Kerala Possible CM Candidate Face: केरल की राजनीति ने इस बार करवट ले ली है। पिछले दस साल से अभेद्य दिख रहा लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) का किला ढह चुका है और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की अगुवाई में कांग्रेस की सत्ता में जोरदार वापसी हुई है। 140 सीटों वाली विधानसभा में UDF 'शतक' लगाने के करीब है और कांग्रेस अकेले दम पर बहुमत का आंकड़ा छूती दिख रही है। लेकिन, कांग्रेस के लिए असली चुनौती चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जीत के बाद 'अपनों' को संभालना है। केरल के सियासी गलियारों में अब सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है, कि केरल का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा? क्या केरल में भी मध्य प्रदेश, राजस्थान या कर्नाटक जैसी गुटबाजी दोहराई जाएगी?
मुख्यमंत्री की रेस: तीन चेहरे, तीन ताकतें
1. वीडी सतीशन: जमीनी पकड़ और आक्रामक तेवर
विपक्ष के नेता के तौर पर वीडी सतीशन ने पिनाराई विजयन सरकार को सदन से सड़क तक घेरा है। उनके पास विधायकों का बड़ा समर्थन है और संगठन पर भी उनकी पकड़ मजबूत है। लेकिन कांग्रेस के भीतर उनकी चुनौती 'हाईकमान' की पसंद है। क्या दिल्ली दरबार उन पर मुहर लगाएगा या वे भी सचिन पायलट की तरह हाशिए पर धकेल दिए जाएंगे?
2. केसी वेणुगोपाल: राहुल गांधी के 'खासमखास'
इस रेस में सबसे प्रभावशाली नाम केसी वेणुगोपाल का है। वे न केवल राहुल गांधी के 'राईट हैंड मैन' हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के स्तंभ माने जाते हैं। हाल के दिनों में उनकी स्थानीय सक्रियता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. सुधाकरन द्वारा उनके पक्ष में की गई लॉबिंग ने उनकी दावेदारी को और पुख्ता कर दिया है। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका दिल्ली कनेक्शन है।
3. रमेश चेन्निथला: अनुभव बनाम बदलाव
रमेश चेन्निथला केरल कांग्रेस का वह चेहरा हैं जिनके पास अनुभव का विशाल भंडार है। हालांकि, पार्टी का एक धड़ा अब नए और युवा नेतृत्व की मांग कर रहा है, लेकिन अगर सतीशन और वेणुगोपाल के बीच सहमति नहीं बनी, तो चेन्निथला 'सर्वमान्य' चेहरे के रूप में उभर सकते हैं।
4. शशि थरूर: रेस से बाहर होकर भी सबसे अहम
तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर इस दौड़ में भले ही प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हैं, लेकिन उनकी पैनी नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है। उनके तीखे कटाक्ष और बौद्धिक छवि परिणामों के बाद पार्टी के भीतर के समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या इतिहास दोहराएगी कांग्रेस?
कांग्रेस का पिछला रिकॉर्ड डराने वाला है। मध्य प्रदेश में कमलनाथ-सिंधिया और राजस्थान में गहलोत-पायलट की जंग ने पार्टी को भारी नुकसान पहुंचाया है। केरल में भी गुटबाजी का पुराना इतिहास रहा है। अगर मुख्यमंत्री के चुनाव में देरी हुई या किसी एक गुट को नजरअंदाज किया गया, तो यह ऐतिहासिक जीत अस्थिरता के अंधेरे में भी खो सकती है।
बीजेपी का प्रदर्शन और विजयन की हार
इस चुनाव में एक और बड़ी खबर यह है कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन खुद अपनी सीट हारते दिख रहे हैं। वहीं, 2021 में शून्य पर रहने वाली भाजपा इस बार केरल में अपना खाता खोलती नजर आ रही है और दो सीटों पर आगे चल रही है।