- लक्ष्मी भंडार योजना के तहत मिलने वाली राशि में 500 रुपये की बढ़ोतरी की गई।
- भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई तो लक्ष्मी भंडार के तहत 3000 रुपये दिए जाएंगे।
- बंगाल चुनाव से पहले महिला वोटर्स को लुभाने में जुटी टीएमसी और बीजेपी।
Bengal Election 2026: बंगाल विधानसभा चुनाव में अब बस कुछ महीने बचे हैं। गुरुदेव रवींद्रनाथ नाथ टैगोर द्वारा लिखे प्रसिद्ध बंगाली गीत 'तोबे एकला चलो रे' वहां की राजनीति के लिए बिल्कुल सटीक बैठ रही है। एक तरफ जहां बंगाल में बीजेपी (BJP) अकेले दम पर मैदान में उतर रही है, तो वहीं दूसरी ओर विपक्षी इंडी गठबंधन का वहां कोई नाम-ओ-निशान नहीं है।
मतलब साफ है कि ममता दीदी अकेले बीजेपी से लोहा लेने के लिए तैयार हैं। वहीं, बिहार में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस के भीतर बंगाल चुनाव को लेकर कोई खास उत्साह नजर नहीं आ रहा। कुल मिलाकर बंगाल चुनाव में मुकाबला बीजेपी (BJP) बनाम तृणमूल कांग्रेस (TMC) है।
घुसपैठ को मुद्दा बनाकर बीजेपी ने बंगाल चुनाव का शंखनाद कर दिया है। बीजेपी का आरोप है कि टीएमसी घुसपैठ हितैषी है। वोट बैंक बचाने के लिए ममता दीदी, देश को खतरे में डाल रही हैं। वहीं दूसरी ओर, ममता दीदी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) की खामियों को उजागर करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गईं। घुसपैठिए और एसआईआर (SIR) जैसे मुद्दों ने भले ही बंगाल में राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी हो, लेकिन चुनाव सिर्फ नैरेटिव या एजेंडे पर नहीं लड़ा जाता।
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ममता दीदी का 'ब्रह्मास्त्र'
कुछ महीने पहले ही बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुआई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को प्रचंड जीत मिली। इस जीत का सबसे बड़ा एक्स-फैक्टर न तो SIR थे न ही बेरोजगारी जैसे मुद्दे। वोट तो मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना जैसी लोक कल्याणकारी योजनाओं और सरकारी स्कीम पर ही पड़े। यह बात ममता दीदी भी बेहतर ढंग से समझ चुकी हैं। इसी इसीलिए उन्होंने अपना 'ब्रह्मास्त्र' यानी लक्ष्मी भंडार योजना (Lakshmi Bhandar Yojana) को और सशक्त करने का मन बना लिया। साल 2021 विधानसभा चुनाव और साल 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी के शानदार प्रदर्शन के पीछे इस स्कीम का बड़ा हाथ है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी की अगुआई वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को लक्ष्मी भंडार योजना में 500 रुपये की मासिक वृद्धि की घोषणा की। इसके साथ ही गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने के लिए एक नए पोर्टल का प्रस्ताव रखा।
मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि हम 100 दिन रोजगार योजना, आवास योजना जैसी कई योजनाओं में नंबर एक पर हैं। गिग वर्कर्स के लिए हम एक पोर्टल बनाएंगे जहां वे लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
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महिलाओं के लिए ममता दीदी ने खोला 'सरकारी खजाना'
इतना ही नहीं, बंगाल की महिलाओं के लिए ममता दीदी ने और कई वादे किए। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी भंडार योजना के तहत, महिला लाभार्थियों को अब फरवरी 2026 से प्रति माह अतिरिक्त 500 रुपये प्राप्त होंगे।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी सहायकों, आशा कार्यकर्ताओं, आईसीडीएस कार्यकर्ताओं, साथ ही नागरिक स्वयंसेवकों, ग्राम पुलिस और हरित पुलिस कर्मियों के मासिक वेतन में अप्रैल 2026 से 1,000 रुपये की वृद्धि होगी।
इसके अतिरिक्त, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायकों को 60 वर्ष की आयु से पहले मृत्यु होने की स्थिति में 5 लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा मिलेगा।
1000 नहीं, हम 3000 रुपये देंगे: बीजेपी
ममता दीदी के इन लोक लुभावन वादों को बीजेपी के नेता भी ध्यान से सुनते रहे। मुख्यमंत्री ममता दीदी के वादों को सुनने के तुरंत बाद बीजेपी नेता और बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि अगर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई तो लक्ष्मी भंडार के तहत 3000 रुपये दिए जाएंगे। यानी टीएमसी ने लाभार्थियों को 1000 रुपये देने का वादा किया है, तो बीजेपी ने 3000 रुपये देने की बात कही है।
suvendhu adhikari
लक्ष्मी भंडार योजना क्या है?
लक्ष्मी भंडार योजना पश्चिम बंगाल सरकार की एक प्रमुख सामाजिक कल्याण योजना है, जिसे फरवरी 2021 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुरू किया था। इस योजना का मकसद राज्य की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति मजबूत करना और वित्तीय स्वतंत्रता देना है।
इस योजना का लाभ पश्चिम बंगाल की स्थायी निवासी महिलाओं को मिलता है, जिनकी उम्र 25 से 60 वर्ष के बीच है और जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं। वर्तमान में करीब 2.42 करोड़ महिलाएं इस योजना से लाभान्वित हो रही हैं।
शुरुआत में सामान्य/अन्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) वर्ग की महिलाओं को 1200 रुपये दिए जाते थे। अब सरकार ने राशि बढ़ाकर सामान्य वर्ग के लिए 1500 रुपये और SC/ST वर्ग की महिलाओं के लिए 1700 रुपये प्रति माह कर दी है, जिससे महिलाओं को और अधिक आर्थिक संबल मिल सके।
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महिलाओं के खाते में पैसा मतलब जीत की गारंटी...
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र से लेकर बिहार चुनाव तक, विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को लुभाने वाली योजनाएं जीत की गारंटी बन चुकी हैं। दरअसल, मध्य प्रदेश में 2023 के चुनाव से पहले शुरू की गई लाडली बहन योजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनी। इस योजना के दम पर बीजेपी ने मध्य प्रदेश चुनाव में भारी बहुमत हासिल की।
इसके बाद महाराष्ट्र में लाडकी बहीण योजना, छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना, बिहार में महिला रोजगार योजना और ओडिशा में सुभद्रा योजना लागू की गईं। इन सभी राज्यों में बीजेपी को चुनावी सफलता मिली।
इन योजनाओं की सबसे अहम खासियत यह रही कि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने सीधे पैसे ट्रांसफर किए गए, जिससे सरकार और लाभार्थियों के बीच सीधा जुड़ाव बना।
वहीं 2024 में झारखंड में जेएमएम ने भी महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता देने वाली योजना शुरू की, जिसका असर चुनाव नतीजों में साफ दिखा। पार्टी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की।
ममता राज में महिलाएं कितनी सुरक्षित?
साल 2019 में सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज के पोस्ट पोल सर्वे के अनुसार, पूरे देश में तृणमूल कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जिसे पुरुषों के मुकाबले महिलाओं से ज्यादा वोट मिलते हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों में बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के कई खौफनाक मामले सामने आए।
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संदेशखाली
पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना का छोटा सा गांव संदेशखाली। फरवरी 2024 में ये गांव सुर्खियों में आया, जब तीन महिलाओं ने ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी (TMC) के नेता रहे शाहजहां शेख पर गैंगरेप के आरोप लगाए। देशभर में इस घटना पर चर्चा हुई। बीजेपी ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया।
आरजी कर कॉलेज मामला
यह मुद्दा पूरी तरह शांत हुआ भी नहीं था कि कोलकाता के आरजी कर रेप-मर्डर केस ने देश को झकझोर कर रख दिया। महिला प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की भयावह घटना ने बंगाल में महिला सुरक्षा को लेकर ममता दीदी के सारे वादों पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया। वहीं, बची कुची कसर ममता दीदी ने यह कहकर पूरी कर दी कि 'रात में लड़कियां हॉस्टल से बाहर न निकलें।'
साल 2021 में विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक बंगाल में बहुत कुछ बदल चुका है। इस बार बीजेपी के पास बंगाल के लिए कई मुद्दे हैं, जिनमें घुसपैठिए और महिला सुरक्षा सबसे अहम हैं। वहीं बीजेपी का आरोप है कि ममता दीदी की जिद्द की वजह से बंगाल के लोगों को केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।
पिछले 14 साल से बंगाल की सत्ता में काबिज ममता दीदी देश की एकमात्र महिला विपक्षी नेता हैं, जो बीजेपी को कोलकाता से लेकर दिल्ली तक चुनौती दे रही हैं। आज के समय में उनसे बेहतर बंगाल की जनता को कोई और नेता नहीं समझता है। उन्हें भी यह अहसास है कि बंगाल में अजेय बने रहना है तो नीतीश सरकार और केंद्र की तरह राज्य के सरकारी खजानों को महिलाओं के वित्तीय लाभ के लिए खोलना ही होगा।
