Ayatollah Ali Khamenei Funeral: अमेरिका और इजरायल के हमलों में मारे गए ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिन तक चलने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम शनिवार से शुरू हो गए। फरवरी में ईरान युद्ध की शुरुआत में हुए हवाई हमले में 86 वर्षीय खामेनेई की मौत हो गई थी। खामेनेई का शव ईरान की राजधानी तेहरान स्थित ’ग्रैंड मोसल्ला’ में लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखे जाने का कार्यक्रम है।
भारत सरकार का एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भी ईरान के राष्ट्रव्यापी शोक में शामिल हुआ, जहां भारत सरकार की तरफ से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम दर्शन किए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, शुक्रवार (03 जुलाई) को कार्यक्रम में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार सिर्फ एक धार्मिक या पारिवारिक रस्म नहीं माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान इस समारोह को अपनी राजनीतिक ताकत, जनसमर्थन और रणनीतिक संदेश देने के मंच के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। हाल ही में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बीच आयोजित यह अंतिम संस्कार पूरी दुनिया की निगाहों में है। ऐसे समय में जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल लगातार ईरान पर दबाव बनाए हुए हैं, तेहरान इस समारोह के जरिए यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि उसके नेतृत्व और व्यवस्था के प्रति जनता का समर्थन अब भी मजबूत है।
अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। AP
आखिर अंतिम संस्कार इतना अहम क्यों है?
ईरान में सर्वोच्च नेता सिर्फ धार्मिक प्रमुख नहीं, बल्कि देश की सैन्य, राजनीतिक और रणनीतिक नीतियों के सबसे बड़े निर्णायक भी होते हैं। इसलिए खामेनेई की विदाई को केवल शोक समारोह नहीं, बल्कि सत्ता के निरंतर बने रहने और राष्ट्रीय एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। तेहरान की सड़कों पर लाखों लोगों की मौजूदगी, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी और लगातार आयोजित हो रहे धार्मिक कार्यक्रम इसी संदेश को मजबूत करते हैं।
ट्रंप को क्या संदेश देना चाहता है ईरान?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस समारोह के जरिए अमेरिका, खासकर डोनाल्ड ट्रंप को यह संदेश देना चाहता है कि सैन्य दबाव, प्रतिबंध या इजराइल के साथ बढ़ते टकराव के बावजूद उसकी राजनीतिक व्यवस्था कमजोर नहीं हुई है। ईरान यह दिखाना चाहता है कि नेतृत्व में बदलाव के बावजूद उसकी विदेश नीति, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय रणनीति में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होगा। यही कारण है कि समारोह को व्यापक जनभागीदारी और अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति के साथ आयोजित किया जा रहा है।
अंतिम संस्कार के जरिए अमेरिका को बड़ा संदेश देना चाह रहा ईरान। AP
मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व पर भी टिकी नजर
खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने के बाद यह पहला बड़ा सार्वजनिक आयोजन है। ऐसे में यह समारोह नए नेतृत्व की स्वीकार्यता और उसके प्रति जनता तथा सत्ता प्रतिष्ठान के समर्थन का भी संकेत माना जा रहा है। ईरानी सरकार इस मौके पर यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि सत्ता परिवर्तन शांतिपूर्ण ढंग से हुआ है और देश की संस्थाएं पूरी तरह सक्रिय हैं।क्या इसका असर परमाणु वार्ता पर पड़ेगा?
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता फिर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हाल में सकारात्मक बातचीत हुई है। हालांकि अंतिम संस्कार के दौरान ईरान अपने रुख में कोई नरमी दिखाने के बजाय पहले घरेलू एकजुटता और राजनीतिक मजबूती का प्रदर्शन करना चाहता है। माना जा रहा है कि इस शक्ति प्रदर्शन के बाद ही तेहरान वार्ता की अगली रणनीति तय करेगा।
पश्चिम एशिया की राजनीति पर क्या होगा असर?
खामेनेई की विदाई ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया पहले से ही अस्थिर दौर से गुजर रहा है। इजराइल-ईरान तनाव, गाजा युद्ध, लेबनान की स्थिति और परमाणु वार्ता जैसे कई मुद्दे एक साथ जुड़े हुए हैं। ऐसे में यह अंतिम संस्कार केवल ईरान का आंतरिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है। दुनिया अब इस बात पर नजर रखे हुए है कि नए नेतृत्व में ईरान टकराव का रास्ता चुनता है या कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाता है।
