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Explained: CDF बनते ही आसिम मुनीर की कितनी बढ़ गई ताकत, भारत के सामने अब कैसी चुनौतियां?

सीडीएफ बनने के बाद अब आसिम मुनीर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी अधिक शक्तिशाली हैं, और इस अभूतपूर्व शक्ति का इस्तेमाल अपने हित में कर सकते हैं। पाकिस्तान में अब तक 24 प्रधानमंत्री हो चुके हैं, लेकिन किसी ने भी अपना पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है। क्या पाकिस्तान फिर उसी दिशा में बढ़ रहा है। कैसे मुनीर ने इतनी ताकत हासिल कर ली और इससे भारत पर क्या असर होगा, विस्तार से जानते हैं।

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कैसे चमकी आसिम मुनीर की किस्मत? (AP)

सैयद आसिम मुनीर ने पकिस्तान के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) का पद संभाल लिया है। इस पद पर आसिम मुनीर की नियुक्ति पांच साल की अवधि के लिए हुई है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सैयद आसिम मुनीर को 5 साल के लिए सीडीएफ के साथ-साथ सीओएस के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी। इसी के साथ खुद को फील्ड मार्शल घोषित कर चुके आसिम मुनीर की ताकत में जबरदस्त इजाफा हुआ है। मुनीर को न सिर्फ तीनों सेनाओं की कमान मिल गई है बल्कि नागरिक सरकार में हस्तक्षेप करने का भी हथियार मिल गया है। एक तरह से अब आसिम मुनीर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी अधिक शक्तिशाली हैं, और इस अभूतपूर्व शक्ति का इस्तेमाल अपने हित में कर सकते हैं। पाकिस्तान में अब तक 24 प्रधानमंत्री हो चुके हैं, लेकिन किसी ने भी अपना पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है। क्या पाकिस्तान फिर उसी दिशा में बढ़ रहा है। कैसे मुनीर ने इतनी ताकत हासिल कर ली और इससे भारत पर क्या असर होगा, विस्तार से जानते हैं।

सरकार और सेना में मुनीर की धमक

सेना प्रमुख आसिम मुनीर को कई अधिकारियों के साथ पांच साल का विस्तार दिया गया है। 2018 तक मुनीर का सेना में करियर शानदार ढंग से आगे बढ़ रहा था। 25 अक्टूबर 2018 को उन्हें आईएसआई का महानिदेशक नियुक्त किया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ विवाद के बाद, उसे जून 2019 में हटा दिया गया। यह पहली बार था जब किसी महानिदेशक को मात्र आठ महीने बाद हटाया गया था। आसिम को पदावनत कर गुजरांवाला में XXX कोर कमांडर के रूप में तैनात किया गया था। लेकिन इमरान खान के जेल जाने के बाद मुनीर की किस्मत पलटी। नवंबर 2022 में मुनीर को तीन साल के लिए पाकिस्तान का सेना प्रमुख नियुक्त किया गया। उनका कार्यकाल 2024 में समाप्त होना था, लेकिन उससे पहले ही पाकिस्तान ने सेना अधिनियम में संशोधन कर कार्यकाल पांच साल के लिए बढ़ा दिया। ये पाकिस्तान की सियासत और सेना में मुनीर की धमक और उसके असर का कमाल था।

ऑपरेशन सिंदूर से आसिम मुनीर की किस्मत कैसे चमकी?

उस समय पाकिस्तानी सेना स्वतंत्र बलूचिस्तान की मांग कर रही बलूच मुक्ति सेना के हमलों से जूझ रही थी। दूसरी ओर, अफगान तालिबान पाकिस्तानी सेना पर भारी दबाव बना रहे थे। सेना के भीतर भी मतभेद की खबरें थीं और मुनीर घरेलू राजनीतिक मामलों को लेकर दबाव में थे। फिर, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और मुनीर की किस्मत पूरी तरह बदल गई। ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन "बनियान-उल-मरसूस" शुरू किया। 7 से 10 मई के बीच हुई झड़पों के बाद, युद्धविराम की घोषणा की गई। पाकिस्तान ने झूठा दावा करते आसिम मुनीर को इस मनगढ़ंत जीत का हीरो बताया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मुनीर को दोपहर के भोजन पर आमंत्रित किया और उनके साथ एक गुप्त बैठक की। मुनीर ने तुर्की जैसे देशों का दौरा किया। सभी प्रमुख कार्यक्रमों में वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ प्रमुखता से दिखाई देने लगे। इससे दुनिया को पता चला कि मुनीर की ताकत किस कदर बढ़ती जा रही है।

20 मई 2025 को मुनीर को इस "झूठी जीत" के लिए फील्ड मार्शल के पद पर प्रमोट करके पुरस्कृत किया गया। उससे पहले, सिर्फ जनरल अयूब खान ही इस पद पर रहे थे। फील्ड मार्शल पाकिस्तान सेना का सर्वोच्च पद है, जिसे आमतौर पर फाइव-स्टार जनरल कहा जाता है, और यह पद असाधारण युद्धकालीन प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। लेकिन हास्यास्पद बात ये है कि भारत-पाक के बीच कोई युद्ध नही बल्कि कुछ दिनों का संघर्ष हुआ था और इसमें पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ था।

आसिम मुनीर अब कितना ताकतवर?

संविधान में संशोधन करके पाकिस्तान ने एक कदम और आगे बढ़कर आसिम मुनीर को तीनों रक्षा बलों का प्रमुख बना दिया है। नए सीडीएफ मुख्यालय से मुनीर तीनों सेवाओं - वायु सेना, सेना और नौसेना के प्रशासन, संचालन और युद्धकालीन निर्णय लेने की प्रक्रिया की देखरेख करेंगे। वायु सेना, सेना और नौसेना सीधे उनके अधीन काम करेंगी। पहले, सीजेसीएससी (मुख्य न्यायाधीश और पुलिस प्रमुख) सेवाओं का समन्वय करते थे, लेकिन उनके निर्णय सेवा प्रमुखों पर बाध्यकारी नहीं थे। सीडीएफ को राष्ट्रपति के समान कानूनी प्रतिरक्षा हासिल है। उनके खिलाफ कभी कोई मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। उन्हें सिर्फ महाभियोग के माध्यम से ही पद से हटाया जा सकता है। सीडीएफ पाकिस्तान के परमाणु कमान को भी नियंत्रित करता है।

मुनीर सेना प्रमुख के पद पर बने हुए हैं, जिसका मतलब है कि वे पहले से ही राष्ट्रीय कमान प्राधिकरण के सदस्य हैं, जो परमाणु हथियारों की देखरेख करता है। यानी मुनीर के हाथ एक और बड़ी ताकत आ गई है।

क्या मुनीर की बढ़ती ताकत से भारत की बढ़ेगी चिंता?

सबसे पहले, भारत के बारे में मुनीर के भड़काऊ बयानों पर गौर करें। पहलगाम हमले से एक सप्ताह पहले, उन्होंने कहा था: हम हर मायने में हिंदुओं से अलग हैं, हमारा धर्म, संस्कृति, रीति-रिवाज, सोच और महत्वाकांक्षाएं अलग हैं। इसीलिए दो-राष्ट्र सिद्धांत अस्तित्व में आया। हम दो अलग-अलग राष्ट्र हैं। इसी के बाद पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुनीर को अमेरिका यात्रा का न्यौता मिला। अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान मुनीर ने फिर शेखी बघारते हुए कहा: पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है। अगर हम गिरे, तो आधी दुनिया हमारे साथ गिर जाएगी। अगर भारत सिंधु नदी पर बांध बनाने की कोशिश करता है, तो हम हर कीमत पर अपने जल की रक्षा करेंगे। पाकिस्तानी सेना के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा: हम अपने कश्मीरी भाइयों के साथ उनकी आजादी की लड़ाई में खड़े हैं। जिसे भारत आतंकवाद कहता है, वह कश्मीरियों का जायज संघर्ष है। जब तक कश्मीर मुद्दा हल नहीं हो जाता, अशांति जारी रहेगी।

अपने कट्टरपंथी विचारों के कारण, मुनीर को अक्सर मौलाना जनरल कहा जाता है। उन्होंने हमेशा भारत के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। अब सर्वोच्च सैन्य शक्ति के साथ उसके लिए अपने भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान हो जाएगा। यही भारत के लिए चिंता की बात है। मुनीर के मंसूबे अब छिपे नहीं रह गए हैं। मुनीर ने सीडीएफ की कमान संभालते ही भारत को गीदड़भभकी देने की कोशिश की, कहा कि भारत किसी गलतफहमी में न रहे। साफ तौर पर मुनीर भारत से टकराने का मंसूबा बांधे हुए हैं। अब परमाणु कमांड भी उन्हीं के हाथों में पहुंच गई है, शरीफ सरकार घुटनों पर आ चुकी है। मुनीर ने न सिर्फ चीन-तुर्की, बल्कि अमेरिका को भी साध लिया है। ऐसे में भारत को मुनीर की चालों से बेहद सावधान रहना होगा। देर सवेर भारत को मुनीर का तोड़ निकालना ही होगा, अन्यथा बहुत देर हो जाएगी।

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