Explained First Constitutional Amendment Bill: भारत के इतिहास में 16 अप्रैल 2026 का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। देश की संसद में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल संविधान (131वां) संशोधन विधेयक-2026 पटल पर रख रहे हैं। संवैधानिक संशोधन बिल (131वां संशोधन) के जरिए अनुच्छेद 81 में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। नए प्रावधानों के मुताबिक राज्यों से चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या 815 तक हो जाएगी। साथ ही, केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) से सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 35 कर दी गई है। इसके अलावा, सदन में महिलाओं के आरक्षण से लेकर जनसंख्या तक की नई परिभाषा तैयार की जाएगी। संवैधानिक संशोधन बिल (131वां संशोधन) की चर्चा के बीच यह जानना बेहद आवश्यक है कि भारत का पहला संविधान संशोधन विधेयक कब आया था और उसमें क्या खास था?
10 मई 1951 को लाया गया था पहला संविधान संशोधन विधेयक
भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था और इसके बाद पहला संशोधन वर्ष 1951 में किया गया, जिसे संविधान (प्रथम संशोधन) अधिनियम, 1951 के नाम से जाना जाता है। यह संशोधन जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाया गया था। संसद ने इसे 10 मई 1951 को पारित किया, जबकि राष्ट्रपति की स्वीकृति 18 जून 1951 को प्राप्त हुई। यह पहला संशोधन मुख्य रूप से भूमि सुधार कानूनों को लागू करने, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था करने तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध तय करने के उद्देश्य से किया गया था। इसे देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। साथ ही, इस संशोधन ने उन न्यायिक फैसलों के प्रभाव को सीमित करने का मार्ग प्रशस्त किया, जो सरकार की नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा बन रहे थे। इस तरह यह संशोधन भविष्य में आवश्यकतानुसार संविधान में बदलाव करने की एक महत्वपूर्ण परंपरा स्थापित करने वाला साबित हुआ।
पहले संविधान संशोधन विधेयक में क्या प्रावधान थे?
पहले संविधान संशोधन विधेयक में कुल 4 प्रावधान थे। प्रथम संशोधन अधिनियम ने अनुच्छेद 15, 19, 85, 87, 174, 176, 341, 342, 372 और 376 में संशोधन किया। इसमें कानून की रक्षा के लिये संपत्ति अधिग्रहण आदि की व्यवस्था की गई। साथ ही भूमि सुधारों और इसमें शामिल अन्य कानूनों को न्यायिक समीक्षा से बचाने के लिये नौवीं अनुसूची जोड़ी गई। इसके पश्चात अनुच्छेद 31 के बाद अनुच्छेद 31ए और 31बी जोड़े गए।
1. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध
Article 19(1)(a) में संशोधन कर सरकार को “सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा और नैतिकता” के आधार पर कुछ प्रतिबंध लगाने का अधिकार दिया गया। 1951 में, नेहरू प्रशासन ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) को "भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दुरुपयोग" के विरुद्ध सीमित करने का प्रावधान किया।
2. भूमि सुधार कानूनों को संरक्षण
जमींदारी प्रथा खत्म करने के लिए बनाए गए कानूनों को अदालत में चुनौती से बचाने के लिए Article 31A और Article 31B जोड़े गए। भारत की संसद ने गौर किया कि अनुच्छेद 31 के खंड (4) और (6) के प्रावधानों के बावजूद, राज्य विधानमंडलों द्वारा पारित कृषि सुधार उपायों की वैधता विलंबकारी मुकदमों का विषय बन गई थी, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करने वाले इन महत्वपूर्ण उपायों का कार्यान्वयन रुका हुआ था। इसलिए भविष्य में ऐसे उपायों को बनाए रखने के लिए एक नया अनुच्छेद 31ए जोड़ा गया। इसके अतिरिक्त, जमींदारी उन्मूलन से संबंधित 13 अधिनियमों को वैध बनाने के लिए एक नया अनुच्छेद 31बी, पूर्वव्यापी प्रभाव से जोड़ा गया।
3. नौंवी अनुसूची (Ninth Schedule) की शुरुआत
नौंवी सूची जोड़ी गई, जिसमें शामिल कानूनों को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) से सुरक्षा दी गई। इसका मुख्य उद्देश्य कुछ विशेष कानूनों- खासकर भूमि सुधार (जमींदारी उन्मूलन) से जुड़े कानूनों को अदालत में चुनौती से बचाना था। आजादी के बाद सरकार जमींदारी प्रथा खत्म करना चाहती थी, लेकिन कई जमीन से जुड़े कानूनों को अदालतों में चुनौती दी जा रही थी। इससे सुधारों की प्रक्रिया धीमी हो रही थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए नौवीं अनुसूची बनाई गई। नौवीं अनुसूची को लागू करने के लिए Article 31B जोड़ा गया। इसके तहत जो भी कानून इस अनुसूची में डाले जाते हैं, वे वैध माने जाते हैं, भले ही वे कुछ मौलिक अधिकारों से टकराते हों।
4. सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण
सरकार को पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान (आरक्षण) बनाने का अधिकार दिया गया। अनुच्छेद 46 में राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत के रूप में यह निर्धारित किया गया है कि राज्य को जनता के कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को विशेष ध्यानपूर्वक बढ़ावा देना चाहिए और उन्हें सामाजिक अन्याय से बचाना चाहिए। ताकि राज्य द्वारा नागरिकों के किसी भी पिछड़े वर्ग की शैक्षिक, आर्थिक या सामाजिक उन्नति के लिए किए गए किसी भी विशेष प्रावधान को भेदभावपूर्ण होने के आधार पर चुनौती न दी जा सके, अनुच्छेद 15(3) को उपयुक्त रूप से विस्तारित किया गया।
भारत में संविधान संशोधन
पहले संविधान संशोधन विधेयक का प्रभाव क्या हुआ?
इसका प्रभाव यह हुआ कि अनुच्छेद 31 के प्रावधानों के तहत नौवीं अनुसूची में रखे गए कानूनों को इस आधार पर न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है कि उन्होंने नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है। अनुच्छेद 31 (ए) ने राज्य को संपत्ति के अधिग्रहण या सार्वजनिक हित में किसी भी संपत्ति या निगम के प्रबंधन के संबंध में शक्ति निहित की। इसका उद्देश्य ऐसे अधिग्रहणों को अनुच्छेद 14 और 19 के तहत न्यायिक समीक्षा से छूट देना था।
क्यों लाया गया था प्रथम संविधान संशोधन विधेयक
1951 में, नेहरू सरकार ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) को "भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दुरुपयोग" के विरुद्ध सीमित करने का प्रावधान किया था। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नियंत्रित करने की आवश्यकता 1950 में तब उत्पन्न हुई जब पश्चिम बंगाल में शरणार्थियों के आगमन और मद्रास में कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं की गैर-न्यायिक हत्याओं के प्रति सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर प्रेस में सरकार की कड़ी आलोचना हुई।
