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BJP के ‘पांडवों’ ने बंगाल में रच दिया इतिहास! ममता दीदी का ‘चक्रव्यूह’ तोड़ कैसे जीता महायुद्ध?

Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रुझानों में भाजपा बड़ी बढ़त के साथ सरकार बनाती नजर आ रही है, जहां पार्टी ने 207 सीटें जीत ली, जबकि टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई। यह चुनाव भाजपा के लिए किसी “महायुद्ध” से कम नहीं था, जिसे पीएम मोदी की लीडरशिप और अमित शाह की आक्रामक रणनीति ने नई दिशा दी। पर्दे के पीछे आरएसएस की माइक्रो-लेवल प्लानिंग, ड्रॉइंग रूम मीटिंग्स और “लोक मत परिष्कार” अभियान ने भी बड़ा असर डाला। वहीं सुनील बंसल और भूपेंद्र यादव जैसे नेताओं की “साइलेंट स्ट्रेटेजी” और संगठनात्मक मैनेजमेंट ने चुनावी जमीन मजबूत की।

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Photo : ANI
West Bengal Election Result: बंगाल चुनाव में बीजेपी सरकार बनाने के लिए तैयार। AI IMAGE
Authored by: Piyush Kumar
Updated May 5, 2026, 14:45 IST

Bengal Election Result: अंग, कलिंग के बाद बंग में आखिरकार कमल खिलता नजर आ रहा है। बंगाल में पहली बार बीजेपी सरकार बनाने के लिए तैयार है। बीजेपी 207 ने सीटों पर बाजी मार ली। वहीं, टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई। बीजेपी के लिए यह चुनाव किसी 'महायुद्ध' से कम नहीं था।

बंगाल में भयमुक्त चुनाव कराना और वहां की जनता को मतदान केंद्र तक लाना बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन पीएम मोदी की लीडरशिप और गृह मंत्री अमित शाह की प्लानिंग ने इस कठिन कार्य को आसान बना दिया। वहीं, पर्दे के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की रणनीति ने भी मानो कमाल कर दिया।

इस बार आरएसएस की प्लानिंग भी बेहद खास रही। संघ के कार्यकर्ता इस बार खुलेआम झंडे लेकर नहीं घूमे, लेकिन पर्दे के पीछे उसकी तैयारी बहुत तगड़ी रही। संघ के सूत्रों के मुताबिक, 4-5 स्वयंसेवकों की छोटी-छोटी टोलियों ने लोगों के घरों में 'ड्रॉइंग रूम मीटिंग्स' की। बंगाल की लगभग सभी विधानसभा सीटों पर अब तक दो लाख से ज्यादा ऐसी बैठकें हुई।

बंगाल चुनाव में जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी की फाइल फोटो। PTI

बंगाल चुनाव में जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी की फाइल फोटो। PTI

आरएसएस ने बंगाल में चुनाव को केवल राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि बंगाली हिंदुओं के अस्तित्व की लड़ाई के रूप में पेश किया। हिंदू एकता और जागरूकता: बैठकों में हिंदुओं को एकजुट होने और अपनी संस्कृति व अस्मिता के लिए वोट करने की अपील की। इसका उद्देश्य "लोक मत परिष्कार अभियान" के तहत लोगों में जागरूकता फैलाना था।

लेकिन क्या बंगाल में बीजेपी की जीत की क्रेडिट सिर्फ पीएम मोदी की लीडरशिप और आरएसएस की रणनीति को ही देना सही होगा? इसका जवाब शायद नहीं है। दरअसल, इन दोनों के अलावा, पार्टी की इस जीत में कई ऐसे नेताओं की भागीदारी रही, जो ज्यादा लाइमलाइट में रहे बिना अपना काम बखूबा करते रहे।

सुनील बंसल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बीच अगर कोई एक नाम सबसे अधिक सुर्खियों में है, तो वह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल चुनाव प्रभारी सुनील बंसल का है। अपनी 'लो-प्रोफाइल' कार्यशैली और अचूक रणनीतियों के लिए पहचाने जाने वाले बंसल ने इस बार ममता बनर्जी के अभेद्य माने जाने वाले किले में ऐसी सेंध लगाई है, जिसने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खेमे में बेचैनी पैदा कर दी है। उत्तर प्रदेश में भाजपा को फर्श से अर्श पर पहुंचाने वाले सुनील बंसल ने अपने अनुभव से बंगाल में बीजेपी की दिशा और दशा बदल दी।

बंगाल चुनाव प्रभारी सुनील बंसल की फाइल फोटो। instagram handle

बंगाल चुनाव प्रभारी सुनील बंसल की फाइल फोटो। instagram handle

अमित शाह के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में शुमार सुनील बंसल ने बंगाल में 'बूथ मैनेजमेंट' को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। उन्होंने राज्य के प्रत्येक जिले में भाजपा के जमीनी संगठन को इतना सशक्त बनाया है कि प्रतिद्वंद्वी दल भी उनके इस 'प्लान-बी' से अचंभित हैं। बंसल की इसी सूक्ष्म और सटीक रणनीति ने इस चुनाव को बंगाल के इतिहास का सबसे कड़ा और दिलचस्प मुकाबला बना दिया है।

भूपेंद्र यादव

भूपेंद्र यादव ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के 'साइलेंट स्ट्राइकर' और एक मास्टर रणनीतिकार के रूप में ममता बनर्जी के अभेद किले को ढहाने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। सुनील बंसल के साथ मिलकर उन्होंने धरातल पर सूक्ष्म प्रबंधनऔर मजबूत संगठनात्मक ढांचे के जरिए भाजपा को ऐतिहासिक सफलता दिलाई, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनी। बिहार और उत्तर प्रदेश में सफल प्रयोगों के बाद, यादव ने बंगाल में एक 'चाणक्य' की भांति चुपचाप काम करते हुए कार्यकर्ताओं को एकजुट किया और ममता सरकार के खिलाफ व्याप्त सत्ता विरोधी लहर को प्रभावी ढंग से वोट में तब्दील किया।

भाजपा के 'साइलेंट स्ट्राइकर' कहे जाने वाले भूपेंद्र यादव की फाइल फोटो। ANI

भाजपा के 'साइलेंट स्ट्राइकर' कहे जाने वाले भूपेंद्र यादव की फाइल फोटो। ANI

चुनाव प्रभारी के रूप में उन्होंने न केवल राज्य भर में सघन रैलियों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से भाजपा के पक्ष में माहौल तैयार किया, बल्कि मीडिया और आईटी सेल का भी कुशलतापूर्वक उपयोग किया। उन्होंने पार्टी के मीडिया पैनलिस्टों के लिए रणनीतिक 'टू-डू' लिस्ट तैयार की और राज्य शासन की खामियों, जैसे 20 लाख कर्मचारियों के वेतन की समस्याओं, भ्रष्टाचार और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को प्रमुखता से उठाकर "बदलाव" का एक सशक्त नैरेटिव सेट किया। उनकी इसी जमीनी पकड़ और रणनीतिक कौशल ने उन्हें बंगाल में भाजपा की जीत के मुख्य वास्तुकार के रूप में स्थापित किया है।

शुभेंदु अधिकारी

इस चुनावी नतीजे में शुभेंदु अधिकारी की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। संगठन पर उनकी मजबूत पकड़, जमीनी स्तर पर व्यापक नेटवर्क और कार्यकर्ताओं के बीच प्रभाव ने भाजपा की चुनावी रणनीति को मजबूती दी है। उन्होंने हिंदुत्व और स्थानीय मुद्दों के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसा नैरेटिव तैयार किया, जिसने बड़ी संख्या में मतदाताओं को आकर्षित किया।

बंगाल में बीजेपी के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक शुभेंदु अधिकारी। PTI

बंगाल में बीजेपी के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक शुभेंदु अधिकारी। PTI

इसके साथ ही, टीएमसी के खिलाफ उनकी आक्रामक रणनीति और लगातार हमलावर राजनीति ने उन्हें भाजपा का सबसे प्रमुख चेहरा बना दिया। अगर शुरुआती रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो बंगाल की सत्ता की राजनीति में उनकी भूमिका और भी बड़ी हो सकती है। अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वे राज्य की सत्ता में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

सुकांता मजुमदार

सुकांता मजुमदार ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री के रूप में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने विशेष रूप से बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे पार्टी पहले की तुलना में अधिक सशक्त होकर उभरी। मजुमदार ने 'ग्राउंड रियलिटी' और 'साइलेंट वेव' के नैरेटिव पर जोर देते हुए जनता के बीच ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर को प्रभावी ढंग से भुनाया।

2026 के विधानसभा चुनावों के दौरान, मजुमदार ने रणनीतिक रूप से चुनावी कमान संभाली और 170 से अधिक सीटें जीतने का साहसिक दावा पेश किया, जो कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने में निर्णायक साबित हुआ। उन्होंने स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ बनाने के साथ-साथ राज्य की शासन व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाया, जिससे भाजपा को राज्य के उत्तरी और औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी स्थिति और मजबूत करने में मदद मिली। उनकी इसी संगठनात्मक दक्षता और रणनीतिक विजन ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में भाजपा को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित किया।

दिलीप घोष

दिलीप घोष ने अपने प्रदेश अध्यक्ष के कार्यकाल (2015-2021) के दौरान भाजपा को हाशिये से उठाकर बंगाल में मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापित किया। वे अपने 'कैडर कनेक्ट' और संगठन की गहरी समझ के लिए जाने जाते हैं, जिसका उपयोग उन्होंने 2026 के चुनाव में भी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए किया।

चुनाव के दौरान उन्होंने आक्रामक प्रचार अभियान का नेतृत्व किया और उच्च मतदान प्रतिशत को राज्य में एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) और भाजपा की बढ़ती ताकत के संकेत के रूप में पेश किया। उनका मानना है कि बंगाल की महिला मतदाताओं ने इस बार 'संदेशखली' जैसे मुद्दों और बदलाव की चाह मेंबढ़-चढ़करकर भाजपा के पक्ष में मतदान किहै।।

चुनावी रणनीति और भविष्य भूमिका 2026 के चुनाव में दिलीप घोष ने खड़गपुर सदर (Kharagpur Sadar) विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर सीधे तौर पर मोर्चा संभाला, जहां मतगणना के शुरुआती रुझानों में उन्होंबढ़तबढ़त बनाए रखी। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने 7वें वेतन आयोग को लागू करने, बेहतर सुशासन और महिला सुरक्षा जैसे वादों को प्रमुखता से उठाया।

भाजपा के भीतर उन्हें एक ऐसे अनुभवी 'संगठनात्मक योद्धा' के तौर पर देखा जाता है, जिन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जीगढ़ गढ़ में भाजपा के 'मिशन 200' की नींव रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान में राज्य में भाजपा की संभावित जीत के बीच, उनके अनुभव और जमीनी प्रभाव को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदारों में से एक माना जा रहा है।

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