Women turnout in Bengal Polls: पश्चिम बंगाल में इस बार रिकॉर्ड मतदान हुआ है। बीते 9 अप्रैल और 23 अप्रैल को हुए बंपर मतदान ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार बंगाल में 92.47 प्रतिशत मतदान हुआ है और इतनी वोटिंग आज तक बंगाल में किसी भी लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में नहीं हुई। इस चुनाव की खास बात यह है कि मतदान में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ा है। मतदान में पुरुषों का प्रतिशत जहां 91.74 है वहीं, महिलाएं की भागीदारी 93.24% रही है। बंगाल में महिलाएं पहले भी बड़ी संख्या में मतदान में हिस्सा लेती रही हैं लेकिन इस बार उनकी बंपर वोटिंग कुछ और ही संकेत दे रही है। पुरुषों से करीब 2 दो प्रतिशत ज्यादा महिलाओं का वोट क्या ममता को सत्ता में बनाए रखने के लिए है या सत्ता की चाबी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सौंपने के लिए है, इस पर से पर्दा चार मई को हटेगा।
पिछले विस चुनाव में भी पुरुषों से ज्यादा वोट किया
बंगाल चुनाव में महिलाओं की हिस्सेदारी की अगर बात करें तो 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले, सबसे अधिक मतदान 2011 में 84.72% दर्ज किया गया था। उस वर्ष महिलाओं का मतदान 84.45% और पुरुषों का 84.22% था। 2011 का चुनाव खास इसलिए भी था क्योंकि इसी समय 34 साल के वेफ्ट शासन का अंत हुआ और ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस पहली बार सत्ता में आई।
2014 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं का वोट शेयर गिरा
हालांकि, 2014 का लोकसभा चुनाव ही 2011 के बाद एकमात्र ऐसा चुनाव रहा जब महिलाओं का मतदान पुरुषों से कम था। उस समय कुल मतदान 82.22% था, जिसमें महिलाओं का 81.96% और पुरुषों का 82.19% मतदान रहा। 2016 के विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 83.02% रहा, जिसमें महिलाओं का मतदान 83.13% और पुरुषों का 82.23% था तो 2019 के लोकसभा चुनाव में भी यही रुझान देखने को मिला। कुल मतदान 81.76% रहा, महिलाओं का 81.79% और पुरुषों का 81.35%।
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2021 में 81.75% रहा महिलाओं का वोट प्रतिशत
2021 के विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 82.3% रहा, जिसमें महिलाओं का 81.75% और पुरुषों का 81.37% मतदान दर्ज हुआ। 2024 के लोकसभा चुनाव में यह अंतर और बढ़ गया। कुल मतदान 79.55% था, जिसमें महिलाओं का 80.16% और पुरुषों का 78.2% मतदान रहा। मौजूदा विधानसभा चुनाव के दो चरणों में भी मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष वोट देने पहुंचे।
बड़ी संख्या में महिलाएं ममता को करती आई हैं वोट
2011 के बाद से TMC की लगातार जीत में महिलाओं की बड़ी भूमिका रही है। ममता बनर्जी ने महिलाओं को एक अलग वोट बैंक के रूप में मजबूत किया और उनके लिए कई योजनाएं शुरू कीं। इनमें ‘कन्याश्री’ योजना (लड़कियों की शिक्षा के लिए), ‘रूपाश्री’ योजना (शादी के लिए आर्थिक सहायता) और 2021 में शुरू की गई ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना (महिलाओं को मासिक सहायता, जो अब 1500 रुपये हो गई है) शामिल हैं।
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बीते चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
हालांकि, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है। पूरे भारत में पिछले कुछ लोकसभा चुनावों में महिलाओं की संख्या और मतदान प्रतिशत दोनों बढ़े हैं। 2009 में कुल मतदाताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 47.73% थी, जो 2019 में बढ़कर 48.09% हो गई। बंगाल में 1962 से 2009 तक महिलाओं का मतदान लगातार पुरुषों से कम रहा। 1962 में कुल मतदान 55% था, जिसमें पुरुषों का 61.77% और महिलाओं का 47.43% मतदान था। 2009 तक आते-आते यह अंतर लगभग खत्म हो गया। कुल मतदान 81.42% था, महिलाओं का 80.25% और पुरुषों का 82.29%।
टीएमसी और भाजपा के अलग-अलग दावे
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक माकपा नेता सुजान चक्रवर्ती के अनुसार, 1978 से पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू होने के बाद उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ी। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि राज्य से युवाओं के पलायन के कारण कई पुरुष वोट नहीं डाल पाते, जबकि महिलाएं मतदान में सक्रिय रहती हैं। टीएमसी प्रवक्ता अरुप चक्रवर्ती ने कहा कि बंगाल में महिलाओं के सशक्तिकरण की परंपरा ईश्वर चंद्र विद्यासागर और राजा राममोहन रॉय जैसे समाज सुधारकों से जुड़ी है, जिसकी वजह से यहां महिलाएं बड़ी संख्या में मतदान करती हैं। वहीं, भाजपा नेता राहुल सिन्हा का कहना है कि टीएमसी शासन में महिलाओं के साथ अत्याचार बढ़े, जिसके कारण उन्होंने इस चुनाव में TMC के खिलाफ मतदान किया।
