आरुषि निशंक को वर्ल्ड एनवायर्नमेंट डे पर खास सेरेमनी के लिए चुना गया गेस्ट ऑफ ऑनर

आरुषि निशंक को वर्ल्ड एनवायर्नमेंट डे पर यूनाइटेड नेशंस एनवायर्नमेंट प्रोग्राम (यूएनईपी) फेथ फॉर अर्थ काउंसलर्स रिकग्निशन सेरेमनी के लिए गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में चुना गया है।

Arushi Nishank
Arushi Nishank 

देश के शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की बेटी आरुषि निशंक इन दिनों खासा चर्चा में हैं। वह कुछ समय पहले टी-सीरीज के म्यूजिक वीडियो, 'वफा ना रास आई' में नजर आई थीं। अब उन्‍हें यूनाइटेड नेशंस एनवायर्नमेंट प्रोग्राम (यूएनईपी) फेथ फॉर अर्थ काउंसलर्स रिकग्निशन सेरेमनी के लिए गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में चुना गया है। आरुषि निशंक एक बेहतरीन कथक डांसर, एक्ट्रेस और आंत्रप्रेन्योर हैं। वे एक पॉवरफूल सोशल एक्टिविस्ट और एनवायर्नमेंटल कंजर्वेशनिस्ट हैं, जो अपने स्थापित एनजीओ, स्पर्श गंगा के माध्यम से गंगा नदी के संरक्षण, नमामि गंगा अभियान के माध्यम से गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने और पृथ्वी को बचाने के लिए अधिक पेड़ लगाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। 

प्रतिष्ठित यूनाइटेड नेशंस एनवायर्नमेंट प्रोग्राम (यूएनईपी) और यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) द्वारा संचालित द फेथ फॉर अर्थ काउंसलर्स रिकग्निशन सेरेमनी, 6 महीने के लंबे प्रोग्राम का एक हिस्सा है, जो जनवरी 2021 में यूएनईपी फेथ फॉर अर्थ के मार्गदर्शन और समर्थन के तहत नैरोबी, यूएनईपी इंडिया और यूनाइटेड रिलिजंस इनिशिएटिव तीन देशों यानी भारत, लेबनान और बोस्निया-हर्जेगोविना में शुरू हुआ था। 

इस प्रोग्राम के तहत असोसिएशन्स ने फेथ-बेस्ड ऑर्गेनाइजेशंस का एक एक्टिव नेटवर्क स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है, जो वर्तमान एनवायर्नमेंटल अर्जेंसीज को संबोधित कर सकते हैं, जिनसे हमें खतरा है। बड़ी संख्या में फेथ-बेस्ड ऑर्गेनाइजेशंस के लिए डेटा एकत्र करने, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की एक लंबी कठिन प्रक्रिया के बाद, वे अंततः कुछ फेथ-बेस्ड ऑर्गेनाइजेशंस की पहचान करने में सक्षम हुए हैं, जिन्हें ऑनलाइन सेरेमनी में सम्मानित किया जा सकता है। गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में आरु‍षि निशंक ने इनमें से प्रत्येक ऑर्गेनाइजेशन को फेथ फॉर अर्थ काउंसलर की उपाधि से सम्मानित किया।

आरुषि कहती हैं, "इस कोविड-19 स्थिति में, हमने दो प्रमुख बातें समझीं, पहली, मानवता का महत्व और दूसरा ऑक्सीजन। यह समय बीत जाएगा, लेकिन हमें इससे जुड़े पहलुओं के बारे में सोचना होगा। ऑक्सीजन की कमी के कारण हमने अपनों को खोया है। हम सभी जानते हैं कि ऑक्सीजन का सबसे बड़ा स्रोत पेड़ हैं, तो आइए अधिक से अधिक पेड़ लगाने और ऑक्सीजन बचाने का संकल्प लें।"


 

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