Dacoit Movie Review: अदिवी शेष और मृणाल ठाकुर की फिल्म डकैत 10 अप्रैल को बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई है। फिल्म में अनुराग कश्यप का भी एक छोटा मगर धांसू रोल देखने को मिलने वाला है। अगर आप इस फिल्म को देखने का प्लान कर रहे हैं, तो इस रिव्यू को आपको एक बार जरूर पढ़ लेना चाहिए।
डकैत फिल्म का रिव्यू (Pic Credit: IMDb)
Dacoit Movie Review: डकैत: एक प्रेम कथा आज यानी 10 अप्रैल 2026 को बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई है। ये फिल्म तेलुगु-हिंदी दोनों भाषाओं में आई है। मुख्य किरदार में हैं अदिवी शेष और मृणाल ठाकुर है। डायरेक्टर हैं शनैल देओ और फिल्म में अनुराग कश्यप भी छोटे रोल में हैं। फिल्म में लव स्टोरी के साथ-साथ एक्शन सीन्स भी जमकर देखने को मिलने वाले हैं। अगर आप भी इस फिल्म को देखने के प्लान कर रहे हैं, तो ये रिव्यू आपके काफी काम आने वाला है। इस खबर में हम आपको फिल्म की अच्छी और बुरी बातें भी बताने वाले हैं।
कहानी 2005 से शुरू होती है। हरि (अदिवी शेष) एक गरीब परिवार से है और सरस्वती (मृणाल ठाकुर) अमीर ऊंची जाति की लड़की है। दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं। लेकिन एक घटना के बाद हरि को झूठे आरोप में जेल हो जाती है। सालों बाद 2021 में हरि जेल से भाग निकलता है और बदला लेने निकलता है। तब वो सरस्वती से फिर मिलता है, जो अब शादीशुदा है और मुश्किल में फंसी हुई है। कहानी में एक बड़ा हीस्ट भी जुड़ जाता है, जो सरस्वती के पति की बीमारी और अस्पताल की भ्रष्टाचार से जुड़ा है। फिल्म में समय-समय पर फ्लैशबैक आते हैं, जो कहानी को जोड़ते हैं। ये रोमियो-जूलियट जैसी लव स्टोरी से शुरू होकर बदले और एक्शन की तरफ मुड़ जाती है। लेकिन कई जगह प्लॉट प्रेडिक्टेबल लगता है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत अदिवी शेष और मृणाल ठाकुर की एक्टिंग है। अदिवी शेष ने बहुत मेहनत की है वो प्यार, गुस्सा, बदला और एक्शन सब अच्छे से दिखाते हैं। मृणाल ठाकुर भी सरस्वती के रोल में अच्छी लगती हैं, खासकर इमोशनल पार्ट्स में। अनुराग कश्यप का छोटा रोल बहुत प्रभावशाली है, वो थोड़े समय में भी अच्छा असर छोड़ते हैं। फिल्म का पहला हाफ काफी अच्छा है लव स्टोरी रोचक लगती है और हीस्ट का सेटअप मजेदार है। कुछ एक्शन सीन और ट्विस्ट काफी अच्छे हैं। राजनीतिक कटाक्ष और अस्पताल की भ्रष्टाचार वाली बात भी आपको सोचने पर मजबूर कर देगी।
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी कहानी और पेसिंग है। स्क्रीनप्ले बिखरा हुआ लगता है, टाइमलाइन बार-बार बदलने से कन्फ्यूजन होता है। दूसरे हाफ में फिल्म अपनी रफ्तार खो देती है। हीस्ट के सीन बहुत बेसिक और पुराने तरीके के लगते हैं, कोई नया ट्विस्ट या सस्पेंस नहीं है। डायलॉग पुराने जमाने जैसे हैं और हिंदी वर्जन में अनुवाद भी कमजोर है। कुछ जगह ओवर-द-टॉप लगता है और कहानी प्रेडिक्टेबल हो जाती है। फिल्म में बहुत सारे आइडिया हैं लेकिन उन्हें अच्छे से जोड़ा नहीं गया। कुल मिलाकर, शुरू में उम्मीद जगाती है लेकिन बाद में उत्साह खत्म हो जाता है।
अगर आप अदिवी शेष या मृणाल ठाकुर के फैन हैं और लव स्टोरी से एक्शन वाली फिल्म पसंद करते हो तो थिएटर में देख सकते हो। पहले हाफ और कुछ एक्शन सीन के लिए फिल्म देखने लायक है। दोस्तों या फैमिली के साथ जा सकते हो अगर हल्की-फुल्की मास एंटरटेनमेंट चाहते हो। लेकिन अगर आपको सॉलिड स्क्रिप्ट, अच्छा सस्पेंस और टाइट पेस वाली फिल्म चाहिए तो शायद स्किप कर सकते हैं।