे के खिलाफ भी चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में इस बार का नगर निगम चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है।

बीएमसी का बजट

बीएमसी अपने बजट को लेकर काफी चर्चा में रहता है। इसका सलाना बजट पूर्वोत्तर के राज्यों अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और गोवा एवं हिमाचल प्रदेश से अधिक है। बीएमसी का सलाना बजट करीब 74 हजार करोड़ रुपए का है। स्टॉफ की अगर बात करें तो स्थायी एवं अस्थायी कर्मियों को मिलाकर इसके पास करीब 1.15 लाख कर्मचारी हैं। यह संख्या इसे देश का सबसे बड़ा नगर निगम बनाती है। बीएमसी के प्रशासन की कमान निगम कमिश्नर के पास होती है। यह एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी होता है जिसके पास एग्जीक्यूटिव अधिकार होते हैं। कार्यों में निगम कमिश्नर की सहायता चार अतिरिक्त निगम कमिश्नर और एक संयुक्त निगम कमिश्नर करते हैं। जबकि चुने गए वार्ड सदस्यों का नेतृत्व मेयर के पास होता है। मेयर के मुकाबले निगम कमिश्नर के पास ज्यादा अधिकार होते हैं, फैसले निगम कमिश्नर ही लेते हैं।

बीएमसी का कामकाज

बीएमसी मुंबई की स्थानीय सरकार के रूप में काम करती है। नागरिकों को रोजमर्रा जरूरत की सेवाएं उपलब्ध कराना इसी की जिम्मेदारी है। सेवाओं की अगर बात करें तो सड़क, जलापूर्ति, कूड़ा प्रबंधन, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं शिक्षा, बुनियादी संरचना, सार्वजनिक परिवहन एवं पार्क के रखरखाव की जम्मेदारी इसी के पास है।

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इस बार चार साल के अंतराल के बाद हो रहा बीएमसी चुनाव। तस्वीर-PTI

सड़क

नगर निगम मुंबई के 2,050 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क का निर्माण और रखरखाव करता है। इसके कार्यों में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत, गड्ढों को भरना, नई सड़कें बनाना और सुचारू यातायात सुनिश्चित करना शामिल है। वर्तमान में बीएमसी लगभग 700 किलोमीटर सड़कों को 17,000 करोड़ रुपये की लागत से सीमेंट कंक्रीट में बदल रही है। इसका उद्देश्य गड्ढों की समस्या को कम करना और खासकर मानसून के दौरान सड़कों की टिकाऊपन बढ़ाना है।

जल आपूर्ति

मुंबई की पेयजल आपूर्ति सात झीलों पर निर्भर है—तुलसी, विहार, भात्सा, तानसा, अपर वैतरणा, मिडिल वैतरणा और मोडक सागर। इनमें से केवल दो झीलें शहर की सीमा के भीतर स्थित हैं। बीएमसी इन झीलों का प्रबंधन करती है, पानी को शुद्ध करती है और व्यापक पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंचाती है। शहर के विस्तार के साथ जल आपूर्ति प्रणाली के रखरखाव, लीकेज की मरम्मत और विस्तार की जिम्मेदारी भी बीएमसी की है।

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मुंबई में रोजाना 8,000 से 10,000 मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है। तस्वीर-PTI

कचरा प्रबंधन

मुंबई में रोजाना 8,000 से 10,000 मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है। बीएमसी घरों और सार्वजनिक स्थानों से कचरा इकट्ठा करने, उसे प्रोसेसिंग प्लांट और लैंडफिल तक पहुंचाने तथा सड़कों की सफाई की जिम्मेदारी निभाती है। यह सार्वजनिक शौचालयों का रखरखाव करती है और सीवेज का उपचार कर उसे समुद्र और खाड़ियों में छोड़ती है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा

बीएमसी देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में से एक चलाती है। इसके अंतर्गत चार मेडिकल कॉलेज अस्पताल, 16 सामान्य अस्पताल, चार विशेषीकृत अस्पताल, डिस्पेंसरी और मातृत्व गृह शामिल हैं। मुंबई की बड़ी आबादी सस्ती और सुलभ चिकित्सा के लिए इन पर निर्भर है। कोविड-19 महामारी के दौरान बीएमसी ने क्वारंटीन केंद्रों और बड़े कोविड केयर सेंटर स्थापित कर अहम भूमिका निभाई। शिक्षा के क्षेत्र में बीएमसी 1,100 से अधिक नगरपालिका स्कूल संचालित करती है, जहां प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा दी जाती है। इनमें से कई स्कूल अब सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध हैं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को कम लागत में शिक्षा प्रदान करते हैं।

निर्माण और बुनियादी ढांचा

बीएमसी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का निर्माण भी करती है, जिनमें फ्लाईओवर, पुल, सबवे और महत्वपूर्ण लिंक रोड शामिल हैं। एक प्रमुख उदाहरण मुंबई कोस्टल रोड है, जिसे 2024 में खोला गया। इससे मरीन ड्राइव से बांद्रा के बीच यात्रा का समय घटकर 10 मिनट से कम हो गया है। अन्य बड़ी परियोजनाओं में गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड और वर्सोवा से भायंदर तक कोस्टल रोड का अगला चरण शामिल है। इसके अलावा, बीएमसी शहर भर में 340 से अधिक पुलों और स्काईवॉक का रखरखाव करती है।

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मुंबई में ढाई हजार से अधिक बसें संचालित करती है BEST। तस्वीर-PTI

सार्वजनिक परिवहन और खुले स्थान

बीएमसी, बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति और परिवहन (BEST) की मूल संस्था है, जो मुंबई और उपनगरों में 2,500 से अधिक बसें चलाती है। वित्तीय चुनौतियों के बावजूद बीएमसी नियमित रूप से BEST को वित्तीय सहायता देती है। चालू वर्ष में नगर निकाय ने परिवहन उपक्रम के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। बीएमसी 26 ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग स्थल और 350 से अधिक ऑन-स्ट्रीट पार्किंग स्थानों का प्रबंधन करती है। साथ ही, यह शहर भर में 800 से अधिक उद्यानों और खुले स्थानों का रखरखाव भी करती है।

बीएमसी की आय का स्रोत

बीएमसी भारत की सबसे बड़ी कर-संग्रह करने वाली स्थानीय निकायों में से एक है। इसकी आय का मुख्य स्रोत संपत्ति कर है, जो मुंबई में आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों पर लगाया जाता है। अन्य स्रोतों में जल शुल्क, सीवरेज शुल्क, भवन अनुमतियों से मिलने वाली फीस, पार्किंग शुल्क और जुर्माने शामिल हैं।

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